20 दिसंबर – 1971 युद्ध में बंगलादेशियो को पाकिस्तानियों के अत्याचार से बचाते हुए आज ही वीरगति को प्राप्त हुए थे लेफ्टिनेंट अरविंद दीक्षित. लेकिन बदले में बंगलादेशियों ने हमें को क्या दिया ?

इनका नाम शायद ही किसी बंगलादेशी को याद हो..खैर बंगलादेशी तो बहुत दूर की बात हैं, इनको तो भारत के ही तथाकथित इतिहासकारों व नकली कलमकारों ने विस्मृत कर डाला है और केवल 1 या 2 घरों या लोगों के गुणगान में ऐसे व्यस्त रहे कि बाकी सभी देशवाशियों को उनके सच्चे आदर्शों को जानना तक नाकों चने चबाने जैसा हो गया था .. बहुत कम लोग ही जानते होंगे आज अमरता को प्राप्त करने वाले उस लेफ्टिनेंट अरविंद शंकर दीक्षित को जिनके महान पुरुषार्थ व अदभुद युद्ध कौशल से ही ये संभव हो पाय था कि आतंक की फैक्ट्री पाकिस्तान के लगभग 1 लाख सैनिको नाक रगड़ कर अपनी जान की भीख मांगे थे और करोड़ों बंगलादेशी उस अंतहीन अत्याचार से मुक्ति पाए थे जिस को वो आज तक झेल रहे होते अगर अरविंद दीक्षित जैसे योद्धा अपना बलिदान न दिए होते तो ..

ध्यान देने योग्य है कि सेना का राजनैतिक उपयोग न करने की सलाह देने वाले कुछ तथाकथित बुद्धिजीवयों ने 1971 में सेना के बलिदानियों के बजाय अपने नाम को खूब आगे चमकाया और इसके चलते ही लेफ्टिनेंट अरविंद शंकर दीक्षित जैसे उन वीर योद्धाओं को देश जानने से वंचित रह गया जिन के चलते भारत को उस युद्ध मे विजय मिली थी जिसका पूरा श्रेय किसी और ने व पूरा लाभ बंग्लादेशियो ने उठाया था..सवाल ये है कि भारत अरविंद दीक्षित जैसे के वीरो के लहू से पाई आज़ादी के बाद उन्ही बंगलदेशियो ने भारत को क्या दिया..भारत मे आये दिन लूट, हत्या,, बलात्कार , चोरी, नकली नोट, गौ हत्या, सीमा विवाद, घुसपैठ लैंड जिहाद आदि आपराधो में बंगलादेशी संलिप्त पाए जा रहे हैं..  जबकि खुद पर अंतहीन अत्याचार करने वाले पाकिस्तानियों के प्रति इनका क्या नज़रिया है इसको बताने की शायद जरूरत नही है..

पाकिस्तान द्वारा 3 दिसम्बर, 1971 को भारत के पश्चिम में एक व्यापक युद्ध की शुरुआत कर देने के तुरंत बाद सेना मुख्यालय ने पूर्वी कमांड के जी.ओ.सी. इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. अरोड़ा को ‘आगे बढ़ने’ के आदेश दिए। वे इस आकस्मिक घटना के लिए सारे प्रबंध कर चुके थे तथा पूरी तरह से तैयार थे। अगली सुबह से ही ‘स्वतंत्रता अभियान शुरू कर दिया गया।’ पाकिस्तान को रौंदने के लिए छेडे गये इसी महा अभियान के एक सदस्य का नाम था लेफ्टिनेंट अरविंद शंकर दीक्षित जी.

छत्तीसगढ़ अंचल के वीर सपूत पश्चिम वीर चक्र वीर बलिदानी लेफ्टिनेन्ट अरविन्द शंकर दीक्षितए आईसी 24999 ए 105 इंजीनियर्स रेजीमेन्ट ने 20 दिसंबर 1971 को भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान अद्भुत साहस का प्रदर्शन करते हुए दुश्मन सेना को पराजित किया। किन्तु अंत में मातृृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। आज उस महान बलिदानी लेफ्टिनेंट अरविंद शंकर दीक्षित के बलिदान दिवस पर उनको बारंबार नमन व वंदन करते हुए सुदर्शन परिवार नकली कलमकारों व तथाकथित इतिहासकारों द्वारा विस्मृत की गई  उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है ..

 

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