जिहादी कट्टरता की हद देखिये… अयोध्या में श्रीराम मंदिर के खिलाफ ईराक से जारी हुआ फतवा…

देश में मजहबी कट्टरता किस कदर बढ़ रही है इसकी बानगी एक बार पुनः देखने को मिली है जब अयोध्या में श्रीराम मंदिर के खिलाफ मजहबी कट्टरपंथी ईराक पहुंच गये तथा ईराक से श्रीराम मंदिर के खिलाफ फतवा जारी करवाया. एकतरफ जहाँ राममंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं लेकिन मजहबी कट्टरपंथी ईराक से फतवा जारी करा रहे हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर नहीं बन सकता. बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैय्यद वसीम रिजवी अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने का समर्थन कर रहे हैं, जिसके खिलाफ शियाओं के सर्वोच्च धर्मगुरु ईराक के अयातुल्ला अल सैयद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी ने फतवा जारी करते हुए वसीम रिजवी से कहा कि वह राम मंदिर के लिए वक्फ की जमीन नहीं दे सकते.

आपको बता दें कि कानपुर के शिक्षाविद् डॉ मजहर अब्बास ने ईमेल के जरिए सिस्तानी से फतवा मांगा था. इसके जवाब में सिस्तानी ने कहा कि कोई भी मुसलमान वक्फ की संपत्ति को मंदिर या अन्य किसी भी प्रकार के धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए नहीं दे सकता. बता दें, वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज भूमि देने का प्रस्ताव दिया है. रिजवी का दावा है कि बाबरी मस्जिद शिया शासक द्वारा बनवाई गई थी और यह वक्फ की संपत्ति है, जिसे वह राम मंदिर के लिए दान देना चाहते हैं. फतवे पर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “शिया वक्फ बोर्ड पर बाबरी केस के मुद्दई का समर्थन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर से दबाव डाला जा रहा है. सिस्तानी का फतवा इसी कड़ी का एक हिस्सा है.

वसीम रिजवी ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड भारतीय संविदान में दर्ज कानून के तहत ही काम करेगा, न कि किसी आतंकी या फतवा के दबाव में. हम सिस्तानी द्वारा जारी फतवा को नहीं स्वीकार कर सकते, क्योंकि यह उन्हें गुमराह करके लिया गया है.” उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है और शिया वक्फ बोर्ड देश और समाज के विकास को लेकर संजीदा है. हिन्दुओं को उनका हक मिलना चाहिए और मुस्लिमों को दूसरों के हक छिनने से दूर रहना चाहिए. शिया वक्फ बोर्ड अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगा, चाहे फिर दुनिया के सभी मुसलमान हमारे विरोध में क्यों न खड़े हो जाएं.

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