परशुराम जी की जयंती आज, इस अवसर पर सुदर्शन न्यूज करता है शत्-शत् नमन्

हिन्दू वर्ग के लिए भगवान पशुराम बड़े आराध्य है, भगवन परशुराम ने ब्राह्मण कुल में जन्म लिया और हिन्दूत्व का प्रचार किया. भगवान पशुराम अजय एंव अमर है जिनका जिक्र रामायण से लेकर महाभारत और भगवत पुराण व कल्कि पुराण आदि अनेको ग्रन्थों में किया गया है. जिन ग्रन्थों का निर्माण अलग अलग युगों में किया गया है.

हर युग में उन्हें पूजा गया है और आने वाले अनगिनत युगों तक पूजा जाएगा. भगवान परशुराम की जयंती हिन्दू पंचांगके वैशाख माह की शुक्ल पक्ष तृतीयाको मनाई जाती है. इसे अक्षय तृतीया के रूप में भी मनाया जाता है इस दिन लोग सोने के आभूषण खरीदते है व भगवान परशुराम के लिए उपवास रख कर अलग अलग तरह से इस पर्व को मानते है. आज भगवन परशुराम जी की जयंती के उपलक्ष में जानिए भगवान परशुराम से जुडी हुई कुछ महत्वपूर्ण बाते.

भगवान पशुराम को अहंकारी और धृष्ट हैहय वंशी क्षत्रियों का पृथ्वी से २१ बार संहार करने के लिए भी जाना जाता है। भगवान पशुराम धरती पर वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे। भारत के अधिकांश ग्राम उन्हीं के द्वारा बसाये गये है। वे भार्गव गोत्र की सबसे आज्ञाकारी सन्तानों में से एक थे, जो सदैव अपने गुरुजनों और माता पिता की आज्ञा का पालन करते थे। वे सदा बड़ों का सम्मान करते थे और कभी भी उनकी अवहेलना नहीं करते थे। उनका कहना था कि राजा का धर्म वैदिक

जीवन का प्रसार करना है नाकि अपनी प्रजा से आज्ञापालन करवाना। वे एक ब्राह्मण के रूप में जन्में अवश्य थे लेकिन कर्म से एक क्षत्रिय थे। उन्हें भार्गव के नाम से भी जाना जाता है। भगवान परशुराम का जन्म जमादग्नि तथा रेणुका के पांचवें पुत्र के रूप में हुआ था. परशुराम को भगवान विष्णु के 6वें अवतार के रूप में जाना जाता है. परशुराम शिव के भक्त थे उन्होंने शिव की कठोर तपस्या करके सफल युद्धनीति का वरदान ले लिया था. भगवन परशुराम वीरता के साक्षात उदहारण थे. भगवन परशुराम क्रोधित प्रवति के थे.

भगवन परशुराम के कई शिष्य थे जिनमे से भीष्म, द्रोण, कौरव-पाण्डवों के गुरु व अश्वत्थामा के पिता एवं कर्ण श्रेष्ठ थे. ऐसे परम पूज्य भगवन परशुराम जी की जंयती सुदर्शन न्यूज़ की तरफ से शत शत नमन.

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