बलिदान दिवस, आगरा के गौ रक्षक अरुण माहौर जी

आगरा : जिस आगरा में अक्सर लोग ताज़महल के आगे इश्क, मोहब्बत आदि के मनोभावों को व्यक्त करने जाते हैं, उसी आगरा में करोड़ो सनातनियों की पूज्य व् शास्त्रों में माँ का दर्जा पायी गौ माता की विधर्मियों से रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर के सदा के लिए अमर हुए श्री अरुण माहौर जी को आज उनके बलिदान दिवस 25 फ़रवरी पर सुदर्शन न्यूज़ की तरफ़ से भावभीनी व् अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। 
स्वर्गीय अरुण माहौर का जन्म आगरा के उस मोहल्ले मंटोला में हुआ था जहाँ हिन्दू आबादी बहुत कम है। अरुण जी बचपन से ही साहसी स्वभाव के थे। कोई गलत काम होते देख वे चुप नहीं रह पाते थे। लड़कियों पर छेड़छाड़ या धर्मांतरण की कोई घटना होते ही वे पीड़ित परिवार की सहायता तथा पुलिस के माध्यम से अपराधियों को दंडित कराने का प्रयास करते थे। वे अपने मोहल्ले के हिन्दुओं को पलायन न करने लिए भी प्रेरित करते थे। 
उनकी हत्या से तीन साल पूर्व उनकी रोज़ी रोटी के साधन फर्नीचर की दुकान को जला दिया गया जिससे डर कर वे भाग जाएं; पर अरुण जी ने मोहल्ला नहीं छोड़ा। गोरक्षा अरुण माहौर जी की प्राथमिकता थी। सड़क पर यदि कोई घायल गाय मिलती, तो वे उसके इलाज का प्रबन्ध करते थे। अरुण जी जैसे युवकों के दम पर हजारों गायों की रक्षा हुई तथा आगरा के विभिन्न थानों में लगभग 250 मामले दर्ज हुए।
अरुण जी के कारण गोतस्करों को भारी हानि हो रही थी। अतः वे उनकी आंखों में कांटे की तरह खटकने लगे। उन्होंने कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी दी गयी, पर वे डरे नहीं। हत्या से 2 दिन पहले 23 फरवरी को आवारागर्दी करते हुए एक गुंडे शाहरुख से उनकी झड़प हुई थी। एकतरफा तुष्टिकरण करते सरकारी अमले ने अरुण जी को किसी प्रकार की सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई और 2 दिन बाद 25 फरवरी, 2016 को दिन दहाड़े अरुण जी की हत्या कर दी गयी।
बलिदान के समय अरुण जी की आयु केवल 45 वर्ष थी। परिवार में अकेले वे ही कमाने वाले थे। अखलाख के परिवार के लिए अपने कोष खोल देने वाली सरकार ने अरुण जी के परिवार को थोड़े से मुवावजे में चलता किया व् उसी अखलाख के विषय पर महीनों चिल्लाये तमाम में से किसी भी एक संचार माध्यम ने ये भी बताना उचित नहीं समझा कि आगरा में क्या हुआ था। सुदर्शन न्यूज वीरगति पाये गौ भक्त अरुण माहौर के शोक संतृप्त परिवार की हर सम्भव , हर समय सहायता हेतु कृत संकल्पित है।
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