पहली बार किसी पार्टी ने माँगी है “मस्जिदों की निगरानी” … लोकसभा चुनावों से ठीक पहले

लोकसभा चुनाव का मैदान सज चुका है. सत्ता तथा विपक्ष के योद्धा चुनावी दंगल में उतर चुके हैं तथा अपनी-2 जीत के लिए तमाम प्रयास करते हुए नजर आ रहे हैं. लेकिन इस बार के चुनावों में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी राजनैतिक दल ने चुनाव आयोग से मस्जिदों की निगरानी की मांग की है. आपको बता दें कि शनिवार को बीजेपी नेताओं ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर मांग की है कि मस्जिदों के लिए विशेष ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किए जाए. साथ ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विशेष रूप से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाए.

बीजेपी का मानना है कि इन स्थानों से राजनीतिक और धार्मिक नेता चुनावों को प्रभावित करने के लिए लोगों के बीच नफरत फैला सकते हैं. बीजेपी ने इसके लिए आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल और उनके अन्य नेताओं पर सीधा आरोप लगाया है. दिल्ली बीजेपी का आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के अन्य नेता धार्मिक और जातिगत आधार पर मतदाताओं को बांटने का प्रयास करेंगे. बीजेपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में लिखा है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता पहले भी ऐसा कर चुके हैं.

बीजेपी का आरोप है कि केजरीवाल द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक भावनाएं भड़काने के कई मामले सामने आए हैं. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल अपने ट्विटर हैंडल और जनसभाओं से लगातार अल्पसंख्यक समुदायों के बीच नफरत फैला रहे है. दिल्ली के बदरपुर में केजरीवाल ने मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को भड़काने वाला भाषण दिया था. वहीं, जामा मस्जिद के पास एक जनसभा में भी केजरीवाल ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर उकसाया था. इसके साथ ही बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के बयान को भी सामने रखा है. अमानतुल्लाह खान ने कहा था कि लोकसभा चुनाव 2019 में मुस्लिम समुदाय के लोग मतदान नहीं कर पाएंगे क्योंकि रमजान और चुनाव एक साथ पड़ रहे हैं.

बीजेपी ने कहा कि इन सभी बयानों से साफ होता है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का धुव्रीकरण करने के लिए ऐसा कर सकते हैं. बीजेपी ने कहा है कि आमतौर पर ऐसी सभाएं मस्जिदों के आसपास आयोजित की जाती हैं. यहां पर आए लोग आसानी से इन घृणा फैलाने वालों की बातों में आ जाते हैं. वहीं, रमजान के महीने में यह बढ़ सकता है.  बीजेपी ने मांग की है कि इस स्थिति से बचने के लिए मस्जिदों के लिए विशेष ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किए जाए. साथ ही मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में विशेष रूप से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाए. बीजेपी ने आरोप लगाया कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है और इसे रोकने के लिए चुनाव आयोग को हमारा सुझाव मानना चाहिए. देखना ये है कि चुनाव आयोग बीजेपी की इस मांग को मानता है या नहीं.

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