5 अप्रैल- दांतेवाडा में नक्सलियों से 2010 के युद्ध में अमर हुए CRPF के 73 योद्धाओं को शत-शत नमन


देश को आज का दिन उस सरकार और उस शासन की अकर्मण्यता के लिए याद रखना होगा जब हाथ और पैर बाँध कर लड़ने के लिए भेज दिए गये जवानों का नरसंहार पूरी तरह से तथाकथित मानवाधिकार को ढाल बना कर किया गया था . हमला करने वाले सभी नियमों से मुक्त थे लेकिन आत्मरक्षा करने वाले जवान रुल , मैनुअल और मानवाधिकार आयोग की तमाम बेडियो से बंधे हुए थे . फिर भी उन्होंने अंतिम सांस तक जंग लड़ी और आंतरिक सुरक्षा के प्रहरी बने रहे .

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स्थानीय समय के अनुसार सुबह 6 बजे के बाद दांतेवाडा ज़िले के ज़गली इलाके में एक सीआरपीएफ़ टुकड़ी पर माओवादियों ने हमला किया था. उंची पहाड़ियों से बंदूक और विस्फोटकों से ये हमले किए गए. माओवादियों की ओर से सबसे बड़ा हमला माना गया था इस नरसंहार को . पिछली सरकारों की निष्क्रियता और अकर्मण्यता के चलते ही पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड व छत्तीसगढ़ के व्यापक इलाकों में माओवादी छापामार सक्रिय हो गये थे .यद्दपि उस समय की केंद्र सरकार ने बार बार कहा था कि उसने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाया है लेकिन उस दिन के हमले से स्पष्ट हो गया कि बीहड़ इलाकों मे उनका असर ज्यों का त्यों बना हुआ था .

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सामन्य इंसान तो दूर, उस समय ये इलाका सशस्त्र बलों के लिए भी ये ख़तरनाक बना हुआ था . उस समय कांग्रेस शासित सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री और सिर्फ हिन्दू संतो को जेल भेजने में व्यस्त पी चिदंबरम ने हमले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सारी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार पर लाद दी थी. उन्हें सिर्फ इतना पता था कि कहीं कोई भयानक ग़लती हुई थी और उन्हें लगा कि वे माओवादियों के किसी कैंप के पास पहुंच गए थे या किसी फ़ंदे में फ़ंस गए थे.

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उस घटना से उन माओवादियों की नृशंसता स्पष्ट हो गयी थी जिनके लिए मानवाधिकार वाले और तथाकथित बुद्धिजीवी पलक पावडे बिछा कर खड़े हो जाते हैं ..उस समय सीआरपीएफ़ के 120 जवान अपनी गाड़ियों में टाडेमेटला की ओर जा रहे थे. सुकमा ब्लॉक में चिंतलनार और टाडेमेटला के बीच बारुदी सुरंग के विस्फोट के ज़रिये सबसे पहले उनका रास्ता रोक दिया गया. उसके बाद पहाड़ियों के उपर से माओवादियों ने गोलियां बरसाना शुरु किया. नक्सल विरोधी अभियान के लिए सीआरपीएफ़ के डीआईजी एस आर पी कल्लुरी ने कहा था कि कुल मिलाकर सीआरपीएफ़ के 72 जवानों व छत्तीसगढ़ के एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है.

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तक तरफ भारत माता की जय के नारे थे तो दूसरी ओर लाल सलाम बोला जा रहा था . आज राष्ट्र की अखंडता को बनाये रखने के लिए राष्ट्र के अन्दर के ही गद्दारों से लड़ते हुए अमरता को प्राप्त करने वाले केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के उन सभी वीर जवानो को सुदर्शन परिवार बारम्बार नमन करता है और उनके बलिदान को अनत काल तक जनमानस को याद दिलाते रहने का संकल्प लेता है . आखिर में इतना माना जा सकता है कि अभी हिसाब बाकी है , खास कर उन गद्दारों का जन्होने खुली चुनौती दी थी भारत के शौर्य को .

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