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20 फ़रवरी- सुकमा जिले में नक्सलियों की सटीक जानकारी सुरक्षाबलों को देते हुए आज ही वीरगति पा गए थे IB अधिकारी उमाकांत सिंह

ये वीर भी उन जगमगाते सितारों में से एक हैं जिनको भले ही ज्यादा प्रचार आदि न मिला हो लेकिन इनके सत्कर्मों व राष्ट्र के लिए इनके त्याग की ही बदौलत आज देश तमाम साजिशों के बाद भी अपने मूल अखण्ड रूप में सही सलामत है.. राष्ट्र को सदा ही नतमस्तक होना चाहिये उन वीरों के आगे जो बिना चर्चा में आये और बिना ही शोर मचाये अपना सर्वस्व इस देश के लिए न्योछावर कर के चले गए.. राष्ट्र की रक्षा के लिए निस्वार्थ रूप से अपना बलिदान दे कर अमरता पाने वाले उन तमाम ज्ञात अज्ञात वीर बलिदानियों में से एक हैं IB अधिकारी बलिदानी उमाकांत सिंह जी जिनको नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा में आज ही मिली थी वीरगति..

नक्सलियों की कमर तोड़ने के चलते वो नक्सलियों के निशाने पर बहुत पहले से थे.. उनका विरोध जहां सुकमा के नक्सलियों में तो था ही, साथ ही दिल्ली तक फैले नक्सल समर्थको की नजर में वो खटकते थे.. ये वही नक्सल समर्थक हैं जो खुद को बड़ी शान से अर्बन नक्सल कह कर बुलाया करते हैं..आईबी के अधिकारी उमाकांत ने सुकमा जिले में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को कौटिल्य अवार्ड सहित कई उपलब्धियां दिलाई थीं…बस यही सब था जो नक्सल व नक्सस समर्थको को खल रहा था , वो वो अपने कर्तव्यपथ से जरा सा भी विचलित नही हुए..और न ही देश हित मे किसी दबाव में झुके..

 

रविवार को एक सड़क दुर्घटना में इंटेलिजेंस ब्यूरो के जिले के निवासी एक अधिकारी की मौत हो गई है। दुर्घटना शाम लगभग साढ़े पांच बजे की है जो सुकमा से 8 किलोमीटर दूर रामाराम के पास हुई। शहीद का शव विमान द्वारा पैतृक आवास सेमरौना लाया गया जहां पुरे सैनिक सम्मान के साथ श्रदांजलि देते हुये अंतिम संस्कार किया गया है। मौत की खबर से पूरा क्षेत्र सदमें में है।

बताया गया कि वर्ष 2018 में आज ही के दिन , जो रविवार था आईबी में एसआई उमाकांत सिंह शाम कोने साथियों के साथ बोलेरो वाहन में बैठकर जिले के दोरनापाल से सुकमा आ रहे थे। इसी दौरान एक ट्रक ने दुस्साहसिक अंंदाज़ में उनके वाहन को रौंद दिया.. इस हमले का अंदाज़ ठीक फ्रांस और ब्रिटेन में हुए हमले जैसा ही था जिसमें लोगों को मारने के लिए वाहनों को हथियार बनाया गया था. नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित इस इलाके में कुछ ने इसको सामान्य दुर्घटना करार दिया लेकिन मौके के हालात कुछ और ही बयान कर रहे थे.. इस भयानक कांड में उमाकांत सिंह वीरगति को प्राप्त हुुुए थे.. दुर्गम इलाका होंने के चलते उन तक जल्द सहायता भी नही पहुच पाई थी..

उनके साथियों को बेहतर इलाज के लिए राजधानी रायपुर के हास्पिटल में भर्ती कराया गया लेकिन तब तक IB सब इंसपेक्टर उमाकांत सिंह के प्राण पखेरू उड़ चुके थे. उत्तर प्रदेश के निवासी उमाकांत के दो जुड़वां मासूम बच्चे आर्यन सिंह और आरो सिंह भी हैं, वे अपने परिवार के साथ सुकमा में ही रहते थे। आईबी के इस काबिल अधिकारी की दुर्घटना की सुचना पर पहुंची पत्नी क्षमा सिंह के आंखों में केवल एक बार देखने बाद सदैव के लिये आंखें बंद करके, छोटे छोटे मासूम बच्चों को छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गये। पत्नी क्षमा ने दूरभाष पर अपने ससुर श्याम बहादुर सिंह को दुर्घटना की सुचना दी। सुचना मिलते ही शहीद के पैतृक आवास पर कोहराम मच गया था। बलिदानी के दादा शेरबहादुर सिंह घटना की सुचना पाते ही बेहोश होकर गिर पड़े, होश आने पर नन्हे नन्हे बुलाते है और बेहोश हो जाते.

उस समय पुलिस लाइन से आये जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया था। ततपश्चात एसडीएम बल्दीराय प्रिया सिंह, आईबी के एसपी ऐके सिंह, आईबी के डिप्टी एसपी अशोक पाण्डेय ने पुष्पचक्र समर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी..सुकमा के इस गुमनाम वीर के लिए उस दिन जिले के अधिकारियों के साथ विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा था और सबने मिल कर राष्ट्र की अखंडता को बनाये व बचाये रखने के लिए खुद को स्वाहा कर देने वाले इस योद्धा को अंतिम विदाई दी थी ..आज एक अन्य गुमनाम वीर बलिदानी उमाकांत सिंह को उनके बलिदान दिवस पर सुदर्शन परिवार उनको बारंबार नमन करते हुए उनकी यशगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है ..

 

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