25 अप्रैल- पुलवामा में 4 इस्लामिक आतंकियों को मार कर आज ही अमर हो गये थे भारत माँ के लाल अजय कुमार.. जय हिन्द की सेना

यकीनन इन्हें बहुत कम लोग ही जानते होंगे .. राजनीति के शोर में इनका नाम और इनका काम दोनों दब सा गया होगा क्योकि राजनेताओं के बड़े बड़े वादे कानो में ऐसे सुनाई देते हैं जैसे कि उन्होंने ही अब तक देश के लिए सारा बलिदान और त्याग किया है . कुछ ने तो अपनी कई पीढियों को तमाम क्रांतिकरियो से आगे रख कर केवल इसलिए गिनना शुरू कर दिया है जिस से उन्हें लोग वोट और वोट के साथ भारत पर राज करने का बहुमत दे.. पर अजय कुमार जी जैसे योद्धा जन्म ही लेते हैं केवल मातृभूमि की सेवा करने के लिए .

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विदित हो कि पुलवामा में 4 इस्लामिक आतंकियों को ढेर कर के आज ही अंतिम सांस ली भी भारत माता के लाल अजय कुमार जी ने . आज भी इनकी गौरव गाथा अमर है उन वादियों में जहाँ पर कुछ गद्दार आज़ादी के नारे लगाया करते हैं . देश की सीमा पर भारत माता की रक्षा करते हुए चार आतंकियों को मौत के घाट उतारने वाले जिला सिरमौर के शहीद अजय कुमार को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वीरगति के उपरान्त शौर्य चक्र से सम्मानित किया है।

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यह सम्मान दिल्ली में शहीद अजय कुमार के बलिदानी माता-पिता ने ग्रहण किया। शहीद अजय के माता-पिता को इस बात का गर्व है कि उनका जांबाज बेटा मां भारती की रक्षा करते हुय देश पर कुर्बान हुआ। अजय ने 25 अप्रैल, 2018 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आमने-सामने की मुठभेड़ में शहीद होने से पहले चार आतंकियों को मार गिराया था। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के 26 वर्षीय सिपाही अजय कुमार के पिता सुरेश कुमार व माता कमला देवी को मंगलवार को दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र प्रदान किया। उन्होंने चार आतंकवादियों को मारने व अपनी टीम की सुरक्षा करने के लिए अद्भुत साहस, असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

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जिला सिरमौर के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की कोटला पंजोला पंचायत के थुरन-पंजोला निवासी अजय कुमार अप्रैल 2015 में भारतीय सेना की 42 राष्ट्रीय रायफल में तैनात थे। 26 वर्षीय अजय कुमार का जन्म 25 जून, 1992 को हुआ था। वह अपने परिवार का एकलौता सहारा थे। अजय 12 दिसंबर, 2013 को सेना में भर्ती हुए थे। अप्रैल 2018 में अजय के शहीद होने से कुछ माह पहले ही उसके छोटे भाई संजय का निधन बीमारी के चलते हो गया था। अजय के पिता सुरेश कुमार लकड़ी के मिस्त्री है तथा माता गृहिणी हैं।

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वीर योद्धा अजय कुमार के पिता एक छोटी सी फर्नीचर की दुकान चलाते हैं। शहीद अजय कुमार का परिवार मूलतः सोलन जिला के कथेड़ का है, जोकि 13 वर्ष पहले जिला सिरमौर की कोटला पंजोला पंचायत के थूरंग गांव में आकर बस गया था। आज भारत के इस माहवीर के बलिदान दिवस पर सुदर्शन परिवार इस योद्धा को और उनके परिवार को बारम्बार नमन करते हुए उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प दोहराता है . जय हिन्द की सेना .

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