सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक जी के 548वें जन्मदिवस पर सुदर्शन न्युज परिवार की और से शत शत नमन्

15 अप्रैल का दिन देश में बडे गौरवपूर्ण तरीके से मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन सन् 1469 को सिखों के धर्म संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। गुरू नानक देव सिखों के प्रथम गुरू थे। सुविधा की द्दष्टि से उनका प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। इनका जन्म रावी नदी क किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा को एक खत्रीकुल में हुआ था। इनके पिता का नाम कल्यानचंद और माता का नाम तृप्ता देवी था।

बचपन से ही नानक के मन में आध्यात्मिक भावनाएं मौजूद थी। पिता ने पंडित हरदयाल के पार उन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा। नानक अपनी उम्र के बच्चों से ज्यादा होशियार थे। पंडित जी को अहसास हो गया था कि नानक को स्वयं ईश्वर ने पढ़ाकर संसार में भेजा है। इसके बाद नानक को मौलवी कुतुबुद्दीन के पास पढ़ने भेजा गया पर नानक के प्रश्नों से मौलवी निरूत्तर हो गए तो उन्होनें अलफ, बे की सीफहीं के अर्थ सुना दिए।

विद्यालय की दीवारें नानक को बाँधकर न रख सकीं। गुरु द्वारा दिया गया पाठ उन्हें नीरस और व्यर्थ प्रतीत हुआ। अंतर्मुखी प्रवृत्ति और विरक्ति उनके स्वभाव के अंग बन गए। एक बार पिता ने उन्हें भैंस चराने के लिए जंगल में भेजा। जंगल में भैसों की फिक्र छोड़ वे आँख बंद कर अपनी मस्ती में लीन हो गए। भैंसें पास के खेत में घुस गईं और सारा खेत चर डाला। खेत का मालिक नानकदेव के पास जाकर शिकायत करने लगा।

ये चारों ओर घूमकर उपदेश करने लगे। 1521 तक इन्होंने तीन यात्राचक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य मुख्य स्थानों का भ्रमण किया। इन यात्राओं को पंजाबी में ‘गुरु’ कहा जाता है। भादों की अमावस की धुप अँधेरी रात में बादलों की डरावनी गड़गड़ाहट, बिजली की कौंध और वर्षा के झोंके के बीच जबकि पूरा गाँव नींद में निमग्न था। उस समय एक ही व्यक्ति जाग रहा था, ‘नानक’। नानक देर रात तक जागते रहे और गाते रहे। आधी रात के बाद माँ ने दस्तक दी और कहा- ‘बेटे, अब सो भी जाओ। रात कितनी बीत गई है।’

नानक रुके, लेकिन उसी वक्त पपीहे ने शोर मचाना शुरू कर दिया। नानक ने माँ से कहा- ‘माँ अभी तो पपीहा भी चुप नहीं हुआ। यह अब तक अपने प्यारे को पुकार रहा है। मैं कैसे चुप हो जाऊँ जब तक यह गाता रहेगा, तब तक मैं भी अपने प्रिय को पुकारता रहूँगा। नानक ने फिर गाना प्रारंभ कर दिया। धीरे-धीरे उनका मन पुनः प्रियतम में लीन हो गया।

कौन है ये नानक, क्या केवल सिख धर्म के संस्थापक। नहीं, मानव धर्म के उत्थापक। क्या वे केवल सिखों के आदि गुरु थे? नहीं, वे मानव मात्र के गुरु थे। पाँच सौ वर्षों पूर्व दिए उनके पावन उपदेशों का प्रकाश आज भी मानवता को आलोकित कर रहा है। गुरुनानक देव की मृत्यु 1539 में हुई। ऐसे धर्म गुरू का जन्म दुनिया के लिए प्रेरण दायक हैं। उनके जन्म दिवस पर हार्दिक बधाई।

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW