अब असम पंचायत चुनावों में भाजपा व कांग्रेस में जबर्दस्त टक्कर.. बंगलादेशियों की बेतहाशा बढ़ती आबादी बन रही मुसीबत

अभी मध्यप्रदेश, राजस्थान , छत्तीसगढ़ के चुनावों का शोर थम नही पाया है कि असम में एक नए चुनावो की गिनती राष्ट्रीय चर्चा बन गया है .. तेजी से बढ़ रही बंगलदेशियो कि आबादी, उनके वोटर कार्ड व बंगलदेशियो के खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही न कर पाने का खमियाजा यहां भी भारतीय जनता पार्टी को उठाना पड़ रहा है .. भले ही यहां आरंभिक परिणामो में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है पर कांग्रेस यहां भी कड़ी टक्कर देती हुई दिख रही है जो भाजपा के लिए किसी खतरे की बड़ी घण्टी से कम नहीं मानी जा सकती है..

असम पंचायत चुनाव 2018 के लिए वोटों की गिनती शुरू हो गई है. यहां 26 जिलों के 420 बूथों पर कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. राज्य में दो चरणों में मतदान हुए थे, पहले चरण के मतदान 5 दिसंबर को हुए थे जिसमें कुल 97,45,709 वोटरों ने 43,515 उम्मीदवारों के लिए मतदान किया था. वहीं दूसरे चरण के मतदान 9 दिसंबर को हुए.

इन चुनावों में 78,571 से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं. दो चरणों में संपन्न हुए चुनावों में 80 फीसदी से अधिक मतदान हुए हैं. यहां भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है. बीते दिनों जिस प्रकार राज्य में NRC का मुद्दा हावी रहा, ऐसे में इस चुनाव तो बीजेपी सरकार के लिए लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है.

पहले चरण की गिनती के रुझानों के अनुसार सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 21909 सीटों में से 481 ग्राम पंचायत सदस्य सीटें जीतकर चार स्तरीय पंचायत चुनावों में आगे है. बीजेपी ने 2199 सीटों में से 6 अांचलिक पंचायत सदस्य (एपीएम) सीटें और 2199 सीटों में से 2 ग्राम पंचायत अध्यक्ष (जीपीपी) सीटें भी जीत ली हैं.

वहीं कांग्रेस ने अब तक 248 ग्राम पंचायत सदस्य सीटें जीती हैं, असम गण परिषद (एजीपी) ने 62 , एआईयूडीएफ ने 11 और अन्य ने 129 सीटें जीत ली हैं. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी 420 में 36 जिला परिषद सदस्य (जेडपीएम) सीटों पर बीजेपी आगे है, 36 पर कांग्रेस आगे है, 9 पर एजीपी और 1 पर अन्य आगे है.

 

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