क्या छोड़ दिया इन दलों ने कांग्रेस का साथ ? राष्ट्रपति चुनाव से पहले GST मीटिंग में ये दल खड़े हैं मोदी के साथ जो कांग्रेस की बन चुके थे रीढ़


गज़ब उठापटक मची है राष्ट्रपति चुनाव के लिए जहाँ एक तरफ हर पार्टी अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रही है वहीँ देश की एकता और अखंडता का दावा करने वाले तमाम संगठन अपने ही समूह को एक नहीं कर के चल पा रहे हैं . इस बार राष्ट्रपति चुनावों से पहले एक प्रयोग किया था भाजपा ने जिसमे कांग्रेस के अंदर की खींचतान सामने आ गयी है और उसमे पड़ रही दरार भी सार्वजनिक हो गयी है . 

ताजा मामला है GST के पक्ष में आम सहमति बनाने के लिए बुलाई गई भाजपा सरकार की मीटिंग और जश्न की पार्टी का है जिसने विपक्षी दल कांग्रेस ने खुला बहिष्कार करने की बात कही थी . इस मामले में कांग्रेस ने विपक्षी घटकों का आह्वान किया था की वो इस मीटिंग का बहिष्कार करते हुए GST को मोदी सरकार की एक बड़ी गलती के रूप में दुनिया के आगे लाएं पर अचानक ही कांग्रेस को सारा पासा ही पलटा नजर आ रहा है . 



कांग्रेस के इस बहिष्कार आह्वान के बाद भी मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी , शरद पवार की NCP व् नीतीश कुमार की JDU भी शामिल होंगे . ये सब अब कांग्रेस का ही विरोध कर रहे हैं जिसके पास अब केवल फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भर दिखाई दे रही है बाकी लगभग सभी पार्टियों ने या तो भाजपा के साथ जाने का फैसला कर लिया है या तो अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं . JDU , NCP और समाजवादी पार्टी का अपने से अलग होना कांग्रेस के लिए बेहद पीड़ा का विषय हो सकता है क्योंकि वो इसे राष्ट्रपति पद के सेमीफाइनल के गौर पर देख रही थी ….


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