2 मई – 1908 में आज ही राष्ट्र ने झेली थी कुछ जयचंदों की गद्दारी वरना राष्ट्र पहले ही हो गया होता स्वतन्त्र


आजादी के दीवाने जिन्हें हम विस्मृत कर चुके हैं जिनके बलिदानो के परिणाम स्वरूप आज हम आजादी के हवा में साँसे ले रहें है ।ऐसे अनेको क्रांतिकारियों को जिन्हें हम जानते तक नही या हम उन्हें भूलते जा रहे है उनके कुर्बानियों के फलस्वरूप आज हम आज़ादी के फल चख रहे है । लेकिन सिर्फ चन्द्रशेखर आज़ाद और मंगल पांडेय जैसे ही क्रांतिकारी ही नही हुए थे गद्दारी का शिकार अपितु और भी ऐसे जयचंद रहे हैं जिन्होंने राष्ट्र को दिए हैं घाव.. अफसोस चरखे और एक ही परिवार के चरणों मे लोटते कुछ नकली कलमकार और चाटुकार इतिहासकार न क्रांतिकारियों के इतिहास को बता कर राष्ट्र को गौरवान्वित कर पाए और न ही गद्दारो के बारे में बता कर देश को सतर्क कर पाए ..

सलमान को सब डॉक्टर साहब कहते थे और मानते थे नेक इंसान.. लेकिन वो तो घुस गया घर में और निकला कुछ और ही

आज़ादी पहले ही मिल चुकी होती अगर आज न हुई होती गद्दारी ..अंग्रेजो के ही चाटुकार क्रांतिवीरों के गुट में शामिल हो कर उन्हें पहुचाते थे वो सारी सूचनाएं जो क्रांतिकारी वर्षो की मेहनत से बना पाते थे ..आज ही के दिन अर्थात 2 मई 1908 को कलकत्ते में क्रांतिकारियों की एक केंद्रीय गुप्त – समिति थी ।जिसके प्रमुख्य सदस्य थे सर्वश्री वारीन्द्र कुमार घोष , उपेन्द्रनाथ बंधोपाध्याय, उलास्कर दत्त , सत्येंद्र बोस , हेमचन्द्र दास और कन्हाईलाल दत्त । पेरिस से बम बनाना सीखकर आये हेमचन्द्र और उल्लासकर दत्त के घर रसायनशाला थी ।जिसमे वे लोग बम बनाया करते थे ।खुदीराम और प्रफुल चाकी को इसी समिति ने मुजफ्फरपुर भेजा था किंगफोर्ड को मारने के लिए ।*
गद्दारो की गद्दारी के चलते ब्रिटिश पुलिस को उस गुप्त समिति क पता चल गया था । सी . आई. डी. वाले मानिकतल्ला में ही एक मकान किराए पर लेकर रहने लगे और क्रान्तिकारियो के गतिबिधियो पर नजर रखने लगे ।2 मई 1908 को मानिकतल्ले के बगीचे में वारीन्द्र घोष ने एक गुप्त बैठक बुलाई । बैठक जैसे ही शुरू हुई अचानक पुलिस दल द्वारा वे लोग घेर लिए गए अधिकांश पकड़े गये कुछ भाग गये ।
 सबसे दुखद बात ये है कि सी आई डी के साथ इन क्रांतिवीरों को पकड़ने वाले ज्यादातर हिंदुस्तानी सिपाही थे जो मात्र वेतन और मेडल के लालच में अपनी ही भारत माँ को कस रहे थे बेड़ियों में ..
मकान में क्रांतिकारियों को सी.ई.डी. वाले आते जाते देखते थे उस मकान की तलाशी ली गई तो उस मकान में भारी मात्रा में बम , बन्दूक , पिस्तौल आदि बरामद हुई । अड़तीस व्यक्तियो पर अलीपुर षड्यन्त्र केस के नाम से मुकदमा चला ।यह बम केस का पहला मुकदमा था..अरविंद घोस को भी इस केस में गिरफ्तार किया गया पर मुकदमे की अवधि तक जेल में रहने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया । वे वारीन्द्र कुमार घोष के बड़े भाई थे ..
 क्रांतिकारी समूह की मीटिंग का गुप्त एजेंडा मुख्यरूप से निम्नलिखित था-
( 1 ) गुप्त संघटन बनाकर क्रांतिकारी प्रचार करना जिसका प्रधान लक्ष्य देश में सशस्त्र क्रान्ति तैयारी ।
 ( 2 ) देशव्यापी प्रचार जिसे समस्त राष्ट्र स्वतन्त्रता के आदर्श की ओर आकृष्ट हो जाये ।
 ( 3 ) जनता को संगठित कर विदेशी शासन एवं समान का वहिष्कार करना है ।
जयचंदों की गद्दारी से पल भर में ध्वस्त हो गए इस ढांचे के लिए बहुत मेहनत की थी क्रांतिकारियों ने .. इसी सिलसिले में वारीन्द्र घोष ने पटना में आकर एक चाय की दूकान खोली । चाय के दूकान पर क्रांतिकारियों का आना जाना शुरू हो गया ।चाय की दूकान पर सी. आई. डी. वालो को भनक लग गई । खतरा मंडराते देख वारिन्द अचानक चाय की दूकान बन्द कर अपने भाई के पास बड़ौदा चले गये । आज ही के दिन अर्थात श्री वारिन्द्र 2 मई 1908 को मानिकतल्ले के वगीचे में क्रांतिकारियों के साथ बैठक करते हुए पकड़े गए ।उन्हें अलीपुर के जेल में बन्द कर दिया गया । उनके अन्य साथी भी इसी जेल में बन्द थे ।उन्होंने जेल से भागने की योजना बनाई । गुप्त रूप से पिस्तौल प्राप्त कर ली । आज़ादी के उस महान प्रयास के भागीरथ प्रयास के सभी क्रांतिवीरों को उनके शौर्य के साथ नमन करते हुए आज उनके प्रयासों को बारंबार नमन जो इसी देश के कुछ गद्दारो की गद्दारी के चलते विफल रहा ..साथ ही इतिहास को कलंकित करने वाले नकली कलमकारों का फैसला जनता करे ..

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