Happy Maha Shivratri: बम भोले के नारों से गूंज रहा आसमान.. मंदिरों में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

Happy Maha Shivratri: बम भोले के नारों से गूंज रहा आसमान.. मंदिरों में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब


आज हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है. हर हर महादेव तथा बम भोले के नारों से आकाश गुंजायमान है तो मंदिरों में शिवजी के भक्तों की लाइन लगी हुई है. सुबह से ही हर छोटे-बड़े मंदिर में बड़ी संख्या में देवो के देव महादेव के भक्त, भगवान भोलेनाथ के भक्त अपने आराध्य के दर्शन के तथा पूजा के लिए उमड़ पड़े हैं.

भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए महाशिवरात्रि से अच्छा कोई शुभ अवसर नहीं है. महाशिवरात्रि के दिन भोले शंकर को प्रसन्न करने के लिए लोग व्रत रखते हैं. कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत रखते हैं उन्हें भगवान शिव की कृपा मिलती है. पूरा दिन भगवान शिव के चरणों में भक्ति के साथ बिताना चाहिए. सुबह सबसे पहले  जल में काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद भोले शंकर के शिवलिंग पर दूध, शहद से अभिषेक कराना चाहिए.

कोरोना से पीड़ित गरीब लोगो के लिए आर्थिक सहयोग

शिवाभिषेक करते समय ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए.  इस व्रत करें तो ध्यान रखें कि चावल, आटा और दाल का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर निराहार व्रत नहीं रख सकते तो इस दिन फ्रूट्स व दूध ले सकते हैं. शाम को कूट्टू के आटे से बनी पूड़ी, सिंगाड़े का आटा ले सकते हैं. इसके अलावा आलू और लौकी का हलवा भी ले सकते हैं. अगर आप पूरे दिन निराहार व्रत रखना चाहते हैं तो अगले दिन स्नान करके व्रत का पारण कर सकते हैं. इस बीच रात्रि में भोले शंकर का जागरण करना चाहिए. कहा जाता है कि शिवरात्रि में संपूर्ण रात्रि जागरण करने से महापुण्य फल की प्राप्ति होती है.

यही कारण है कि भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद, भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लोग मंदिर जा रहे हैं तथा शिवजी की पूजा कर रहे हैं. कर्नाटक के कलबुर्गी में 25 फिट ऊंचा शिवलिंग बनाया गया है. महाशिवत्राी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर विशेष पूजा अर्चना की गई है. शिव और शक्ति के महामिलन के पर्व शिवरात्रि पर श्रधालुओं का भारी जमावड़ा आज वाराणसी में देखने को मिला.द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सबसे महत्वपूर्ण बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रात से ही कतार बनाकर खड़ी हो गई थी.

गंगा स्नान के बाद भक्त अपने बाबा के दर्शन के लिए हाथ में गंगा जल, माला फूल, भांग और धतूरा लेकर मंदिर की तरफ चल दिए. वैसे तो शिवरात्रि हर महीने आती है. परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है. इसी खास दिन देवादिदेव महादेव भगवान शिव, भगवती गौरी के साथ दाम्पत्य सूत्र  मे बंधे थें. वाराणसी के लिए यह पर्व महा पर्व के रूप में मनाया जाता है आज के दिन वाराणसी आने वाले विदेशी भी शिव अर्चना में लीन हो जाते हैं. सुदर्शन परिवार की तरफ से समस्त धार्मिकों को महाशिवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share