11 दिसंबर- भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. दुर्दांत आतंकियों की फांसी पर अंतिम मुहर व धर्म विरोधियों के चेहरों को बेनकाब करने के लिए राष्ट्रभक्त आपके आभारी हैं

भारत के पूर्व राष्ट्रपति व अपनी न्यायप्रियता के लिए विख्यात प्रणब मुखर्जी जी का का जन्मदिन है..देश के कई गद्दार दुश्मनों को बिना किसी दबाव व बिना किसी हिचक के फांसी के फंदे पर लटकाने वाले और उसके बाद बेहिचक हिन्दू। व धर्म विरोधियों के चेहरों को अपनी किताब के माध्यम से बेनकाब करने के लिए राष्ट्र भक्त इनके सदैव आभारी रहेंगे.. राष्ट्रीय स्वयं सेव्घके  के कार्यक्रम में सम्मिलित हो कर, बिना किसी की परवाह किये बिना हिन्दू हृदय सम्राट बाला साहब से मिल कर आदरणीय प्रब मुखर्जी जी ने वो छाप छोड़ी है जो आने वाले समय मे कईयों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकती है जो दबाव आदि में या तो घुटने टेक देते हैं और या तो बिखर जाते हैं .. प्रणब दा के नाम से विख्यात पूर्व राष्ट्रपति की पुस्तक से ये देश अपने मूल धर्म से चिढ़ने वालों के बारे में जान पाया है जो चुनाव में बहुरूपिये का वेश बना कर जनता के आगे जाते रहते हैं ..

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में हुआ था. उनका 13 से अनोखा नाता रहा है. वे 13 वें राष्ट्रपति बनने के लिए मैदान में उतरे. 13 नंबर का बंगला है दिल्ली में. 13 तारीख को आती है शादी की सालगिरह. इतना ही नहीं 13 जून को ही ममता ने प्रणब का नाम उछाला था.प्रणब मुखर्जी के पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और वो 10 वर्ष से भी अधिक जेल में रहे. उन्होंने 1920 से लेकर सभी कांग्रेसी आंदोलनों में हिस्सा लिया. वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति और पश्चिम बंगाल विधानपरिषद (1952- 64) के सदस्य‍ व जिला कांग्रेस समिति, वीरभूम (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष रहे. शुभ्रा मुखर्जी उनकी पत्नी हैं. प्रणब मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायक हैं. उनकी बेटी शर्मिष्ठा एक नृत्यांगना हैं. उनके भाई शांति निकेतन विश्व भारती यूनिवर्सिटी के इंदिरा गांधी सेंटर फॉर नेशनल इंटीग्रशन के डायरेक्टर पद से रिटायर हुए है.

अपने करियर की शुरुवात प्रणव मुखर्जीजी ने पोस्ट एंड टेलेग्राफ़ ऑफिस से की थी जहां वे एक क्लर्क थे. 1963 में विद्यानगर कॉलेज में वे राजनीती शास्त्र के प्रोफेसर बन गए और साथ ही साथ देशेर डाक  में पत्रकार के रूप में कार्य करने लगे. प्रणव मुखर्जी जी ने राजनैतिक सफ़र की शुरुवात 1969 में की. वे कांग्रेस का टिकट प्राप्त कर राज्यसभा के सदस्य बन गए, 4 बार वे इस पद के लिए चयनित हुए. वे थोड़े ही समय में इंदिरा जी के चहेते बन गए थे. सन 1973 में इंदिरा जी के कार्यकाल के दौरान वे औद्योगिक विकास मंत्रालय में उप-मंत्री बन गए. 1975-77 में आपातकालीन स्थिति के दौरान प्रणव मुखर्जीजी पर बहुत से आरोप भी लगाये गए. लेकिन इंदिरा गांधी की सत्ता आने के बाद उन्हें क्लीन चिट मिल गया. 

इंदिरा गांधी की मौत के पश्चात् राजीव गांधी से प्रणव जी के संबंध कुछ ठीक नहीं रहे और राजीव गाँधी ने अपने कैबिनेट मंत्रालय में प्रणव जी को वित्त मंत्री बनाया था. लेकिन राजीव गाँधी से मतभेद के चलते प्रणव दा ने अपनी एक अलग “राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस” पार्टी गठित कर दी. 1985 में प्रणव जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रहे. थोड़े समय के बाद 1989 में राजीव गाँधी के साथ सुलह हो गई और वे एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ गए. कुछ लोग इसके पीछे की वजह ये बोलते थे कि इंदिरा गाँधी की मौत के बाद प्रणव जी खुद को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में देखते थे, लेकिन उनकी मौत के बाद राजीव गाँधी से सब उम्मीद करने लगे. पी वी नरसिम्हा राव का प्रणव मुखर्जीजी के राजनैतिक जीवन को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान है. जब प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी थे तब उन्होंने प्रणव मुखर्जी जी को योजना आयोग का प्रमुख बना दिया. थोड़े समय बाद उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विदेश मंत्रालय का कार्य भी सौंपा गया.

सन 1999 से 2012 तक प्रणव मुखर्जी जी केंद्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष रहे. 1997 में प्रणव मुखर्जीजी को भारतीय संसद ग्रुप द्वारा उत्कृष्ट सांसद का ख़िताब दिया गया. आदरणीय प्रणब दा के परिजन भी प्रबल राष्ट्रवादी व नारी के सम्मान आदि के लिए सचेत राजनेताओं / नेत्रियों की पंक्ति में हैं.. अभी हाल ही में नारी के अपमान के लिए कुख्यात, सुदर्शन न्यूज की महिला एंकर से लाइव डिबेट में अभद्रता करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता, पूर्व मंत्री दिल्ली सरकार व अरविंद केजरीवाल के दाएं हाथ कहे जाने वाले सोमनाथ भारती के आवास पर महिला शक्ति के साथ बेहद उग्र प्रदर्शन करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी जी ने इसका जीवंत प्रमाण दिया था . कई कुख्यात आतंकियों के अंतिम प्रयासो को विफल करने वाले निर्भीक व अटल छवि के पूर्व राष्ट्रपति आदरणीय प्रणब मुखर्जी को उनके जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके सत्कर्मो को वास्तविक रूपों में जनता के आगे लाते रहने का संकल्प सुदर्शन परिवार लेता है ..

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