अयोध्या में जुटने लगी रामभक्तों की भीड़.. विहिप का एलान- अंगद, श्रीकृष्ण की तरह ये आख़िरी विनती, इसके बाद होगा रण

25 नवम्बर को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले विहिप के कार्यक्रम की तैयारिया लगभग पूरी हो चुकी हैं तथा देशभर से बड़ी संख्या में श्रीरामभक्त अयोध्या में जुटना शुरू हो गये हैं. इस बीच विहिप ने एलान कर दिया है कि श्रीराम मंदिर निर्माण में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है. विश्व हिंदू परिषद ने एलान कर दिया है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए हो रही यह धर्मसभा मंदिर निर्माण के लिए अंतिम सभा है. अब मंदिर निर्माण के लिए सभाएं, प्रदर्शन और धरना के जरिये संदेश नहीं दिए जाएंगे. इसके बाद विरोधियों को समझाया नहीं जाएगा बल्कि सीधे मंदिर का निर्माण का काम होगा.

विश्व हिन्दू परिषद् के प्रांत संगठन मंत्री भोलेन्द ने कहा कि इस सभा से मंदिर निर्माण में अड़ंगा डालने को अंतिम बार समझाने का प्रयास किया जा रहा है. अगर श्रीराम विरोधी नहीं माने तो नतीजा भुगतेंगे. अपने बयान में भोलेंद ने विहिप की तरफ से हिंदू समाज से 25 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में अयोध्या पहुंचने का आह्वान भी किया तथा कहा कि हिंदुओं को इस सभा में हिस्सा लेकर यह दिखा देना चाहिए कि देश क्या चाह रहा है. विहिप संगठन मंत्री ने कहा कि जिस तरह युद्ध से पहले अंगद दूत बनकर रावण को समझाए गए थे। कहा था कि सीता मॉं को भगवान राम को ससम्मान देकर युद्ध टाल लें. कृष्ण पांडवों का दूत बनकर कौरवों को समझाने गए थे कि पांच गांव ही दे दो ताकि युद्ध न हो. पर, न रावण माना और न कौरव फिर क्या हुआ था, परिणाम सबके सामने हैं.

विहिप संगठन मंत्री भोलेंद ने कहा कि अंगद त्तथा श्रीकृष्ण की तरह संत समाज भी इस धर्मसभा के जरिये लोगों को समझाना चाह रहे हैं कि मंदिर निर्माण पर हठधर्मिता न करें. धर्मसभा के बाद भी अगर मंदिर विरोधी हठधर्मी पर अड़े रहे तो उसके नतीजे गंभीर होंगे. उन्होंने इस धर्मसभा के बाद याचना अ विनती नहीं  की जायेगी बल्कि अंगद तथा श्रीकृष्ण का अनुसरण किया जाएगा, सीधे श्रीराम मंदिर निर्माण किया जाएगा. विहिप ने कांग्रेस अध्यक्ष  राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा तथा कि जनेऊ पहनकर और मानसरोवर की यात्रा से हिंदू बनकर तथा रामनामी दुपट्टा ओढ़कर मंदिर का विरोध करने वालों को यह अंतिम संदेश है. मंदिर निर्माण का विरोध छोड़ दें तो ही अच्छा है और अगर नहीं माने तो परिणाम भुगतने होंगे.

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