अब तक कांग्रेस मुक्त भारत का एलान था, अब एक सूबा ऐसी मुक्ति का एलान कर रहा जो खौफ है बाकी पार्टियों के लिए


2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी हर चुनावी रैली में कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे. अब मोदी जी लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बन चुके हैं तथा देश लगभग कांग्रेस मुक्त हो चुका है. 2019 लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस की हालत और ज्यादा ख़राब हो गई है तथा पार्टी अपना वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही है. ये तो बात भी कांग्रेस मुक्त भारत की लेकिन अब बीजेपी शासित एक राज्य ने कांग्रेस मुक्त भारत के बाद एक और मुक्ति का एलान कर दिया है.

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मामला योगी आदित्यनाथ शासित उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ है. खबर के मुताबिक़, लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब बीजेपी और आक्रामक नज़र आ रही है. वो प्रदेश को पूरी तरह विपक्षविहीन करना चाहती है. अमेठी और कन्नौज पर कब्जा जमाने के बाद अब पार्टी की निगाह प्रदेश की दो अन्य हाइप्रोफाइल सीटों (रायबरेली और मैनपुरी) पर है. यही कारण है कि अब सोनिया गांधी को रायबरेली और मुलायम को मैनपुरी में घेरने का प्लान बीजेपी ने बना लिया है. इसकी जिम्मेदारी प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा को दी गई है.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलों के प्रभारी मंत्री की तैनाती में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को कानपुर नगर के साथ ही मैनपुरी की जिम्मेदारी भी सौंपी है. इसकी वजह वहां की जातीय गणित मानी जा रही है. दरअसल मैनपुरी में शाक्य, सैनी और कुशवाहा के अलावा पिछड़ों की संख्या भारी है. सपा के गढ़ में भाजपा का परचम फहराने के लिए जहां केशव पर दारोमदार है, वहीं दूसरी तरफ उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का आगरा जिला बहाल रखते हुए उन्हें रायबरेली का भी प्रभार सौंपा गया है.

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हालांकि ये आवंटन जिला योजना समिति की अध्यक्षता के लिए मंत्रियों को किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इससे सियासी समीकरण भी सधेगा. इस बार विकास के एजेंडे के साथ ही जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी साधे गए हैं. कद के हिसाब से भी जिम्मेदारी दी गई है. सियासी समीकरण साधने के साथ-साथ जातीय गणित भी साधने का काम इसके जरिये बीजेपी कर रही है. इस दांव से परेशान विपक्ष मान रहा है कि बीजेपी चाहती है कि देश से विपक्ष पूरी तरह खत्म हो जाए. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी कहते हैं कि उसी के चलते महत्वपूर्ण सीटों पर भी बीजेपी लगातार ऐसी योजना बनाकर काम कर रही है.

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जिस तरह से बीजेपी ने बड़े नेताओं की घेराबंदी की है उसने एक बार फिर से विपक्ष परेशान हो गया क्योंकि जिस तरह बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी और डिंपल यादव को हराया उससे अब विपक्ष बीजेपी की रणनीति को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. अब बीजेपी की ये घेराबंदी काम करेगी या नही इसका पता लगने में तो काफी वक्त है लेकिन फिलहाल विपक्ष की नींद तो एक बार उड़ ही गई है. योगी आदित्यनाथ ने साफ़ कर दिया है कि अभी इतनी सफलता से रुकना नहीं है बल्कि यूपी में जिस भी क्षेत्र में बीजेपी नहीं है, आने वाले समय में वहां कमल खिलाना है.

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