25 दिसंबर – तुष्टिकरण के अंधेरे के खिलाफ भारत की प्रथम किरण श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जयंती. सदा गूंजेगा आपका “गगन में लहरता है भगवा हमारा” का उदघोष

वो आवाज जो आज भी गूंज जाती है कानो में, वो नाम जो सदा ध्रुव तारे की तरह अटल रहेगा भारत की फ़िज़ाओं में, वो व्यक्ति जो खुल कर कहता था कि “रग रग हिन्दू मेरा परिचय” .. यद्द्पि इस सत्य पर विश्वास करना बेहद कठिन है कि वो अब हमारे बीच मे नहीं है लेकिन उनके शब्द, उनकी शिक्षाओं, उनके जीवन दर्शन, उनकी जीवटता सदा सदा के लिए भारत को प्रेरणा देती रहेगी..भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सतत प्रयास करने वाले श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज जयंती है.. आज राष्ट्र याद कर रहा उस महापुरुष को जिसने अपने खुले शब्दो मे कहा था कि – “अमेरिका क्या, संसार भले ही हो विरुद्ध, पर भारत का मस्तक नही झुकेगा”  ..

कितनी मुश्किल रही होगी उनकी राहों में, कितने कांटे बिछाए गए होंगे उनके पथ पर इसका सहज अनुमान उस समय के हालात से लगाया जा सकता है कि उस समय हिन्दू, धर्म, हिन्दुत्व आदि की बातें करना भी उन्माद माना जाता था.. कुछ नेता तो खुल कर कहते थे कि वो एक्सिडेंटल हिन्दू हैं..लेकिन ठीक उसी समय भगवा ध्वज ले कर निकल पड़े थे अटल बिहारी जी मात्र कुछ गिने चुने लोगों को ले कर एक अलग ही पथ पर जो सत्य का था, न्याय का था, नीति का था..उस समय उनको जोर जोर से साम्प्रदायिक शक्तियों में गिना जाने लगा और पीड़ित हिन्दुओ की आवाज उठाने की उनकी कोशिश को दंगाई मानसिकता बताया जाने लगा ..महान सावरकर जी के पद चिन्हों पर चलना न जाने क्या गलत लगता था किसी को पर उनके पथ पथिक के रूप में अटल जी को भगवा वादी कहा जाने लगा..लेकिन इसी विरोध ने उनको मजबूती दी और वो स्वर्ण तप कर और भी ज्यादा चमकदार हो गया था..कहना गलत नही होगा कि उनके साथ पांडवों जैसी सेना भले ही कम थी लेकिन वो अजेय हो गए थे..

पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का स्मारक ‘सदैव अटल’ मंगलवार को सरकार उनकी जयंती पर राष्ट्र को समर्पित करने जा रही है। स्मारक राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनाया गया है। इसको विकसित करने वाली अटल स्मृति न्यास संस्था के मुताबिक पूर्व पीएम वाजपेयी की जयंती पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य तमाम गणमान्य हस्ती राजघाट के नजदीक स्थित सदैव अटल स्मृति स्थल पर आयोजित प्रार्थना में हिस्सा लेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संस्था के अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने बताया कि मेमोरियल 1.5 एकड़ जमीन पर बसा हुआ है, जहां 17 अगस्त को वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया गया था।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं कुशल वक्ता ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर के शिंदे का बाड़ा मुहल्ले में हुआ था। उनके पिता पंडित कृष्णबिहारी वाजपेयी अध्यापन का कार्य करते थे और माता कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं। अटलजी अपने माता-पिता की सातवीं संतान थे। उनसे बड़े तीन भाई और तीन बहनें थीं। अटलजी के बड़े भाइयों को अवधबिहारी वाजपेयी, सदाबिहारी वाजपेयी तथा प्रेमबिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाता है। सन 2009 में उन्हे दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता ही गया।  11  जून 2018 को उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था, जहाँ 16 अगस्त 2018 को वे परलोक सिधार गये। 17 अगस्त को उनकी दत्‍तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या मुखाग्नि दी। आज उन महान विभूति को उनके जयंती  नमन करते हुुुए उनकी  यशगान को सदा के लिये अमर  रखने का संकल्प है सुदर्शन परिवार का.

 

 

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