24 दिसंबर – 1999 में आज ही हुआ था विमान IC- 814 का अपहरण..ये एक गंभीर दुष्परिणाम था नरपिशाच आतंकियों को लंबे समय तक जेल में रखने का

वो सारे यात्री बेहद शांत व सज्जन स्वभाव के थे, उनकी संख्या लगभग 178 के आस पास की थी जिसमें अधिकतर हिन्दू समाज के सेकुलर लोग थे जो क्रिसमस और आ रहे नए साल के साथ साथ कार्यालयों की शीतकालीन छुट्टियां बिताने , घूमने टहलने व मौज मस्ती करने आदि नेपाल गए हुए थे.. उन्हें पक्का ये यकीन था कि जैसे वो लोग भाई चारे, सौहार्द, प्रेम , धर्मनिरपेक्ष छवि के हैं वैसे ही दुनिया में बाकी लोग भी होंगे..लेकिन उनका सोचना गलत था, बहुत ही गलत क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी थे जिनका इस सोच, विचारधारा या मानसिकता से दूर दूर का कोई संबन्ध था ही नहीं, उनके मुंह लग चुका था इंसानों का खून..

तथाकथित बुद्धिजीवियों, स्वघोषित कानूनविदों व कथित मानवाधिकार वालों की लंबी पैरवी के चलते भारत के कई जवानों के प्राण देने के बाद 3 दुर्दांत आतंकी गिरफ्तार हुए थे.. अगर उन्हें उस समय मुठभेड़ में मारा भी गया होता तो उत्तर प्रदेश पुलिस की तरह सैनिको को हर गोली का जवाब देना पड़ता.. वो पूरी तरह से सुरक्षित जेलों में बंद थे जहां उन्होंने समुचित पेट भर कर भोजन और जीवन की बाकी अन्य सुख सुविधाएं दी जा रहीं थी..उनकी बाकयदा पैरवी भी चल रही थी पर देश के कुछ लोगों द्वारा बनाये गए धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत ये सब स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा था.. अब अचानक आज ही के दिन जो कुछ हुआ उस से इतना तो तय था कि नमकहराम आतंकियों ने भारत द्वारा खिलाये गए खाने में पड़े नमक को भी हराम कर डाला ..

24 दिसंबर 1999 वहीं काला दिन है जिस रोज 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज आईसी-814 को हाइजैक कर लिया। हरकत-उल- मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया। उनका इरादा था- ‘यात्री लो, साथी दो’। जिसकते बाद भारत सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए तीनों आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया।     दुबई में छोड़े गए थे कुछ यात्री उड़ाने भरने के बाद प्लेन के भारतीय क्षेत्र में दाखिल होते ही विमान को अगवा कर लिया गया था। पहले विमान को अमृतसर, लाहौर और दुबई के रास्ते अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट ले जाया गया। दुबई में विमान में सवार कुछ यात्रियों को छोड़ दिया गया और गंभीर रूप से जख्मी 25 वर्षीय भारतीय पुरुष रूपिन कात्यल की लाश को बाहर फेंक दिया गया।  छोड़े गए 3 आतंकी सरकार ने मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को रिहा कर दिया। छोड़े गए आतंकवादी सरहद पार बैठकर आज भी दहशतगर्दी के कारोबार को चला रहे हैं। रिहा आतंकी मौलाना मसूद अजहर ने साल 2000 में  खतरनाक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया।

इस खतरनाक आतंकी कार्रवाई को मौलाना मसूद अजहर के भाई शाहिद अख्तर सईद और उसके चार साथियों ने अंजाम दिया था। यात्रियों की रिहाई के बदले खतरनाक आतंकवादी जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को रिहा करना पड़ा। छोड़े गए सभी आतंकवादी सरहद पार बैठ कर आज भी दहशतगर्दी को अंजाम दे रहे हैं।  IC 814 ने जब उड़ान भरी तो उसमें 178 यात्री सवार थे।काठमांडू से दिल्ली की वो उड़ान कैप्टन देवी शरण के लिए एक रुटीन फ्लाइट थी। लेकिन उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही जहाज पर सवार हर इंसान की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई..बाद में रूपिन को अपने प्राणों का बलिदान भी देेना पडा.. लेकिन उस जहाज़ में सवार किसी के परिजन नेे ये कभी नही कहा कि उन्हें कहीं या किसी से डर लग रहा.. वो अपनो को गंवा कर मौत को सामने देख कर भी खुश हैं अपने देश की मिट्टी में, क्योकी उन्होंंने हिन्दुओ के पवित्र ग्रन्थ पढ़े हैं जिस में लिखा है कि – जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी.. अर्थात जन्म देने वाली भूमि स्वर्ग से भी सुुंदर होती है.. सवाल ये है कि आज के दिन से क्या सीखेगे भारत के वो राजनेता जो वोटबैंक के नाम पर किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं ? और आखिरकार आतँकीयो की मदद से खुश होने वाला ये वोटबैंक किसका है ?

 

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