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न्याय व सत्य का मार्ग दिखाने वाले भगवान महावीर जयन्ती की संसार के समस्त धार्मिकों को हार्दिक शुभकामनायें

आज समस्त संसार के धार्मिक लोग भगवान महावीर की जन्मजयन्ती मना रहे हैं. पंचशील सिद्धान्त के प्रर्वतक और जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर सत्य, अहिंसा व न्याय के प्रमुख ध्वजवाहकों में से एक है. जैन धर्म के 24 वें तीर्थकार स्वामी महावीर का जन्म चैत्र मास के शुक्ल त्रयोदशी तिथि को हुआ था. महावीर जयंती कठिन तपस्या से जीवन पर विजय प्राप्त करने का त्योहार है. महावीर जयंती पर जैन मंदिरों मे भगवान महावीर की मूर्ति का विशेष रूप से अभिषेक किया जाता है.

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भगवान महावीर का जन्म लगभग 600 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था. भगवान महावीर के पिता का नाम महाराज सिद्धार्थ और माता का नाम महारानी त्रिशला था. भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था तथा वह बचपन से ही बड़े तेजस्वी और साहसी बालक थे. गृहस्थ जीवन त्याग करने के बाद महावीर ने साढ़े 12 सालों तक कठोर तपस्या की फिर वैशाख शुक्ल दशमी को ऋजुबालुका नदी के किनारे साल के पेड़ के नीचे उनको ‘कैवल्य ज्ञान’ की प्राप्ति हुई थी. महावीर के जन्म को कल्याणक के नाम से भी जाना जाता है.

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तप और ज्ञान से वर्धमान ने सभी इच्छाओं तथा विकारों पर काबू पा लिया था तथा इसीलिये वर्धमान को महावीर कहा गया. आमजन के कल्याण तथा अभ्युदय के लिए भगवान महावीर ने धर्म-तीर्थ प्रवर्तन किया. स्वामी महावीर के मुताबिक मनुष्य को खुद पर विजय प्राप्त करनी चाहिए. अपने ऊपर विजय प्राप्त करने का मतलब लाखों शत्रुओं पर जीत है. भगवान महावीर का कहना था कि मनुष्य को कितनी भी आपात स्थितियां आ जाएं लेकिन अपने पथ से भटकना नहीं चाहिए उसे अपने पथ पर कर्तव्यनिष्ठ होकर डटे रहना चाहिए.

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इस दिन जैन मंदिरों में महावीर की मूर्तियों को अभिषेक किया जाता है तथा इसके बाद मूर्ति को रथ पर स्थापित करके शहर में जुलूस निकाला जाता है. भगवान महावीर का कहना है कि मनुष्य को कभी भी असत्य का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए. मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए. महावीर स्वामी ने ब्रह्राचर्य के बारे में बताया है कि उत्तम तपस्या,ज्ञान ,संयम और  विनय ब्रह्राचर्य की जड़ है. भगवान महावीर ने दुनिया को अहिंसा का सन्देश दिया, सत्य व न्याय का मार्ग दिखाया.

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भगवान महावीर ने अपने हर भक्त को अहिंसा के साथ, सत्य, अस्तेय, बह्मचर्य और अपरिग्रह के पांच व्रतों का पालन करना आवश्यक बताया है. साथ ही उन्होंने साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका- इन चार तीर्थों की स्थापना की. इसलिए वह तीर्थंकर भी कहलाए. भगवान महावीर ने सालों से चल रही सामाजीक विसंगतियों को दूर करने के लिए भारत की मिट्टी को चंदन बनाया. उन्होंने जात-पात के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के कल्याण की बात कही. आज भगवान महावीर की जन्मजयन्ती पर सुदर्शन परिवार उनको शत-शत नमन करता है.

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