स्पार्टा की 300 वाली जंग को यूरोप ने दुनिया भर में प्रचारित किया, पर उस से भी भयानक 300 की जंग लड़ी गयी थी भारत मे, जिसे मिटा दिया बिके कलमकारों ने

 कुछ साल पहले 1 हॉलीवुड फिल्म आई थी द- 300 ,ये फिल्म आधारित थी ग्रीक और पर्शिया के युध पर ,पर्शिया के राजा ने एक विशाल सेना के साथ ग्रीक पर हमला किया ज्यादातर ग्रीक राजाओं ने बिना युध के हार मान ली,परंतु स्पार्टा ने सिर् झुकाने से मना कर दिया ,स्पार्टा के पास सिर्फ 300 सैनिक थे परंतु उन्होने पर्शिया के सेनाओं से जमकर मुकाबला किया .क्यूंकि ये युरोप की घटना थी इसलिये इसे इतिहास में बड़ा स्थान मिला…,ऐसा ही एक युध भारत में भी हुआ था ,

The 300- (पावन खींद का युध )–भारत की भूमि मे अगर सबसे दूरदर्शी ,साहसी और महान व्यक्ति की गणना की जायेगी तो शिवा जी महराज का नाम सबसे अग्रणी होगा भारतीय इतिहास में बहुत कम लोगों के पास शिवाजी जैसा साहस,दूरदर्शिता और त्याग की क्षमता थी . ,हालांकि की शिवाजी के पिता आदिलशाही में 2000 सिपाहियों वाले छोटे सरदार थे परंतु शिवाजी ने साधारण मराठा युवकों को अजेय योधा बनकर महान मराठा साम्राज्या की स्थापना की .
शिवजी की बढ़ती ताकत को रोकने के लिये आदिलशाही ने बहुत प्रयत्न किये परंतु हर बार उन्हे असफलता ही हाथ लगी ,अफ़ज़ल ख़ान और रुस्तमे जमा के मारे जाने के बाद आदिलशाही ने एक बड़ी सेना सिद्दी जुहार के नेत्रत्वा में भेजी जिसने पन्हाल क़िले के चारों ओर घेरा डाल दिया. हालांकि 4 महीने की घेरा बंदी के बाद भी दोनो पक्षों को कोई सफलता हाथ नही लगी परंतु क़िले में खत्म हो रहे राशन की वजह से शिवाजी ने विशालगड के दुर्ग मे जाने का निश्चय किया ,आदिलशाही सेना को धोके में रखने के लिये .शिवाजी जैसे कद काठी वाले नाई को एक छोटि टुकड़ी के साथ बाहर भेजा गया और शिवाजी दूसरे रास्ते से 500 सैनिकों के साथ विशालगड की ओर निकल गये. ,
परंतु शीघ्र ही आदिल शाही सेना को इस बात का पता लग गया और उसने शिवाजी का पीछा किया ,आदिलशाही सेना को करीब आते देख मराठा सरदार बाजीप्रभु देशपाण्डे ने 300 सैनकों के साथ पावन खींद के पास इस्लामी सेना को रोकने का निश्चय किया इस ऐतिहासिक युध में 300 मराठा वीरों ने 10,000 आदिलशाही इस्लामिक सेना को मौत के घाट उतारा और जब तक शिवाजी सुरक्षित विशालगड क़िले में पहुंच नही गये आदिलशाही सेना को एक इंच भी आगे बढ़ने नही दिया ,मराठा सैनिको ने शरीर पर अनेकों घाव और लगातार खून बहते रहने पर भी तलवार नही छोड़ी ,सिर्फ 300 सैनिकों के हाथों करीब करीब आधी सेना गवाने के बाद आदिलशाही इस्लामिक सेना की आगे बढ़ने और युध करने की हिम्मत नही हुई ।
इस युध का भारतीय इतिहास की किताबों में ज्यादा जिक्र नही है क्यूंकि झोलाछाप इतिहासकारों के खुद के नियमो के अनुसार ये उनकी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के स्वघोषित मूल्यों के खिलाफ है।


 

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