कांग्रेस और कमलनाथ के मंत्री के खिलाफ उठी आवाज.. वो भी दिग्विजय सिंह के घर से

गत चुनावो में जहां दिग्विजय सिंह को कांग्रेस के हाईकमान ने हाशिये पर डाल दिया था तो वहीं उनकी ही छवि के चलते उनके भाई को भी कमलनाथ के मंत्रिमंडल में उचित स्थान व सम्मान नही मिला.. भले ही दिग्विजय इस अपमान के कड़वे घूंट को पी कर खामोश बैठे हों लेकिन उनके ही घर से इसके विरोध में उठी गयी है बगावत की आवाज और वो आवाज है उनके ही भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी की.. ये हाल ठीक वैसा ही हो रहा है जैसा कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में उनकी बहू अपर्णा यादव का है जो मोदी विरोधी परिवार में मोदी का खुला समर्थन करते हुए मुलायम के द्वारा बनाये गए सिद्धांत को चुनौती दे रही हैं ..यद्द्पि यहां पर मोदी की तारीफ न कर के कमलनाथ की उस टीम पर सवाल उठाए गए हैं जो एक संदेश तक पढ़ने में असहजता महसूस कर रही थी..लेकिन अंतिम किरकिरी कांग्रेस की ही हुई है ..

मध्य प्रदेश में नई सरकार के पहले गणतंत्र दिवस पर कांग्रेस की जमकर किरकिरी हो गई।  महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री का हिंदी में लिखा संदेश नहीं पढ़ पाई जिसे लेकर देश भर में सरकार को शर्मिंदा होना पड़ रहा है। वहीं, अब पार्टी के अंदर से ही मुख्यमंत्री कमलनाथ की टीम पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कांग्रेस विधायक और दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी रुबीना सिंह ने मंत्री के चयन पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर मंत्री इमरती देवी का वीडियो शेयर करते हुए सीएम कमलनाथ के मंत्री चयल पर सवाल खड़े करते हुए लिखा है कि, ‘ हमारे माननीय मंत्री मुख्यमंत्री के संदेश को पढ़ने में दिक्कत का सामना करना पढ़ रहा है जिसे किसी ओर ने पढ़ा। ये कितना शर्मनाक है!  मुख्यमंत्री जी क्या यही आपके द्वारा चुने गए मंत्री की विशेषता है।’

हालांकि पूरा संदेश न पढ़ पाने को लेकर इमरती देवी से बात की गई तो उन्होने कहा, ‘दो दिन से मेरी तबीयत खराब है, आप जाकर गुलाटी डॉक्टर से पूछिए.’ जब इमरती देवी से सवाल किया गया कि 4 लाइन जो आपने पढ़ी है उसमें भी उच्चारण की 8 गलतियां हैं, तो इमरती देवी ने जवाब दिया, ‘चलो हो जाती है कभी-कभी.. कलेक्टर साहब ने तो सही पढ़ दिया.’

दरअसल, मंत्री मंडल के चयन से पहले इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह को भी मंत्री बनाया जा सकता था। लेकिन क्षत्रपों के आपसी झगड़ों में मंत्री पद की बंदरबांट हुई। जिसके बाद पार्टी में खुलकर विरोध भी देखने को मिला था। पिछोर से छह बार के विधायक केपी सिंह को भी मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया गया। वह जबसे लगातार नाराज हैं और उन्होंने सीएम की बैठक में भी शिकतर नहीं की थी। वहीं, राघौगढ़ में भी लक्ष्मण सिंह के समर्थकों ने जमकर हंगामा किया था। बाद में सबको मनाकर लोकसभा चुनाव तक के लिए शांत रहने के लिए कह दिया गया। अब मौका मिलते ही लक्ष्मण सिंह की पत्नी ने कमलनाथ सरकार पर हमला किया है। उन्होंने उनके पति को दरकिनार  करने और जो संदेश नहीं पढ़ पा रहे उनको लेकर तंज कसा है। यद्द्पि कांग्रेस के कद्दावर नेता के परिवार की इन सम्मानित सदस्या का ट्वीटर एकाउंट वेरिफाइड नही है लेकिन इस पर भी अब तक उनकी तरफ से कोई सफाई नही आई है कि उन्होंने ये ट्वीट नही किया , जिस से ये आरोप सही माने जा रहे हैं ..

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