3 अप्रैल – बलिदान दिवस क्षत्रपति शिवा जी महराज

आताताई औरंगज़ेब के अत्याचारों से त्रस्त हिंदुओं के अंदर हिन्दवी साम्राज्य की नींव डाल कर भारत वर्ष के गौरवमय इतिहास को भगवा स्याही से लिख सदा के लिए अमर हो गए महायोद्धा , परमवीर छत्रपति शिवाजी महाराज को आज उनके बलिदान दिवस पर सुदर्शन न्यूज की तरफ से अश्रुपूर्ति व् भावभीनी श्रधांजलि.

अफ़ज़ल खान की आंतें निकाल कर औरंगज़ेब को दक्कन में ही दफन करने वाले महाराज के गौरवमय इतिहास को जितना ही कुछ चाटुकार इतिहासकारों ने दबाने की कोशिश की जनता ने उन्हें उतना ही अपने ह्रदय में जगह दी . वैसे भी शौर्य और पराक्रम की सीमाएं कभी स्याही की धार से नही मापी जा सकती. भारत के गौरवमय इतिहास का जब कभी भी पुनर्लेखन होगा तो उसमे प्रथम पृष्ठ पर निश्चति रूप से छत्रपति शिवाजी महराज शुशोभित होंगे .

महराज की जीवनी का अंशमात्र भी लिखना किसी साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं . उस समय के महाकवि भूषण की शिवबावनी आज उनके बलिदान दिवस पर आप सब के पठन के लिए लिखी जा रही जिसमे उनके जीवन की झलक दिखती है .

साजि चतुरंग बीररंग में तुरंग चढ़ि।
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है॥
भूषन भनत नाद विहद नगारन के।
नदी नद मद गैबरन के रलत हैं॥
ऐल फैल खैल भैल खलक में गैल गैल,
गाजन की ठेल-पेल सैल उसलत है।
तारा सों तरनि घूरि धरा में लगत जिमि,
थारा पर पारा पारावार यों हलत है॥

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पीरा पयगम्बरा दिगम्बरा दिखाई देत,
सिद्ध की सिधाई गई, रही बात रब की।
कासी हूँ की कला गई मथुरा मसीत भई
शिवाजी न होतो तो सुनति होती सबकी॥
कुम्करण असुर अवतारी औरंगजेब,
कशी प्रयाग में दुहाई फेरी रब की।
तोड़ डाले देवी देव शहर मुहल्लों के,
लाखो मुसलमाँ किये माला तोड़ी सब की॥
भूषण भणत भाग्यो काशीपति विश्वनाथ
और कौन गिनती में भुई गीत भव की।
काशी कर्बला होती मथुरा मदीना होती
शिवाजी न होते तो सुन्नत होती सब की ॥

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बाने फहराने घहराने घण्टा गजन के,
नाहीं ठहराने राव राने देस देस के।
नग भहराने ग्रामनगर पराने सुनि,
बाजत निसाने सिवराज जू नरेस के ॥
हाथिन के हौदा उकसाने कुंभ कुंजर के,
भौन को भजाने अलि छूटे लट केस के।
दल के दरारे हुते कमठ करारे फूटे,
केरा के से पात बिगराने फन सेस के ॥
भारत वर्ष के इस अद्भुत और अद्वितीय योद्धा को उनके बलिदान दिवस पर एक बार पुनः नमन . 

 

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