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7 जून: बलिदान दिवस पर नमन है “मेजर ऋषिकेश रमानी” को.. हिन्द का वो जांबाज योद्धा जिसने 12 गोलियां खाने के बाद भी 3 इस्लामिक आतंकियों को मार गिराया और खुद अमर हो गया

इन्होने कभी देश की एकता और अखंडता की ठेकेदारी नहीं ली . ये वो योद्धा थे जिन्होंने अपना सर्वस्व लुटा दिया इस देश के लिए और कभी आज़ादी की तथाकथित ठेकेदारी भी नहीं ली . कहनागलत नहीं होगा कि इन्होने जन्म ही लिया इस देश के लिए और अमरता को भी प्राप्त हुए इसी देश के लिए .. उन तमाम ज्ञात अज्ञात वीर बलिदानियों में से एक हैं मेजर ऋषिकेश जी जो आज ही इस्लामिक आतंक से लड़ते हुए सदा सदा सदा के लिए अमर हो गये थे . मेजर ऋषिकेश रमानी नियंत्रण रेखा पर लगातार दो दिनों तक घुसपैठियों से लड़ने के बाद 7 जून 2009 को बलिदान हुए.

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नियंत्रण रेखा से आतंकियों के एक बड़े गुट की भारत में घुसपैठ की गोपनीय सूचना पर 23 पंजाब रेजिमेंट को अत्यंत चौकन्ना रखा गया गया था. इस से निपटने के लिए मेजर रमानी के नेतृत्व में 4 अधिकारियों व 25 जवानों की एक टीम बनाई गई. मेजर रमानी के नेतृत्व में 5 जून 2009 को उग्रवादियों को देखते ही भीषण मुठभेड़ शुरू हुई | सैनिकों ने पूरे दो दिनों तक लड़ाई लड़ी. 5 से 7 जून तक यह सैन्य टुकड़ी मात्र सूखे मेवों और चॉकलेट्स पर एक मिनिट भी सोए बिना लगातार लड़ती रही. लेकिन 7 जून की दोपहर वहां बारिश हुई. फिसलन से सैनिकों को अपने पैर जमाए रखने में परेशानी होने लगी.

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अचानक मेजर रमानी फिसले और आतंकियों के 2 मीटर नजदीक गिर पड़े. लेकिन मौत को सामने देखते हुए भी उन्होनें अपनी एके 47 उठाई और आतंकियों पर गोलीबारी जारी रखी. उन्हें 12 गोलियां लगी परंतु उन्होनें 3 आतंकियों को मार गिराया .. मेजर रमानी ने आतंकियों के बीच गिरने के साथ ही गोलियां बरसानी शुरू कर दी. उनके इस साहस से आतंकी दंग रह गए. वे इस स्तर के साहस की उम्मीद नहीं कर रहे थे.

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मेजर रमानी के साहस और अपने तीन साथियों के मारे जाने से आतंकी पूरी तरह हिल गए और घबरा कर दो आतंकी वापस भाग गए. मेजर रमानी अत्यंत वीरता से लड़े और कर्तव्य के प्रति अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. भारत की एकता और अखंडता पर प्राण न्यौछावर करने वाले भारत माँ के वीर सपूत को आज अर्थात 7 जून को उनके बलिदान दिवस पर सुदर्शन परिवार बारम्बार नमन करते हुए उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है . जय हिन्द की सेना …

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