युद्ध काल का सर्वश्रेष्ठ सन्देश है श्रीमद्भागवत गीता, हर किसी को पढ़ना चाहिए- मेजर जनरल सुभाष शरण

युवाओं को सेना में आना है तो वह श्रीमद्भागवत गीता जरूर पढ़ें. श्रीमद्भागवत गीता युद्धकाल का सर्वश्रेष्ठ सन्देश है. यह मिलिट्री मैन्युल है. ३० साल पहले अमेरिका ने भी अपने सैनिकों के लिए इस्कोन मुंबई को भगवत गीता की ४० हजार प्रतियों का ऑर्डर दिया था. यह धर्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि संस्कृति की धरोहर है. अगर जीवन में हार नहीं माननी है तो भगवत गीता जरूर पढे़ं. उन्होंने युवाओं से कहा कि दलालों से बचकर केवल अपनी मेहनत पर ध्यान दीजिए. छह महीने की तपस्या से आप सेना में भर्ती हो सकते हैं. ये बात श्री सुरेश चव्हाणके, आरएसएस या बीजेपी के नेता द्वारा नहीं कही गई है बल्कि राष्ट्र रक्षक भारतीय सेना के मेजर जनरल सुभाष शरण ने कही है.

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मेजर जनरल शरण ने कहा की श्रीकृष्ण के मुख से निकली गीता एक ‘Military Manual (सैन्य नियमावली)’ है और सेना के हर जवान को इसका अनुसरण करना चाहिए. बता दें कि जनरल शरण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आर्मी में भर्ती के एडिशनल डायरेक्टर जनरल हैं. उन्होंने कहा कि गीता हमें हमारे जीवन में आने वाले सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रखती है. गीता में वो सारी शिक्षाएँ हैं, जिसे एक युद्ध के मैदान में दी गई हैं।.उन्होंने यह भी कहा कि गीता किसी ख़ास रिलिजन की पुस्तक नहीं है, युवाओं को इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि ये हमें जीवन में आने वाली हालातों के लिए पहले से ही तैयार करती है.

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मेजर जनरल शरण ने कहा कि ये एक ऐसी सैन्य नियमावली है जो युद्ध के मैदान में सामने आई थी. उन्होंने कहा कि किसी युद्ध के मैदान में हम केवल युद्ध की ही बात करते हैं और इसीलिए गीता को मैं एक सैन्य नियमावली मानता हूँ. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने अपने जवानों को इराक़ में तैनात करने से पहले भगवद्गीता की प्रतियाँ दी थीं और ये पुस्तकें उन्होंने भारत से ख़ास निवेदन कर के मँगवाई थी. शरण के अनुसार, अमेरिका ने भारत से भगवद्गीता की 30,000 प्रतियाँ मँगाई थी ताकि अपने सैनिकों को ‘कर्म योग’ का महत्व समझा सके. इसका अर्थ हुआ कि अपने शत्रु से बिना इस बात की परवाह किए लड़ाई करना कि अंत में क्या होने वाला है या क्या परिणाम निकलने वाले है.

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