25 नवम्बर – राष्ट्रसेवा हेतु समर्पित NCC ( राष्ट्रीय कैडेट कोर ) दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. कभी एक बड़े राजनेता बता भी नहीं पाए थे NCC के बारे में, जबकि प्रधानमंत्री मोदी खुद रह चुके हैं NCC कैडेट

अभी ज्यादा समय नही बीता होगा जब भरी सभा मे एक युवा ने देश के एक बड़े नेता व सबसे ज्यादा समय सत्ता में रही पार्टी के अगुआ से एक सवाल किया था जो राष्ट्रीय कैडेट कोर NCC से जुड़ा हुआ था, लेकिन उस पर भारत के उस बड़े राजनेता का जवाब आया था कि वो NCC के बारे में जानते ही नहीं हैं इसलिए वो उस पर बोलेंगे ही नहीं. , यद्द्पि कुछ लोगो के लिए वो विषय मात्र एक चर्चा का रहा लेकिन असल मे वो एक बेहद पीड़ा का विषय था कि देश के सेवको के उस समूह से नेता जी परिचित ही नहीं थे जो राष्ट्र के रक्षको के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलता है .. खास कर वो नेता जी जो चीन व पाकिस्तान से युद्ध या तनाव पर सैन्य संरचना या सैन्य तैयारी पर सवाल उठाते हैं ..आज उसी NCC का दिवस है जो देशभक्तों द्वारा उल्लास से मनाया जा रहा है ..

सैनिक बनने का प्रथम चरण माना है सकने वाले राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) को सबसे पहले जर्मनी में 1866 में शुरू किया गया था। भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर की स्थापना 16 अप्रैल, 1948 में की गई थी। इसकी तारें यूनिवर्सिटी कोर से जुड़ी हैं जिसे इंडियन डिफ़ेंस एक्ट 1917 के तहत बनाया गया था NCC को सैनिकों की कमी से निपटने के उद्देश्य से बनाया गया था। साल 1920 में जब इंडियन टेरिटोरियल एक्ट पारित किया गया है, तो यूनिवर्सिटी कोर की जगह यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कोर (UTC) ने ले ली। उद्देश्य था कि UTC का दर्ज़ा बढ़ा दिया जाए और इसे युवाओं के लिए और आकर्षित बनाया जाए।

एकता और अनुशासन’ कोर का आदर्श वाक्य है। देश के युवाओं को संवारने में लगे हुए सेना,  नौसेना और वायु सेना का एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है।कर्नल गोपाल गुरुनाथ बेवूर को 31 मार्च 1948 को राष्ट्रीय कैडेट कोर का पहला निदेशक बनाया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसके वर्तमान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल बी. एस. सहरावत हैं।NCC के झंडे में तीन रंग होते हैं जो तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते हैं। लाल आर्मी के लिए, गहरा नीला नेवी के लिए और हल्का नीला वायुसेना के लिए।भारत में राष्ट्रीय कैडेट कोर के माध्यम से उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों और पूरे भारत में विश्वविद्यालयों के कैडेटों को छोटे हथियारों और परेड में बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करता है।

वर्ष 1948 में केवल बीस हजार कैडेट्स के साथ शुरू हुई NCC के आज पूरे देश में तकरीबन 13 लाख कैडेट्स हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी NCC कैडेट्स रह चुके हैं।हृदय नाथ कुंजरू की अगुवाई वाली समिति ने सिफ़ारिश दी कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों और कॉलेजों में कैडेट संगठन तैयार किया जाए। इसके बाद गर्वनर जनरल ने नेशनल कैडेट कोर एक्ट को स्वीकार किया और 15 जुलाई, 1948 को ये वजूद में आ गया। साल 1948 में इसका गर्ल्स डिविज़न बनाया गया ताकि स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को बराबरी का मौक़ा दिया जा सके। साल 1950 में एयर विंग बना और 1952 में नेवल विंग। साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद साल 1963 में NCC ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाया गया लेकिन 1968 में एक बार फिर इसे वॉलंटिअरी बना दिया गया। NDA और IMA की ही तरह लड़कियों को भी NCC ज्वाइन करने की स्वतंत्रता है और उन्हें भी लड़कों की ही तरह ट्रेनिंग दी जाती है। महिलाओं के लिए अलग रेजिमेंट है जिसे होल टाइम लेडी ऑफिसर कहा जाता है। करीब 100 से भी ज्यादा महिलाएं भारतीय सेना में अधिकारी हैं।

उत्तर प्रदेश का ‘एन.सी.सी. निदेशालय’ देश के सबसे बड़े निदेशालयों में से एक है। यहां करीब 1.19 लाख कैडेट राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। कई कैडेट्स ने निशानेबाजी और घुड़सवारी में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अनेक सम्‍मान अर्जित किये हैं। एनसीसी समाज कल्‍याण के कार्यों में भी आगे रहा है। पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर करीब साढ़े नौ लाख NCC कैडेट्स ने लेह, कन्याकुमारी और अंडमान निकोबार द्वीप समूह सहित 1805 केन्द्रों पर योग किया था। आज 25 नवम्बर को राष्ट्र के उन तमाम सेवकों को NCC दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आपदा व युद्ध काल मे उनके कार्यों को सादर सैल्यूट करता है ..

 

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