2 जनवरी – लंबी गुलामी के बाद स्वतंत्र हुए स्पेन में आज ही हुआ था “अंतिम मुसलमान के ईसाई बन जाने या देश छोड़ देने का आदेश”

वो तमाम ज़ुल्म, तमाम अत्याचार जो कभी भारत वालों ने सहा था , ठीक वही जुल्म और वही अत्याचार स्पेन ने भी झेला था, लगभग उतने ही समय.. उस जुल्म व अत्याचार के बाद जब उनका प्रतिकार मत और मज़हबी आधार पर स्पेन में करने के लिए एक ईसाई शासक निकला तो वहां की पीड़ित और प्रताड़ित जनता ही एक सेना के रूप में उसके साथ खड़ी हो गयी और आखिरकार मुस्लिम शासकों को वहां से बोरिया बिस्तर बांध कर भागना पड़ा था .  इतना ही नही, स्पेन के लोगों व शासकों ने दुबारा वो गुलामी न झेलनी पड़ जाए उसके लिए पुख्ता काम कर दिए और एक ऐसा फ़रमान जारी किया जिसके बाद वहां उस देश में मुस्लिमों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो गए थे और स्पेन शुद्ध ईसाई देश बन गया..

अगर आप आज स्पेन में आतंकी हमले की घटना सुनें या कुछ आतंकी वहां हमले की साजिश रचते पकड़े जाएं तो उसका संबन्ध इतिहास में स्पेन के आज जारी हुए आदेश से भी हो सकता है जिसका बदला लेने के लिए कुछ चरमपंथी स्पेन को अब तक अपना शत्रु मानते हैं ..जानिए पूरा विवरण कि किस प्रकार से स्पेन पीड़ित था और उसने कैसे अपनी पीड़ा को आक्रोश में बदला जो उसके आज तक एक शांत व आतंकवाद से मुक्त मुल्क की पहिचान बनी हुई है ..समझिए उस जनता को भी जिसने अपने विद्रोही राजा का कैसे साथ दिया और कैसे उस शासक ने आखिरकार छोटी छोटी जमीनें जीत कर अंत मे पूरे स्पेन को एक ईसाई राज्य बना डाला जिसने खुद पर अत्याचार करने वालों की मौजूदगी को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया , और उसकी जनता ने उसके हर कदम पर उसका पूरा साथ दिया ..

आज ही के दिन अर्थात दो जनवरी 1492 को स्पेन में अंतिम मुसलमान शासकों के ग्रेनाडा साम्राज्य का अंत हुआ और पूरे देश में ईसाई शासकों का राज्य फिर से स्थापित हो गया. ईसी दिन किंग फेर्डिनांड पंचम और रानी ईसाबेला प्रथम की ईसाई सेनाओं के सामने ग्रेनाडा के मूर शासकों ने घुटने टेके थे. ग्रेनाडा के हाथ से निकलने के साथ ही स्पेन में मुसलमान मूर शाहों का साम्राज्य खत्म हो गया. दक्षिणी स्पेन में दारो और गेनिल नदियों के संगम पर बसा ग्रेनाडा शहर मूर शासकों का गढ़ था.

11वीं शताब्दी में सुल्तान आल्मोराविद के शासनकाल में ग्रेनाडा शक्ति और प्रभाव के मामले में अपने चरम पर था. 1238 में स्पेन के कई हिस्सों पर ईसाई सेनाओं ने मूर शासकों को हराते हुए वहां कब्जा करने का सिलसिला शुरू किया. इस कारण देश के बाकी हिस्सों से ज्यादातर मुसलमान दक्षिणी स्पेन के ग्रेनाडा के इलाकों में बसने लगे. धीरे धीरे ग्रेनाडा का साम्राज्य मूरिश सभ्यता का इकलौता सबसे बड़ा गढ़ बन कर रह गया.

इन दो सौ सालों की अवधि में ग्रेनाडा का खूब सांस्कृतिक और आर्थिक विकास हुआ. 15वीं शताब्दी के अंतिम चरण में कई आंतरिक झगड़ों के चलते स्पेन में ईसाई राजा फेर्डिनांड और ईसाबेला की राजशाही काफी ताकतवर बन कर उभरी. इसके चलते देश में ज्यादातर जगहों पर उन्होंने कई शताब्दियों से चले आ रहे मूरिश साम्राज्य का खात्मा कर दिया.

2 जनवरी 1492 को ग्रेनाडा के अंतिम मूर शासक राजा बोआब्दिल ने उसे स्पेनी सेनाओं को सौंप दिया. इसके बाद 1502 में स्पेनी शासन ने सभी मुसलमानों को जबरदस्ती ईसाई बनाने का आदेश दे दिया. अगली पूरी शताब्दी अनगिनत अत्याचारों की गवाह बनी और 1609 तक भी मूर वंश के जिन लोगों ने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा, उन्हें स्पेन से देश निकाला दे दिया गया. स्पेन के जुझारु शासक  व  उनके साथ लड़ी एक  महिला वीरागना के यशगान को  आज भी वहां के निवासी याद रखता है क्योोंकि वहाँ के इतिहास को चाटुकारों ने नही लिखा..

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