जहां खून बहा रहा इस्लामिक हुकूमत कायम रखने के लिए, वहां मिले प्रभु श्रीराम


इस खबर के सामने आने के बाद शायद उन लोगों की जुबान बंद हो जाए तो सनातन के आराध्य तथा हिंदुस्तान की पहिचान प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताते हैं, उनके अस्तित्व को नकारने का छद्म प्रयास करते हैं. मामला भारत से हजारों किलोमीटर दूर इस्लामिक मुल्क ईराक का है जिसने ये प्रमाण दिया है कि सनातन के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और उनके भक्त महाबली हनुमान जी की कथा न सिर्फ सत्य है बल्कि वह पूरी दुनिया में उनके अमिट निशान भी  हैं.

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खबर के मुताबिक़, इस्लामिक ईराक के सिलेमानिया इलाके में मौजूद बैनुला बाईपास के पास खुदाई में भगवान राम और हनुमान जी की दुर्लभ प्रतिमाएं पायीं गयी हैं. इन प्रतिमाओं के पाए जाने की पुष्टि खुद ईराक सरकार ने भारत द्वारा इस मामले पर मांगी गयी जानकारी के जवाब में पत्र लिखकर दी है. इतना ही नहीं ईराक सरकार के पुरातत्व विभाग का दावा है कि ये प्रतिमाएं करीब 6 हजार साल पुरानी हैं. प्रतिमाओं के मिलने के बाद भारत सरकार ने भी इन प्रतिमाओं से जुड़ी और जानकारी प्राप्त करने की इच्छा जाहिर की है.

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जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग ने भी खासतौर पर अयोध्या शोध संस्थान ने इन प्रतिमाओं पर शोध करने की जरुरत बतायी है. ये भी जानकारी मिली है कि ईराक ने इस विषय के महत्व को समझते हुए भारत के शोधकर्ताओं संस्कृति विभाग और अयोध्या शोध संस्थान को को इस विषय पर शोध करने के लिए ईराक आमंत्रित किया है और इस संबंध में पत्र भी लिखा है. उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही शोधकार्ताओं का दल ईराक पहुंचा कर भगवान राम से जुड़े और तथ्य तलाश करेंगे.

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इस खबर की जानकारी जब अयोध्या पहुंची तो वहां के साधू-संतों में खुशी की लहर दौड़ गयी. अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने कहा कि ‘इसमें कोई चौकने वाली बात नहीं है कि ईराक में भगवान राम की प्रतिमा मिली है, ईराक ही नहीं और देशों में भी भगवान श्रीराम के अस्तित्व के प्रमाण मिलेंगे. जगदगुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि ‘ये जानकारी प्रसन्नता देने वाली है. ये उन लोगों के गाल पर तमाचा है जो भगवान राम को काल्पनिक बताते चले आये और उनके अस्तित्व पर सवाल उठाते आये हैं, भारत सरकार को इस पर शोध कराना चाहिए’.

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