31 दिसंबर- 88% मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया को आज मिली थी मान्यता. वो इंडोनेशिया जिसके कभी शासक थे श्रीविजय, शैलेन्द्र, संजय, माताराम और सिंह श्री

अन्तराष्ट्रीय स्तर के कुछ इतिहासकारों के लिए इंडोनेशिया का इतिहास मात्र आज से शुरू होता है जब उसने इटली के खिलाफ संघर्ष कर के स्वतंत्रता पाई थी और उसके बाद दुनिया के 18 देशो ने उनको एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी . लेकिन अगर उसके थोडा अतीत में जाया जाय तो वो इतिहास सामने आएगा जो किसी के लिए एक बार सोचने पर मजबूर कर देने वाला होगा . खास कर उनके लिए भी जो खुद को कट्टरपंथी दिखाने के लिए हिन्दुओ के खिलाफ मोर्चा खोले रहते हैं . यकीनन अगर वो अपने इतिहास को देखें और जाने तो उनको खुद पर लज्जा आएगी क्योकि जाने अनजाने में वो अपने ही उन पूर्वजो को अपमानित कर रहे होते हैं जो उन्हें कभी विश्वगुरु के रूप में बना कर छोड़ गये थे . भले ही उन्होंने अपनी छवि को आज किसी और रूप में बना लिया हो .

विदित हो कि अगर आज लगभग इस्लामिक इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता को देखा और जाना जाय तो वो है मुनि सभ्यता जिसको वहां की भाषा में बुनी सभ्यता कहा जाता है . आज भी वहां भगवान श्रीराम की रामलीला होती है और वहां की वायुसेवा का नाम गरुण एयरलाइन्स है जो भगवान विष्णु का वाहन हिन्दू शास्त्रों के अनुसार माना जाता है . हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरें वहां की मुद्राओं पर आज भी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है और वहां के लोग खुल कर स्वीकार करते हैं कि उनके पूर्वज सनातनी थे. जब तब इंडोनेशिया शुद्ध सनातनी परम्परा पर रहा तब तक वो किसी का गुलाम नहीं रहा लेकिन जैसे जैसे वहां की सभ्यता पर तमाम अन्य सभ्यताएं हावी होती गयी उसका पतन होता गया और आखिरकार उस पर इटली का शासन हो गया था .

इसा पूर्व ४थी शताब्दी से ही इंडोनेशिया द्वीपसमूह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र रहा है। बुनी अथवा मुनि सभ्यता इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता है। ४थी शताब्दी इस्सा पूर्व तक ये सभ्यता काफी उन्नति कर चुकी थी। ये हिंदू धर्म मानते थे और ऋषि परम्परा का अनुकरण करते थे। अगले दो हजार साल तक इंडोनेशिया एक हिन्दू और बौद्ध देशों का समूह रहा। यहां हिन्दू राजाओं का राज था| किर्तानेगारा और त्रिभुवना जैसे राजा यहां सदियों पहले यहां राज करते थे | श्रीविजय के दौरान चीन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध थे। स्थानीय शासकों ने धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रारुप को अपनाया और कालांतर में हिन्दू और बौद्ध राज्यों का उत्कर्ष हुआ। इंडोनेशिया एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है, जिसमे निजी क्षेत्र एवं सरकारी क्षेत्र दोनों की भूमिका है। इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्वी एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जी-२० अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आज के ही दिन इटली से एक लम्बी गुलामी के बाद इंडोनेशिया को 18 देशो ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता   दी लेकिन कालान्तर ये यहाँ तेजी से इस्लाम फैला और धीरे धीरे पूरे  देश में लगभग  88 प्रतिशत मुस्लिम  आबादी  गयी .

यहाँ के मुख्य शासकों के नाम निन्मलिखित है जिनके शासन की छाप आज भी इंडोनेशिया में दिखाई देती है .

1- श्री विजय राजवंश 

२- शैलेन्द्र राजवंश 

३- संजय राजवंश 

4- माताराम राजवंश 

5- केदिरि राजवंश 

६- सिंह श्री राजवंश 

7- मजापहित साम्राज्य 

इसमें अंतिम मजापहित साम्राज्य सबसे ज्यादा मजबूत और प्रभावी था जिसके पतन के बाद धीरे धीरे इंडोनेशिया विदेशी शक्तियों के हाथों में जाने लगा था .  इंडोनेशिया में इसका शासन सन १२९३-१५०० तक चला। इस हिन्दू शासक के साम्राज्य में देश बहुत महान बना और इसे स्वर्ण युग माना जाता है। हिन्दू शासक हयाम इसका सबसे शक्तिशाली और सफल सम्राट था। नीचे इस राजवंश की सूची देखिये और जानिये इंडोनेशिया के गौरवशाली अतीत को .

  • रादेन विजय,  (1294 – 1309)
  • कालगमेत  (1309 – 1328)
  • श्री गीतार्ज (1328 – 1350)
  • हयाम वुरुक ,  श्री राजसनगर (1350 – 1389)
  • विक्रमवर्धन (1389 – 1429)
  • सुहित  (1429 – 1447)
  • कीर्तिविजय (1447 – 1451)
  • राजसवर्धन  (1451 – 1453)
  • पूर्वविशेष गिरिवर्धन (1456 – 1466)
  • सिंहविक्रमवर्धन सुरप्रभाव (1466 – 1468 or 1478)
  • कीर्तिभूमि (1468 – 1478)
  • गिरीन्द्रवर्धन (1478 – 1498)

इंडोनेशिया के उपरोक्त इतिहास से आपको तमाम ऐसे तथ्य जानने को मिलेंगे जो आने वाले समय में कई अन्य स्थानों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणादायक भूमिका निभा सकते हैं . आज ही के दिन उसको एक अलग स्वतंत्र राज्य के रूप में आज़ादी मिली थी लेकिन तब तक उसका अमूलचूल परिवर्तन हो चुका था . म्यन्मार में बौद्धों के खिलाफ रोहिंग्या के समर्थन में सबसे ज्यादा आक्रामक बयान जारी करने वाला देश भी इंडोनेशिया था लेकिन उसके प्राचीन शासको में बौद्धों का एक लम्बा इतिहास रहा है. इंडोनेशिया के प्राचीन इतिहास को न बताने की कोई ठोस वजह नहीं बता पाते हैं ऐसे तमाम तथाकथित इतिहासकार जो गौ माता का मांस खाते हुए अपनी सेल्फी पोस्ट करना एक बड़े इतिहासकार का लक्षण मानते हैं . आज उसी इंडोनेशिया में हिन्दुओं का प्रतिशत मात्र 1.7 % प्रतिशत बचा है और बौद्धों का प्रतिशत मात्र .7 ही रह गया है जो एक बड़ा इशारा है इतिहास से भविष्य की परिकल्पना करने की क्षमता वालों के लिए .

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