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ग्राहम स्टेंस ही नहीं , दारा सिंह पर आरोप था शेख रहमान की भी हत्या का ठीक उसी तरह जला कर, जिसे वो मानता था गौ हत्या का दोषी .. दारा सिंह पार्ट – 2

धर्मांतरण का दोषी मान कर ग्राहम स्टैंस की हत्या कर के फरार हुआ दारा सिंह 8 माह नहीं लगा पुलिस के हाथ जबकि उसकी तलाश में सारी सरकारी एजेंसियां लगा दी गयी थी जिसमे राज्य और केंद्र भी शामिल थे …. पार्ट – १ से आगे ——

फरारी के 8 महीने बाद दारासिंह फिर अचानक ही पूरे भारत की सुर्ख़ियों में छा गया .. छा भी कैसे ना जाता , आखिर इस बार उसने हमला किया था अल्पसंख्यक समुदाय के शेख रहमान पर , ठीक उसी पुराने अंदाज़ में ….. वो दिन था 28 अगस्त जब स्थानीय सभी अखबारों में बड़े बड़े और मोटे-मोटे अक्षरों में एक खबर छपी कि उड़ीसा के क्योंझर जिले के एक गाँव पाडियावेड लगभग 20 हथियारबन्द कट्टर हिन्दुओं की एक भीड़ ने एक 32 वर्षीय मुसलमान दुकानदार और वहां के नामी व्यापारी शेख रहमान पर प्राणघातक हमला किया, अचानक हुए इस हमले में पूरी बाज़ार में अफरातफरी मच गयी . शेख रहमान की दूकान को जला कर राख कर दिया गया और उस धूं धूं करती दूकान में उस शेख रहमान नाम के व्यापारी को भी फेंक कर जला दिया गया ..

सिहर गया था ईसाई समुदाय के बाद मुस्लिम समाज पूरे उड़ीसा का और हर तरफ बस के मांग गूँज रही थी कि कुछ भी हो , कैसे भी हो दारा को पकड़ो .. दहशत का आलम ये था कि शेख रहमान की हत्या की प्राथमिकी खुद पुलिस को अपनी तरफ से दर्ज करवानी पड़ी और उसमे पुलिस के कर्मचारी ने बयान दिया कि उसने अपनी आँख से देखा कि उस भीड़ का सेनापति दारा सिंह था . ये हंगामा उड़ीसा से निकल पर पूरे देश में फ़ैल गया . हर तरफ यही हो हल्ला मच गया कि उड़ीसा में अल्पसंख्यक अब बिलकुल सुरक्षित नहीं हैं , तमाम बुद्धिजीवी से ले कर धर्म निरपेक्ष समाज दारा सिंह को किसी भी हालत में पकड़ कर फांसी देने की मांग करना शुरू कर दिया .  

ग्राहम स्टेन्स की हत्या के बाद से ही दारा सिंह के बारे में सरकार रूप से प्रचारित हो चुका था कि वो बजरंग दल का सदस्य है ..कांग्रेस ने इसे भाजपा , बजरंग दल, विहिप के खिलाफ एक हथियार के रूप में प्रयोग करने लगी और इन संगठनों को अल्पसंख्यक विरोधी घोषित कर के जबरदस्त तरीके से प्रचारित करना शुरू कर दिया . कई बुद्धिजीवियों ने जो धर्मांतरण के समय बर्फ जैसे खामोश रहते थे , उन्होंने तत्काल ही बजरंग दल और विहिप पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जिसके केंद्र में उन्होंने दारा सिंह को रखा था .. दारा सिंह का चेहरा कुछ यू पेश किया गया कि यदि दारा से बचना है तो कांग्रेस को चुनना हैं या इसे इस तरह से कह सकते हैं कि भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को वोट देना आवश्यक है।  इस प्रचार में चर्च और कम्युनिस्ट तुरन्त मैदान में कूद पड़े थे उनसे मिले समर्थन के बाद सोनिया गांधी ने इसे तुरन्त चुनाव का मुख्य मुद्दा बना लिया। 

मुस्लिमों को शेख रहमान का और ईसाइयों को ग्राहम स्टेंस का चेहरा दिखा कर अल्पसंख्यक मतों को अपनी तरह लाने के लिए दारा सिंह को संघ-परिवार से जोड़कर भाजपा के विरुद्ध धुंआधार प्रचार प्रारम्भ हो गया। इसका सुखद फल तब कांग्रेस को मिला जब चर्च ने एक ओर घोषणा कर दी कि वह दक्षिण बिहार में कांग्रेस का समर्थन करेगा और उनके लिए वोट मांगेगा . पर वो कुछ सवालों का जवाब नहीं दे सके कि यदि दारा सिंह की कोई राजनैतिक शक्ति मालिक होती तो वो शकित क्या इतनी मूर्ख थी कि उसने अपनी अल्पसंख्यक विरोधी बर्बरता के प्रदर्शन के लिए कांग्रेस शासित उड़ीसा के एक छोटे से क्षेत्र और केवल एक व्यक्ति दारासिंह को एकमात्र आधार बनाती ?

यदि वह शक्ति ऐसी दुर्दांत शक्ति का प्रदर्शन करना ही चाहती तो वो उड़ीसा ही नहीं पूरे भारत में ऐसा प्रदर्शन क्यों ना करवा देती ? क्या भारत में सिर्फ उड़ीसा में उसके पास ये शक्ति और सामर्थ्य था और कहीं नहीं ?चाहता है तो भारत के अलग-अलग भागों में ऐसी बर्बर वारदातें करने का सामथ्र्य उसके पास नहीं रह गया है? यदि दारासिंह सचमुच किसी को राजनैतिक लाभ पहुंचाता रहा होता तो वह ऐसे कार्य करने के लिए ऐसे समय ही क्यों चुनता है, जब चुनाव का समय था जिस से निश्चित रूप से विरोधियों को लाभ पहुंच रहा दिख रहा था और उसके अपने खेमे को हानि होती दिख रही थी …

बहुत प्यास के बाद भी दारा सिंह पर गठित आयोग वधवा आयोग ऐसा ठोस प्रमाण नहीं पेश किया जा सका जिससे दारा सिंह को किसी के इशारे पर कार्य करता हुआ साबित किया जा सके … जब वधवा आयोग ने अपनी ये निष्पक्ष रिपोर्ट पेश की तब कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष टीम ने इस आयोग पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए … वधवा आयोग की विश्वसनीयता, उसकी निष्पक्षता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया … एक ऐसी पुस्तक छाप दी गयी जिसके विमोचन में कुछ महीनों प्रधानमंत्री रहे इन्द्र कुमार गुजराल तक पहुंच गए थे …

क्या यही खामोश हो गया था दारा या कुछ और भी किया उसने ?

कौन था वो ? 

कहाँ से था वो ?

कैसे पकड़ा गया वो ?

कौन सी सजा मिली उसको ?

जानिये अगले पार्ट में..जुड़े रहिये सुदर्शन से ….. .क्रमश: 

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