डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के 126वें जन्मदिवस के अवसर पर सुदर्शन न्यूज करता है शत्-शत् नमन्

भारत के इतिहास में 14 अप्रैल हमेशा गर्व के साथ आता है क्योंकि इसी दिन सन् 1891 में भारत के विधिवेत्ता, एक महान अर्थशास्त्री, एक महान राजनीतिज्ञ और एक समाजसुधारक डा. भीम राव अंबेडंकर का जन्म हुआ था। डा. साहब हमेशा भारत के गौरव रहेंगे। उनका योगदान भारत के कण कण में है। सुदर्शन न्यूज के परिवार की और से डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी को उनके 126 जन्म दिवस की हार्दिक बधाई। 
भारत को संविधान देने वाले डा. भीम राव अंबेडंकर का जन्म मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। डा. भीमराव का जन्म पिता रामजी मालाजी सकपाल व माता भीमाबाई के यहां उनकी चौदहवीं संतान के रूप में महार जाति में हुआ था, जिसे लोग अछूता और निचले वर्ग का मानते थे। बचपन से ही भीमराव अंबेडकर के साथ सामाजिक रूप से भेदभाव हुआ करता था। बता दें भीमराव अंबंडकर का बचपन का नाम रामजी सकपाल था। भीमराव के पिता ब्रिटिश भारतीय सेना में थे। बचपन में ही वे अपनी मां के प्रेम से वंछित हो गए। भीमराव अंबंडकर ने जो देश के लिए किया वो दूनिया के अंत तक याद किया जाएगा। 
भीमराव अंबंडकर अपने विवादास्पद विचारों और गांधी व कांग्रेस की कटु आलोचना के बावजूद उनकी प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी जिसके कारण जब, 15 अगस्त, 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने अंबेडकर को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। 29 अगस्त 1947 को अंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।
14 अक्टूबर, 1956 को नागपुर में अंबेडकर ने खुद और उनके समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया। अंबेडकर ने एक बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके से तीन रत्न ग्रहण और पंचशील को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण किया। 1948 से अंबेडकर मधुमेह से पीड़ित थे। जून से अक्टूबर 1954 तक वो बहुत बीमार रहे। इस दौरान वो नैदानिक अवसाद और कमजोर होती दृष्टि से ग्रस्त थे। 6 दिसंबर 1956 को अंबेडकर जी की मृत्यु हो गई।
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