23 नवम्बर: “पत्रकारों के काला दिवस” पर 2009 में आज ही फिलीपींस में बेरहमी से कत्ल किये गए 32 मीडियाकर्मियों को अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि


उनको सत्ता ने डराने की कोशिश की थी, उनको आतंकियों ने भी विचलित करने की कोशिश की.. लेकिन वो कलम के सिपाही थे और जनता को असल सच से वाकिफ करवाने के लिए संकल्पित भी .. इसीलिए आखिकार उन पर गोलियों की बौछार कर दी गयी .. उनमे से कुछ चाहते तो भाग भी सकते थे लेकिन एक भी अपने दूसरे साथी के हाथ को छोड़ कर नहीं भागा और आखिर में जब उनके शव गिने गए तो वो 32 की संख्या में थे जो दिल्ली के विधायक सोमनाथ भारती की तरह सत्ता मद में चूर थे और अपनी हिंसक नेतागीरी में ऐसे चूर थे कज उन्हें चिंता नहीं थी जनता व पत्रकारिता किसी की .. उनके अनुसार उनकी बात ही सर्वोपरि है लेकिन मीडिया कर्मी बलिदान हो गए पर उस तानाशाही के आगे झुके नहीं थे.

पत्रकारिता समाज का आइना होती है भले ही फिलीपींस के वो क्रूर शासक व दिल्ली के सोमनाथ भारती जैसे नेता इसको समझ न पाएं,  परन्तु जब कोई ऐसी घटना होती है जिससे पूरा समाज एवं पत्रकारिता का हनन होता है तो तब बहुत दुःख होता है. बात कुछ ऐसी ही है बता दें कि आज ही 23 नवम्बर 2009 में फिलीपींस में मासूम बेगुनाह 32 मीडियाकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया गया था. विश्व भर में एक साथ इतने पत्रकारों का मारा जाना इसे मामले में सबसे बड़ी घटना थी. पत्रकारों की हत्या के बाद इराक के बाद फिलीपींस को दुनिया को दुनिया का सबसे खतरनाक देश घोषित किया गया जहां पत्रकारों को सबसे ज्यादा खतरा है.

पत्रकारों के इस वीभत्स नरसंहार की घटना तब हुई जब एसामाएल मंगुदादातु के समर्थक गवर्नर पर के लिए नामाकंन दाखिल करने जा रहे थे. परन्तु विरोधकर्ताओं ने गवर्नर का विरोध किया. विरोध प्रदर्शन कारियों में पत्रकार भी शामिल थे. जिसके बाद एसामाएल मंगुदादातु के समर्थकों ने प्रदर्शन कारियों को रोंककर गोली मार दी थी. इस घटना में कुल 57 लोग मारे गये थे. पत्रकारों के उसी नरसंहार के चलते फिलीपींस की अन्तराष्ट्रीय  स्तर पर छवि बहुत खराब हुई थी और विदेशी पत्रकारों ने वहां जाना भी छोड़ दिया. इतना ही नही, नई पीढ़ी पत्रकारिता के पेशे में आने से भी हिचकिचाने लगी जिसके चलते सच्ची खबरों का वहां अकाल पड़ गया और आज वही देश न सिर्फ गरीबी से जूझ रहा बल्कि आतंकवाद की भी विभीषिका झेलने को मजबूर है.

यही नहीं, फिलीपींस पत्रकारों के लिए विश्व मे दूसरा  सबसे खतरनाक देश घोषित हो चुका है . दिल्ली में तानाशाही की तरफ बढ़ रही केजरीवाल सरकार व उनके दाएं हाथ सोमनाथ भारती जैसे लोगों द्वारा पत्रकारों पर लगातार अत्याचार करना व बाद में उनकी पूरी पार्टी द्वारा उस कुकृत्य का समर्थन करना कहीं न कहीं ये दर्शाता है कि ये समूह भी भारत मे वही फिलीपींस की स्थितियां बनाना चाहता है और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर वही छवि भी .. आज उन सभी दिवंगत बहादुर 32 मीडियाकर्मियों को सुदर्शन परिवार पत्रकारिता के इस काले दिवस पर भावभीनी व अश्रुपूरित श्रद्दांजलि समर्पित करते हुए उनके पराक्रम को सदैव जनमानस के आगे लाते रहने का संकल्प दोहराता है


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