संसार के समस्त धार्मिकों को शौर्य के पावन पर्व #विजयदशमी की हार्दिक मंगलकामनाएं.. वो दिन जब प्रभु श्रीराम ने विधर्मी व पापी रावण का वध किया था

आज पूरा देश विजयदशमी के पावन पर्व को मना रहा है. लोग हर्षोल्लाश के साथ विधर्मी रावण पर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की विजय के दिन को पर्व के रूप में मना रहे हैं. विजयदशमी को दशहरा व आयुध पूजा(शस्त्र पूजन) के नाम से भी जाना जाता है. अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है. इस दिन भगवान राम ने विधर्मी रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त राक्षस महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी. इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है. इसीलिये इस दशमी को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है.

यह त्यौहार विधर्मी तथा पापी रावण पर भगवान श्री राम की विजय की कहानी तो कहता ही है जिन्होंने लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अंहकारी रावण का वध किया था वहीं इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दूर्गा की पूजा भी की जाती है. जब विधर्मी रावण ने प्रभु श्रीराम की पत्नी जगतजननी माँ सीता का अपहरण किया तो प्रभु श्रीराम ने अपने भाई श्री लक्ष्मण जी के साथ वानर सेना लेकर रावण की लंका पर चढ़ाई की तथा नारी जाति के सम्मान और मर्यादा की रक्षा के लिए भगवान राम ने रावण को युद्ध के लिए ललकारा.

इस दौरान विधर्मी रावण की सेना तथा प्रभु श्रीराम की वानर सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ. अंत में प्रभु श्रीराम तथा रावण के बीच 10 दिनों तक युद्ध हुआ. आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को भगवान राम ने मां दुर्गा से प्राप्त दिव्यास्त्र की सहायता से रावण का वध कर दिया. माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी मां दूर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था, भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया.

चूंकि श्री राम को राजीवनयन यानि कमल से नेत्रों वाला कहा जाता था इसलिये उन्होंनें अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का वरदान दिया। माना जाता है इसके पश्चात दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया. भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में देशभर में मनाया जाता है.

इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि). ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है. प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे. भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है. प्रत्येक व्यक्ति और समाज के रुधिर में वीरता का प्रादुर्भाव हो कारण से ही दशहरे का उत्सव मनाया जाता है. मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म का रक्षण किया था. भारतीय इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे.

इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं तथा रामलीला का आयोजन होता है. रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है. दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है. हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है. भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है. व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है. दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है.

आज अधर्म पर धर्म की विजय के पावन पर्व विजयदशमी की संसार के समस्त धार्मिकों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं देता है. साथ ही विजयदशमी के दिन सुदर्शन के बार पुनः संकल्प लेता है कि हम प्रभु श्रीराम के बताये गये मार्ग पर अनवरत चलते हुए आज भी विद्यमान रावण रूपी बुराईयों के अंत में अपना गिलहरी योगदान देते रहेंगे, धर्म रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करते रहेंगे.

जय श्रीराम..जय जय श्रीराम

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