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2 जून- मथुरा के जवाहर बाग़ मुठभेड़ में आज ही वीरगति पाए मथुरा पुलिस के SP सिटी मुकुल द्विवेदी और SHO संतोष यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि


शायद अब आप को ठीक से याद न हो जवाहर बाग़ में गोलियों को तड़तडाहट , पुरानी बात हो गयी न …. लेकिन उन परिवारों से जा कर मिलिए , उनके जख्म अभी भी ताजे हैं जिन्होंने वर्दी के कर्तव्य पर अपने घरों के मुखिया गंवा दिए .. प्रभु श्री कृष्ण की नगरी में वो भूमि पर एक कंस रूपी रामवृक्ष यादव अवैध कब्ज़ा कर के बैठा था .. उसको हटाने के लिए पुलिस बल भेजा गया जिसका पहला कर्तव्य था बिना किसी रक्तपात के वहां अवैध कब्ज़े को हटाना , निश्चित रूप से रक्तपात की पहल पुलिस ने नहीं की .

पुलिस ने हर नियम और कानून का पालन किया और दोषियों से वो स्थल खाली करने को कहा लेकिन रामवृक्ष एक सूखे वृक्ष की तरह अपनी जिद पर न सिर्फ अड़ा रहा अपितु सीधे पुलिस पर फायर झोंक दिया .. ये घटना 2 जून सन 2016 की है , मतलब आज से ठीक 3 साल पहले .. जिसे वर्दी वालों के कार्य और बलिदान देखने हो , उनके लिए आज से बेहतर दिन शायद ही कोई और हो ..पुलिस सामने थी और अतिक्रमणकारी पेड़ों के पीछे थे . उनके लिए छिपने आदि के तमाम मौके थे लेकिन पुलिस के पास सीमित संसाधन और विकल्प थे . अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर पेड़ों से फायरिंग की गई।

अत्याधुनिक हथियारों से लैस उपद्रवियों ने पुलिस को निशाना बनाते हुए सीधे फायरिंग की। पुलिस ने भी मोर्चा सम्भाला लेकिन उस मुठभेड़ में उत्तर प्रदेश पुलिस का एक जांबाज थानाध्यक्ष बलिदानी संतोष यादव और तत्कालीन एस पी सिटी बलिदानी मुकुल द्विवेदी अमरता को प्राप्त हो गये . यहाँ इन दोनों के उस पराक्रम की चर्चा बेहद जरूरी है कि इन्होने एक सच्चे सेनापति का कर्तव्य निभाया और दुश्मनों का पहला वार अपने सीने पर झेला बजाय कि अपने अधीनस्थों को आगे कर देने के .

अपने दो वीरों को अपनी आँखों के आगे वीरगति प्राप्त करता देख कर बाकी जवानों ने मोर्चा सम्भाला और जवाबी प्रतिउत्तर दिया जो उनके पास अंतिम विकल्प के रूप में बचा हुआ था . इस घटना के दौरान कुल 23 पुलिस कर्मियों को फायर आर्म्स एवं लाठी-डंडों की चोटें आयी। 56 उपद्रवी घायल हुए हुए थे। यूपी पुलिस को आपरेशन के दौरान 45 तमंचे 315 बोर, 02 तमंचे 12 बोर, 01 रायफल नम्बरी 315 बोर, 01 रायफल 12 बोर, 04 रायफल 315 बोर, 80 जीवित एवं खोखा कारतूस 12 बोर, 99 जीवित एवं खोखा कारतूस 315 बोर एवं 05 खोखा कारतूस 32 बोर बरामद हुए थे। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 18 अतिक्रमणकारी मारे गए थे।

1998 बैच के पीपीएस मुकुल के ताऊ महेशचन्द्र द्विवेदी प्रदेश के डीजीपी रहे हैं जबकि पिता ने बीडीओ रहते जनता की सेवा की। गांव में मुकुल के पिता श्रीचन्द्र, उनकी माता मनोरमा देवी और एक नौकर ही रहते हैं। भाई प्रफुल्ल दुबे दुबई में नौकरी करते हैं। बलिदानी मुकुल द्विवेदी साल 2008-2009 में बुलंदशहर में सीओ सिटी थे। मुकुल जी का व्यवहार सभी को उनसे जोड़े रखता था। वारदात का वक्त कुछ भी हो, वो अलर्ट रहते थे और अक्सर पत्रकारों से पहले मौके पर मौजूद मिलते थे। मूल रूप से जिला औरेया के रहने वाले बलिदानी मुकुल द्विवेदी अक्सर कहते थे कि पुलिस में ना आता तो पत्रकार होता।

वो कडक छवि के बजाय मृदुभाषी थे और जनता के लिए हमेशा उपलब्ध थे। वो अपनी ओर से हर ईमानदार कोशिश करते थे ताकि पीड़ित मदद मिल सके। साल 2000 में ही उन्होंने पुलिस ज्वाइन की थी। अपने 16 साल के करियर में उन्होंने हमेशा वर्दी का मान रखा। डिप्टी एसपी से एडिश्नल एसपी बने तो भी व्यव्हार नहीं बदला। उनकी वीरगति के बाद उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी जी को पुलिस विभाग का ओएसडी बनाया गया जो सीओ के समकक्ष पद माना जाता है . आज भले ही बलिदानी मुकुल द्विवेदी आम जनता के बीच नहीं हैं लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से जो लकीर खींची है उसको शायद ही कभी कोई मिटा या भुला पायेगा .

इस जंग में अमरता को प्राप्त करने वाले दूसरे बलिदानी हैं SHO संतोष यादव जी .. मूल रूप से जौनपुर के केवटली गांव रहने वाले करीब 40 वर्षीय अमर बलिदानी संतोष यादव जी वर्ष 2001 में पुलिस सेवा में आए थे। वह सीधे उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हुए। वर्ष 2013 में वह आगरा से मथुरा आए थे। यहां सर्वप्रथम उन्हें थाना प्रभारी शेरगढ़ बनाया गया। इसके बाद उन्हें स्वॉट टीम का प्रभारी बनाया गया। स्वॉट टीम में रहते हुए संतोष यादव ने कई बड़े खुलासे किए थे। स्वॉट टीम के बाद वह एसएसपी के पीआरओ बने। इसके बाद उन्हें जमुनापार का थाना प्रभारी बनाया गया। इसके बाद एक बार फिर से एसएसपी ने उन्हें अपना पीआरओ बनाया।

करीब बीस दिन पूर्व एसएसपी डा. राकेश सिंह ने उन्हें फरह का थाना प्रभारी बनाया था। वह अपने पीछे पत्नी एवं करीब दस वर्ष की बेटी और करीब आठ वर्ष के बेटे को छोड़ गए हैं। उस समय हालात ये थे कि इनकी वीरांगना पत्नी को उनके अमरता की जानकारी न मिले उसके लिए उनके घर का टी वी तक बंद कर दिया गया था .. उनका निष्कलंक जीवन आज भी उनके क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जिसको ले कर कई युवा पुलिस में भर्ती होने की तैयारी करते हैं .

वीरता , त्याग और बलिदान के इन दोनों अमर स्वरूपों को आज उनके बलिदान दिवस पर भावभीनी और अश्रुपूरित श्रद्धांजलि देते हुए सुदर्शन न्यूज उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है और आम जनता से भी अपील करता है कि ऐसे बलिदानियों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए पुलिस विभाग के लिए फैलाई जाने वाली तमाम अफवाहों का खुद से ही प्रतिकार करते हुए आम लोगों को संतोष यादव और मुकुल द्विवेदी के बलिदान के बारे में जरूर बताएं. . संतोष यादव और मुकुल द्विवेदी अमर रहें …..


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