31 मार्च- जन्म दिवस गुरु अंगद देव साहिब

वाहे गुरु जी दा खालसा,  वाहे गुरु जी दी फ़तेह.

वीरता और बलिदान का पर्याय सिख पन्थ के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव साहिब जी को आज अर्थात 31 मार्च को उनके पावन जन्म दिवस पर सभी धर्मनिष्ठ व् राष्ट्रप्रेमियों को ढेर सारी शुभ और मंगलमय कामनाओं के साथ गुरु अंगद साहिब को शत शत नमन , वन्दन और अभिनन्दन.

गुरु अंगद देव साहिब जी का जन्म 31 मार्च सन 1504 में पंजाब के मुक्तसर नामक स्थान पर हुआ था. गुरु अंगद साहिब ने गुरु नानक की पवित्र वाणी गुरुमुखी को जमा कर के उनका जनमानस की भलाई के लिये जगह जगह प्रचार और प्रसार आरम्भ किया. गीत लेखनी में पारंगत गुरु अंगद साहिब ने इस कल्याणकारी वाणी को लोगों तक गीतों के माध्यम से सरल रूप में पहुचाया . ध्यान रहे कि गुरुमुखी का अर्थ होता है गुरु के मुख से निकले शब्द और गुरुमुखी वही लिपि है जिसमें “गुरुग्रंथ साहिब” लिखी गई.

बिना जाति, धर्म पूछे हर भूखे को खाना खिलाने की सिख परंपरा लंगर गुरु अंगद साहिब जी के समय में विकसित हुई थी.  गुरु नानक का सानिध्य पा कर गुरु अंगद देव जी के जीवन में बेहद परिवर्तन हुआ और होने सिख पन्थ को अपना कर गुरुमुखी की रचना करते हुए गुरु नानक देव जी की जीवनी लिख डाली . गुरु अंगद देव जी को गुरु नानक जी ने 7 परीक्षाएं ली जिन सब में गुरु जी सफल रहे और इसी से प्रभावित हो कर गुरु नानक जी ने इन्हें दूसरे नानक की उपाधि दे दी. आज भी गुरु अंगद देव जी के जीवन से प्रेरणा ले कर आम जनमानस सत्य, न्याय और धर्म पथ पर चल कर स्वयं को धन्य कर सकता है. 

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