26 मार्च- भारतीय फ़ौज के पराक्रम से आज ही बंगलादेश अलग हुआ पाकिस्तान से.. वो बंगलादेश जहाँ हो रहा हिंदुओं का नरसंहार

अपना पुराना समय और अपने पुराने साथी को भूल जाना ही साफ शब्दों में एहसान फरामोशी कहा जाता है .जिस भारत ने उन्हें अपना लहू बहा कर आज़ादी दिलाई उन अंतहीन अत्याचारों से वो समय बदलते ही वही अत्याचार उन पर करने लगे जो उनके मुक्तिदाता थे.. वो पाकिस्तान का कुछ नही बिगाड़ पाए लेकिन उन्होंने मुक्ति पाते ही शुरू कर दिया हिंदुओं का नरसंहार..यहां बात चल रही इस्लामिक मुल्क बंगलादेश की जो पाकिस्तान से अलग हो कर केवल भारतीय सेना के दम पर बना था एक आज़ाद मुल्क ..

भारत और पाकिस्तान के विभाजन जैसा झटका ही एक बार पूर्वी पाकिस्तान के अलग होने पर पाकिस्तान को भी लगा था। साल 1970 तक आते-आते पाकिस्तान के दोनों धड़ों में इतना विवाद हो चुका था कि पूर्वी पाकिस्तान ने पश्चिमी पाकिस्तान से अलग होने का फैसला कर लिया। पश्चिमी पाकिस्तान की क्रूरता और हिंसा के बावजूद उसका विभाजन हो गया। सवाल ये उठता है कि आखिर वो क्या वजह रही जिसके चलते पाकिस्तान की राजधानी ढाका ना होकर कराची को बनाया गया।

समस्या 1947 में पाकिस्तान के बनने के साथ ही शुरू हो गई थी। पाकिस्तान के भारत से अलग होने के फौरन बाद पूर्वी पाकिस्तान ने दावा किया कि उनकी बड़ी आबादी (55 फीसद) है, जबकि पश्चिमी पाकिस्तान की सिर्फ 45 फीसद थी। इसलिए, लोकतांत्रिक रूप से पाकिस्तान की संघीय राजधानी कराची ना होकर ढाका होना चाहिए।
 इस तथ्य को नजरंदाज किया गया और कराची चूंकि सरकार में शामिल लोगों, मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों के रहने की जगह थी, लिहाजा उसका राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों पर असर हुआ। जिसके चलते उसे काफी फायदा हुआ और उसे राजधानी बना दी गई। पूर्वी पाकिस्तान के लोग इस तरह की सुविधाओं से वंचित रह गए क्योंकि वे लोग राजधानी से हजारों मील दूर थे। हालांकि, शुरुआत में भारत से वहां गए लोगों को राजधानी कराची ने अपनी ओर आकर्षित किया।
दरअसल, पाकिस्तान के दोनों हिस्सों की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद अलग थीं। एक दूसरे की सामान्य सीमा के हजारों मील दूर होना, उसका भारतीय क्षेत्र और उसके प्रभाव से घिरा होना, ये दोनों अंगों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर संघर्ष की बड़ी वजह बनी।
पाकिस्तान के दोनों अंगों के बीच बनी गंभीर स्थिति के बाद उसके दो टुकड़े हो गए। पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान के अलग होने का परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख में गिरावट आई और इसके शक्तिशाली सैन्य ताकत को तगड़ा झटका लगा।
1955 में पाकिस्तान सरकार ने पूर्वी बंगाल का नाम बदलकर पूर्वी पाकिस्तान कर दिया। पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान की उपेक्षा और दमन की शुरुआत यहीं से हो गई और तनाव का सत्तर का दशक आते-आते अपने चरम पर पहुंच गया। पाकिस्तानी शासक याहया खां की ओर से लोकप्रिय अवामी लीग और उनके नेताओं को प्रताड़ित किया जाने लगा, जिसके फलस्वरुप बंगबंधु शेख मुजीवु्र्रहमान की अगुआई में बांग्लादेशा का स्वाधीनता आंदोलन शुरु हुआ।
बांग्लादेश में खून की नदियां बही, लाखों बंगाली मारे गए तथा 1971 के खूनी संघर्ष में दस लाख से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थी को पड़ोसी देश भारत में शरण लेनी पड़ी। भारत इस समस्या से जूझने में उस समय काफी परेशानियों का सामना कर रहा था और भारत को बांग्लादेशियों के अनुरोध पर इस सम्स्या में हस्तक्षेप करना पड़ा जिसके फलस्वरुप 1971 का भारत पाकिस्तान युद्ध शुरु हुआ। १९७१ में पूर्वी पाकिस्तान में लाखों महिलाओं के साथ बलात्कार, अत्याचार किया गया और हत्या की गईं। एक अनुमान के मुताबिक ऐसी करीब चार लाख महिलाओं के साथ ऐसी ज्यादतियां की गईं जिनमे उनके साथ बलात् यौन संबंधों को बनाना, सैनिक कैण्ट मे महिलाओं को सेक्स वर्कर के रूप मे रखना आदि एवं सामूहिक बलात्कार जैसी हरकतें थीं। ५६३ बंगाली महिलाओं को कैंट इलाके में कर रखा था कैदलड़ाई के पहले ही दिन से ५६३ बंगाली महिलाओं को ढाका के डिंगी मिलिट्री कैंट में कैद कर दिया गया था। इन महिलाओं के साथ पाकिस्तानी सेना के जवान ज्यादतियां करते थे। 
बांग्लादेश में मुक्ति वाहिनी सेना का गठन हुआ जिसके ज्यादातर सदस्य बांग्लादेश का बौद्धिक वर्ग और छात्र समुदाय था, इन्होंने भारतीय सेना की मदद गुप्तचर सूचनायें देकर तथा गुरिल्ला युद्ध पद्धति से की। पाकिस्तानी सेना आखिरकार 16 सितंबर दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इसमें करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिक युद्ध बंदी बनाए गए जिन्हें भारत में विभिन्न कैम्पों में रखा गया ताकि वे बांग्लादेशकी जनता के क्रोध के शिकार न बनें। ये वही पाकिस्तान है जो बाद में भारत के फौजियों के सर से फुटबाल बना कर खेला था..फिलहाल बांग्लादेश एक आज़ाद मुल्क बना और मुजीबुर्रहमान इसके प्रथम प्रधानमंत्री बने..
लेकिन उसके बाद बांग्लादेश फंसता चला गया मज़हबी उन्मादियों के जाल में जिसमे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ हिंदुओं का और पूरी सोची समझी साजिश से भारत मे शरणार्थी बन कर बंगाल और आसाम आदि जिले में घुसे बंगलादेशियो ने शुरू कर दिया कत्लेआम और नरसंहार . असम और बंगाल के कुछ ऐसे इलाके भी सामने आए जो उनके अत्याचारों से पलायन तक कर गए …

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