11 दिसम्बर- पाकिस्तान की पूरी बटालियन को पीछे धकेल कर 8 योद्धाओ संग अमरता प्राप्त करने वाले BSF अधिकारी R K वाधवा जी बलिदान दिवस

जहाँ वीरों का सम्मान बंद हो जाता है वो भूमि कम से कम योद्धाओं से खाली हो जाती है ऐसा हम नही इतिहास कहता है और वीरों और बलिदानियों की वही थाती को सहेज कर रखने के लिए हमने अपना संकल्प लिया है कि किसी भी वीर योद्धा की स्मृति को हम लोप नहीं होने देंगे भले ही बिना खड्ग बिना ढाल वाले झूठे गाने से कोई कितना भी उसको छिपाने की कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले . 

ज्ञात हो की भारत पाकिस्तान के बीच युद्धों का इतिहास पुराना रहा है . हर बार पाकिस्तान में मुह की खाई जिस विजय में हमारे बलिदानियों के रक्त की धार बही . अफ़सोस की बात ये है कि आज की तुच्छ राजनीति उन्ही पाकिस्तानियों के साथ गुप्त मीटिंगे करने पर मजबूर कर देती हैं कईयों को केवल कुर्सी के लिए जबकि वो ऐसे करते समय उन वीरों का बलिदान भूल जाते हैं जो अमरता को प्राप्त कर गये राष्ट्र की एक एक इंच भूमि के लिए .

विदित हो की बलिदानियों का दल मानी जाने वाली BSF के सहायक कमांडेंट राम कृष्ण वधवा जी का आज बलिदान दिवस है . उनका नाम एक ऐसा नाम था जो दुश्मन देश की फौज के लिए साक्षात काल के रूप में सामने आया था . १९७१ का वो 5 दिसंबर था जब भारतीय सीमा में पड़ने वाले इलाके की राजा मोहतम और जोगिंद्र चौकी पर कब्जा कर लेने के बाद सीमा सुरक्षा बल के उच्च अधिकारियों द्वारा इस कार्य के लिए उस समय बटालियन के कमांडेंट संपूर्ण सिंह सोखी को किसी बहादुर अधिकारी का नाम बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने तुरंत अपने असिस्टेंट आरके वधवा का नाम लिया क्योंकि उन्हें विश्वास था इन वीर के पराक्रम पर . साथ ही इनके बल और बुद्धि का डंका पूरी BSF में बजता था और निश्चित रूप से ये रणबांकुरा इसके लिए योग्य भी था . 

गांव राजा राय के लोगों ने बताया कि दिवंगत आर के वधवा 25 वर्ष के अविवाहित युवा अधिकारी थे उन्होंने सहर्ष यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई । आरके वधवा के भाई सुभाष चंद्र वधवा के अनुसार अपने साथ इस मिशन पर जाने के लिए आरके वधवा ने 80 जवान एक तरफ कर लिए। गांव वासी करनैल सिंह ने बताया कि उसके दादा यश के अनुसार उन्हें अच्छे से याद है कि किस प्रकार भारत की फ़ौज के वो 80 जवान राष्ट्रभक्ति के रोंगटे खड़े कर देने वाले उद्घोष करते हुए पाकिस्तान की फ़ौज से टकराने के लिए आगे बढ़ रहे थे . BSF के ये सभी जवान  दूसरी तरफ लड़ रही पाक की फौज को चकनाचूर करने पर आमादा थे .   

बताया जाता है कि युद्ध का शंखनाद हुआ था रात में जब पाकिस्तानी सैनिको की स्थिति थोड़ी सी अनियमित थी . वो समय था लगभग रात्रि 8 बजे जब सीमा सुरक्षा बल के जवान असिस्टेंट कमांडेंट वधवा के नेतृत्व में राजा मोहतम चौकी पर अपना कब्जा करने के लिए आगे बढ़े तो दुश्मन देश कि फौज BSF के इस रौद्र रूप को देख कर अचानक भाग खड़ी हुई उन्होंने दोबारा फायरिंग शुरू कर दी परन्तु इस बार भारत कि तरफ से पाक को करारा जवाब दिया गया सुबह 4 बजे तक कमांडेंट वधवा ने अपने जवानों के साथ राजा मोहतम चौकी पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध में पाक के दो फौजी मरे एक को जवानों ने ज़िंदा गिरफ्तार कर लिए था .. 
इसके अलावा जवानों ने लम्बे समय तक युद्ध लड़ने के लिए सहेज कर लाये पाकिस्तानी हथियारों का जखीरा भी बरामद किया जिसमे एंटी टैंक गन जिसे पाकिस्तानियों ने थोड़ी दूर कपास के खेतों में दबा कर रखा था और साथ ही साथ 3 बीएमजी,1 रॉकेट लांचर, 5 स्पेयर बैरल बीएमजी, 2 इसएलआर, 3 एमके111 राइफल्स, 1 एम के 5 राइफल, 4 टेलीफोन, 3 वायरलेस सेट, 1 स्लाइडक सेट ,2 नक्शा सेट एक कंपास भी बरामद किया राजा मोहतम चौकी पर कब्जा करने के बाद क्षेत्र के मेजर जनरल एच के बख्शी 14 डिवीजन ने खुद आकर उनको बधाई दी ..
धोखे से वार करने के लिए जानी जाने वाली पाकिस्तानी फ़ौज ने एक बार फिर 11 दिसम्बर की सुबह श्री आर के वाधवा जी द्वारा विजित उस पोस्ट पर अचानक हमला कर दिया गया जिसमें असिस्टेंट आर के वधवा, इंस्पेक्टर भगवंत सिंह, सब इंस्पेक्टर इकबाल सिंह, सिपाही सुक्खा सिंह, राम सिंह, ओम प्रकाश, टहल सिंह सरदूल सिंह अंतिम सांस तक लड़ते हुए दुश्मन के सभी मंसूबों को ध्वस्त करते हुए अमरता को प्राप्त हो गये . आज उन वीर और उनके सभी अमरता प्राप्त साथियों को सुदर्शन न्यूज़ उनके बलिदान दिवस पर बारम्बार नमन करते हुए उनके बलिदान को सदा संसार के आगे लाते रहने का संकल्प लेता है . 

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