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सोशल मीडिया पर एक कविता में सवाल होता था -” भेड़िये मौन थे , राणा प्रताप जी कौन थे?” इसका उत्तर दिया भारत के गृहमंत्री ने

सोशल मीडिया पर एक कविता वायरल है –

जलती रही जौहरें , मगर भेड़िये मौन ने…जिसके अंत मे था कि–

राणा प्रताप जी कौन थे ??

शायद ये कविता भारत सरकार तक पहुँच गयी और इसका उत्तर देने के लिए स्वयं राजनाथ सिंह जी ने फैसला किया ..और जो उत्तर था वो भारत वर्ष को गौरवान्वित करने वाला है …

राजस्थान के पाली जिले के खारोकड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में महाराणा प्रताप की मूर्ति के अनावरण के समय श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि-  ” अगर अकबर दी ग्रेट बताया जाता है तो महाराणा प्रताप जी भी ‘महान’ थे ,”…

भारत सरकार के गृहमंत्री ने इतिहासकारों के लिखे एकतरफा इतिहास पर उंगली उठाई .. उन्होंने साफ बताया कि त्याग , बल और शौर्य के प्रतीक महाराणा प्रताप जी को इतिहास की पुस्तकों में वो सम्मान नहीं मिला जिसके वो वास्तविक हकदार थे ..

बहुत लंबे समय और शायद स्वतंत्रता के बाद पहली ऐसी सरकार जनता को भी देखने को मिल रही है जिसने खुले और उन्मुक्त कंठ से राणा प्रताप और शिवा जी जैसे सच्चे वीरों का आधिकारिक रूप से गुणगान किया और सम्मान किया …

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