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आप पार्टी के संविधान से उपर हुए केजरीवाल ? दूसरों पर तानाशाही का आरोप लगाने वाले क्या आगामी बैठक छोड़ देंगे पद ?


आरोपों की राजनीति से चर्चा में आये अरविन्द केजरीवाल जहा अन्य पार्टियों पर परिवारवाद आदि का आरोप लगाया करते हैं वहीँ अब अपने लिए उन्होंने अपनी पार्टी तक के संविधान को बदलने की ठान ली है . कभी बदली राजनीति में देश और समाज को बदलने की बात कर के आने वाले अरविन्द केजरीवाल को कुर्सी और पद कितना प्यारा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो अपनी जगह अपनी ही पार्टी में किसी और को देखने तक को नहीं तैयार हैं .

विदित हो कि अपने ढल चुके कार्यकाल को फिर से ताजगी देने और पार्टी को अपने हाथ में लिए रहने के लिए तमाम जतन करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी में कुर्सी और रूतबा बचाने के लिए आम आदमी पार्टी संविधान बदलने की तैयारी में है। इसके लिए आने वाले शनिवार को बाकायदा राष्ट्रीय परिषद की बैठक आयोजित होने वाली है . आप पार्टी के संविधान में यह संशोधन  महज इसलिए किया जाएगा ताकि केजरीवाल के कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सके। पार्टी के मौजूदा नियम के मुताबिक एक ही पद पर किसी भी सदस्य को पार्टी पादाधिकारी के के रूप में तीन साल के लिए लगातार दो बार से अधिकार पार्टी प्रमुख नहीं बनाया जा सकता है। ऐ

यहाँ ये ध्यान रखना जरूरी है कि आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल पार्टी प्रमुख के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। पार्टी मुखिया के तौर पर अरविंद केजरीवाल का दूसरा कार्यकाल 2019 में पूरा हो रहा है। ये उनका दूसरा मौका है। क्योंकि पार्टी के मुखिया केजरीवाल को अप्रैल 2016 में तीन साल के लिए चुना गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी अपने संविधान को बदलने की तैयारी में जुटी हुई है हालांकि अब देखना है कि पहले से ही तमाम बागियों को झेल रही आप पार्टी के बाकी नेता इस संबंध में क्या राय देते और और संविधान में संशोधन हो पाता है या नहीं।

 


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