सत्य को स्वीकार कर लिया शिया वक्फ बोर्ड ने और प्रभु श्रीराम जन्मभूमि के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की ये अपील


ये यूनिवर्सल ट्रुथ है कि सत्य को आप लाख दबाएँ, लाख छिपायें लेकिन सत्य कभी छिपता नहीं है. जो भी सत्य का विरोधी है उसको भी एक न एक दिन सत्य को स्वीकार करना पड़ता है. अयोध्या प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मामले में ये कहावत उस समय सत्य साबित हुई जब शिया वक्फ बोर्ड ने बाकायदा सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अयोध्या की विवादित जमीन(श्रीराम जन्मभूमि) बिना किसी विवाद के मंदिर बनाने के लिए हिंदुओं को दे दी जाए, वहां भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण होने दिया जाए.

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सुप्रीम कोर्ट में शिया वक़्फ़ बोर्ड ने दलील दी कि अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले में एक तिहाई हिस्सा मुस्लिमों को दिया था, न कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को. हमारा वहां दावा बनता है और हम उसे हिंदुओं को देना चाहते हैं. ये ओरिजिनीली हमारा है और वह हिस्सा हम हिंदुओ को देना चाहते हैं. शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि अन्तिम मुतवल्ली केयर टेकर, शिया ही था, हम अपना कब्जा यहां नहीं मानते और हम यह हिस्सा हिंदुओं को देना चाहते हैं.

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शिया बोर्ड ने पीठ के समक्ष कहा कि बाबर का कमांडर मीर बकी शिया मुस्लिम था और बाबरी मस्जिद का पहला मुतवल्ली (देखभाल करने वाला) था. शिया वक्फ बोर्ड की ओर से वकील एम सी धींगरा ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में 16वें दिन की सुनवाई पर पीठ से कहा, ‘मैं हिंदू पक्ष का समर्थन कर रहा हूं.’ उन्होंने कहा कि कोर्ट ने विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटते हुए एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को दिया था, ना कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को और इसलिए वह इस आधार पर अपना हिस्सा हिंदुओं को देना चाहता है जिसका एक आधार यह भी है कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ की संपत्ति है.

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