27 जुलाई: वीर बलिदानियों की टोली, राष्ट्र रक्षक CRPF की स्थापना दिवस पर समूचे राष्ट्र को हार्दिक शुभकामनाएं

देश के लिए अगणित बलिदान देने वाला और निश्चित रूप से भारत की जनता के प्राणों का रक्षक, वीर बलिदानियों का समूह , कश्मीर से बस्तर तक भारत की अखंडता बचाये व बनाये रखने के लिए संघर्ष करते योद्धाओं के समूह CRPF की स्थापना दिवस पर आज उसके सभी रणबांकुरों को बारम्बार नमन व वंदन है जो इसकी स्थापना दिवस के बाद से अब तक राष्ट्र की रक्षा किये हैं .. भले ही कुछ ने अपने प्राण दे कर तो कुछ ने अपनी जवानी  दे कर ..केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानि (सीआरपीएफ) भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सबसे बड़ा है. यह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करता है.

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सीआरपीएफ को ब्रिटिश काल में 27 जुलाई, 1939 में सीआरपी यानी क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के नाम से बनाया गया था, लेकिन आजादी के दो साल बाद 1949 में देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल इस पुलिस फोर्स का नाम बदल दिया.पटेल ने सेवाओं को कायम रखते हुए इसका नाम बदलकर सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स कर दिया था. पटेल ने ब्रिटिशों की पहचान से मुक्ति दिलाने यह कदम उठाया था.आपको बता दें कि मध्यप्रदेश के नीमच में ब्रिटिश राज के दौरान उत्तर भारत का सैन्य घुड़सवार सेना मुख्यालय बनाया गया था.

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योद्धाओं के इस बल के लिए आज ही अर्थात  27 जुलाई एक विशेष महत्व का दिन है तथा प्रत्येक वर्ष इस दिन को ‘स्थापना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस बल की दूसरी बटालियन आज़ादी के बाद तुरन्त बनी थी और तीसरी बटालियन 1956 में बनी थी। केरिपुबल आतंकवाद, नक्सलवाद तथा अन्य भयावह हालातों का सामना करता है। आज इसकी संख्या एक से बढ़कर 217 बटालियन की हो गई है। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल विश्व का सबसे बड़ा एवं पुराना बल बन गया है।

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वर्ष 1939 में एक बटालियन बनाई गई थी, लेकिन अब 239 बटालियन बन चुकी हैं। सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ा अद्र्धसैनिक बल है। देश में अलगाववाद, सांप्रदायिकता, आतंकबाद, नक्सवाद आदि समस्याएं विकराल रूप धारण किए हुए हैं। ऐसे में यह अद्र्धसैनिक बल आंतरिक सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संसद भवन पर आतंकी महले में बल के कार्मिकों को वीरता के लिए अशोक चक्र से भी नवाजा गया। बल अनेकता में एकता का प्रतीक है।

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भीड़ या दंगों पर काबू पाना, आतंकियों को मार गिराने के ऑपरेशन, नक्सलियों से निपटना, संवेदनशील जगहों की सुरक्षा, प्राकृतिक आपदा के वक्त बचाव कार्य, वीआईपी लोगों की सिक्यॉरिटी, बीहड़ जंगलों में ड्यूटी या फिर चुनाव कराना, सीआरपीएफ के जवान हर जगह मौजूद हैं। सीआरपीएफ के त्याग व बलिदान के अनेक सच्चे किस्से हैं .। कश्मीर में सीने पर गोली खाकर दूसरों की जान बचाने वाले जांबाज कश्मीर से लेकर नक्सली इलाकों में शहीद हुए सैकड़ों जवानों तक। हालांकि, देश की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने वाले सीआरपीएफ के वीरों का हम बारम्बार धन्यवाद करते हैं .

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80 के दशक में पंजाब और 90 के दशक में त्रिपुरा से आतंकवाद को हटाने के लिए इन जवानों ने सामने से मोर्चा लिया। अब पिछले दो दशकों से सीआरपीएफ देश से नक्सली समस्या को मिटाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहा है। फोर्स का एक-तिहाई हिस्सा नक्सलियों के खात्मे में ही लगा हुआ है। उनके अतुलनीय पराक्रम के ही चलते 5000 से ज्यादा नक्सलियों को सरेंडर कराने के अलावा लगभग 1000 खतरनाक नक्सलियों को मुठभेड़ में खत्म किया गया है। सीआरपीएफ ने झारखंड के सारंदा जंगली क्षेत्र को मुक्त कराया, जो कभी नक्सलियों का बड़ा गढ़ था। पिछले कुछ सालों से झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में विकास कार्यों को पटरी पर लाने में इन जवानों ने शानदार भूमिका निभाई है।

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इतना ही नही, कश्मीर में सेना व जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिला कर आतंकियों व पाकिस्तान के परोक्ष छद्म युद्ध से संघर्ष कर रही वीरों की इस टोली ने कई दुर्दांत व कुख्यात मोस्ट वांटेड आतंकियों को मार कर समाज को निर्भयता प्रदान की है व कश्मीर को उसके पुराने स्वरूप में लाने की कोशिशों में अपना योगदान दिया है .. हजारों पत्थरबाजों की भीड़ को प्रशिक्षित रूप से कंट्रोल करने की महारत जिस प्रकार CRPF को हासिल है उस प्रकार शायद ही संसार के किसी और बल ने कर के दिखाया हो..आज उन वीर योद्धाओं की टोली के स्थापना दिवस पर सभी शूरवीरों को सैल्यूट करते हुए  अमरता को प्राप्त हुए सभी वीर बलिदानियों की गौरवगाथा को सदा सदा अमर रखने का संकल्प सुदर्शन परिवार लेता है .. जय हिंद

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