उपचुनाव में कैराना में हारी भाजपा के फिर से प्रचंड मतों से जीतने के पीछे एक ऐसी भी वजह, जिसका नहीं है राजनीति से कोई संबंध


उत्तर प्रदेश की कैराना सीट.. भले ही ये इलाका शहरी चकाचौंध से दूर हो लेकिन इसकी चर्चा दिल्ली के गलियारों से ले कर बंगाल के बार्डर तक रहती है .. कुछ समय पहले , खास कर योगी सरकार से पहले इसका नाम तो विश्व स्तर पर गूंजा था , जब कहा गया था कि यहाँ से कुछ आपराधिक तत्वों की हरकतों से पलायन तक हुआ है.. यहाँ सत्ता की बागडोर एक लम्बे समय तक भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हुकुम सिंह के हाथो में रही है .. आबादी के हिसाब से ये मिश्रित आबादी का क्षेत्र है जिसमे सभी धर्म और मजहब शामिल हैं .

इस जिले में पिछले लोकसभा उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी की मृगंका सिंह को बुरी तरह से हार का सामना करना पडा था. भाजपा के लिए वो हार किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी क्योंकि हालात यहाँ तक बने थे कि हुकुम सिंह के देहांत के बाद उनकी बेटी की जीत वहां से तय मानी जा रही थी .. लेकिन अंत में तबस्सुम हसन ने उनको हरा कर न सिर्फ इतिहास रचा बल्कि अमित शाह जैसे कद्दावर नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया .

कैराना उपचुनाव में भाजपा की हार की चर्चा कई राज्यों में सरकार जाने से ज्यादा हुआ था ..फिलहाल यहाँ पर तबस्सुम हसन ऐसी नेत्री के रूप में उभरी थीं जिनके आगे इस लोकसभा चुनावों में भी योग्य प्रत्याशी खड़ा करते हुए भाजपा बहुत सतर्क थी.. आख़िरकार कैराना में तमाम प्रयासों के बाद भाजपा की फिर से जीत हुयी और एक बार फिर से वहां पर कमल खिला . निश्चित रूप से इसके लिए भाजपा के प्रादेशिक और केन्द्रीय दोनों कमानों ने पूरी मेहनत की होगी लेकिन एक और बड़ा कारक है भाजपा की इस प्रचंड जीत के पीछे जिसका राजनीति से कहीं दूर दूर तक कोई भी वास्ता नहीं है..

सुदर्शन न्यूज की टीम कैराना संसदीय क्षेत्र में लोकसभा चुनावों के बाद ये जांचने और परखने पहुची कि आखिर क्या वजह थी इस आमूलचूल परिवर्तन की.. जनता ही जनार्दन थी तब के चुनाव में और इस बार भी. बिना किसी राजनेता से मिले , बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी के पास गये हमने जनता से ही जानना चाहा भाजपा के जीत की असल वजह. पहले तो हम सडक , नहर , नाली आदि पर नजर दौडाए तो पाया कि वो सब ठीक उसी हालात में थे जैसे पिछले चुनावों में थे ..

कैराना की जनता से अलग अलग क्षेत्रो में जब करीब से बात की गई तो पाया कि वहां पर केंद्र सरकार से ज्यादा असर प्रदेश सरकार के नियमो और नीतियों का है.. योगी सरकार में शामली और खास कर कैराना संसदीय क्षेत्र में जिस बात की सबसे ज्यादा चुनौती थी वो थी कानून व्यवस्था.. कहीं की भी कानून व्यवस्था का सीधा संबंध पुलिस प्रशासन से होता है और वर्तमान समय में वो है शामली के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार के हाथो में..

कैराना लोकसभा के हर क्षेत्र में बाकायदा भ्रमण कर के सुदर्शन न्यूज की टीम को सरकार के जिस पक्ष की सबसे ज्यादा तारीफ सुनने को मिली वो था पुलिस विभाग.. हमसे सम्पर्क हुए लगभग हर व्यक्ति ने सडको में गड्ढा, पतली गलियों में जाम , रेलवे की अच्छी ट्रेनों के ठहराव , ओवरब्रिज आदि के मुद्दे पर अपनी शिकायत दर्ज करवाई .. कुछ ने फसलों के भुगतान और सिंचाई आदि की समस्या को सामने रखा लेकिन जब उनसे कानून व्यवस्था पर सवाल किया गया तो उन्होंने एक स्वर में बोला कि – ‘उसमे कोई दिक्कत नहीं” ..

इस पूरे मामले को जब और गहराई से परखा गया तो लोगों ने बताया कि वर्तमान समय में शास्त्रों में वर्णित “परित्राणाय साधूना, विनाशाय च दुष्कृतम” का सिद्धांत शामली में है.. कईयों ने बताया कि पुलिस के समय से पहुचने में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला, कुछ ने बताया कि उनके पुलिस से जुड़े वो काम भी निशुल्क हुए जो उन्होंने मान लिए थे कि वो बिना पैसे के होते ही नहीं है.. तमाम गाँवो के कई प्रतिनिधियों ने तो अपना सीधा संवाद पुलिस अधीक्षक से होने की बात कही.. कई के मोबाईल में तो सीधे पुलिस अधीक्षक के नम्बर मिले जिन पर लगातार हाल चाल लेने के लिए संवाद के प्रमाण भी थे ..

आखिरकार सारांश में ये पाया गया कि वर्तमान समय में जनता का सीधा संवाद पुलिस से कई स्तरों पर है.. जिन अधिकारियो से बात करने में एक आम नागरिक डरा करता था अब वही अधिकारी खुद उस से उसके इलाके का हालचाल ले रहे हैं .. पुलिस की सख्ती आपरेशन क्रैकडाऊन में देखने को मिली जहाँ शराब और नशीले द्रव्यों का अवैध कारोबार करने वाले कई लोग गिरफ्तार हुए . इसके चलते न सिर्फ परिवारों में शांति आई बल्कि वो तमाम झगड़े बंद हुए जो नशे में बेवजह हो जाया करते थे .

खुद सुदर्शन न्यूज की टीम ने जगह जगह पुलिस की गश्त करती हुई गाड़ियाँ और अपने नियत स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मी मुस्तैद हालत में देखे.. हमने बिना खुद के पत्रकार होने का परिचय दिए कई जगहों पर पुलिस से रास्ता जानने, पर्स गायब होने जैसी आम शिकायतें की जिस पर पुलिस ने बेहद सहयोगात्मक रवैया दिखाया.. कुल मिला कर टीम सुदर्शन को कहीं से भी नहीं लगा कि हम वर्तमान समय में उस कैराना क्षेत्र में हैं जहाँ कभी पलायन आदि की खबरों ने देश को हिला कर रख दिया था.

शामली के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार को निश्चित रूप से इस आमूलचूल बदलाव का क्रेडिट जाता है जिनके नेतृत्व में पुलिस मित्र की संकल्पना निश्चित तौर पर साकार होती दिखाई दी .. कानून व्यवस्था का असर कई बार न किसी विधान सभा या लोकसभा की सीट ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की और कभी कभी तो देश की सत्ता को बदल कर रख देता है .. निश्चित तौर पर कैराना की जीत में जितना योगदान भाजपा के नेताओं की मेहनत और रणनीति का होगा उतना ही योगदान योगी सरकार के अधीनस्थ आने वाली शामली पुलिस के वर्तमान स्वरूप का भी है जिसने योगीराज के स्वप्न रामराज्य को जिले में साकार कर के दिखाया है..


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share