“दलित, ब्राह्मण, यादव मुस्लिम भाईचारा” का नारा उन्होंने दिया जो बार बार प्रयोग करते हैं “मनुवादी” और “मूल निवासी” जैसे शब्द

चुनाव का मौसम और वोट की चाहत आखिर क्या क्या नहीं बदल देती है . आचार , विचार और यहाँ तक कि सिद्धांत भी .. भले ही चुनाव आयोग ने साफ़ साफ़ कहा है कि कोई भी मत मजहब या जाति के आधार पर वोट नहीं मांगेगा लेकिन उसके बाद भी जातिवादी नारे दिए जा रहे हैं . हद तो ये है कि अभी कुछ समय पहले ही सवर्ण हिन्दुओ के खिलाफ एक प्रकार से मोर्चा खोल देने वाली पार्टी ने ब्राह्मणों के भी वोटों की इच्छा जाहिर कर डाली है .

ज्ञात हो कि ये नारा है बहुजन समाज पार्टी का जो इस बार समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी मैदान में है . गठबंधन के चलते इस बार मुस्लिम और यादव के साथ दलित भी जोड़े जा रहे हैं लेकिन इसमें सबसे हैरानी की बात है ब्राह्मणों का नाम लेना . बहुजन समाज पार्टी के लिए ये चुनाव करो या मरो के हालात के साथ है जो पिछले लोकसभा चुनावों के साथ साथ निवर्तमान विधानसभा चुनावों के झटको से उबरने की कोशिश कर रही है .

लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही  बीएसपी भी बीजेपी को पटखनी देने के लिए तैयारी कर रही है. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बीएसपी ने पहली बार वॉर रूम तैयार किया है, जहां से हर सवाल का जवाब दिया जाएगा. इसके साथ ही बीएसपी ने नया चुनावी नारा भी दिया है. ‘दलित, ब्राह्मण, यादव मुस्लिम का भाईचारा, इनके आगे हर कोई हारा‘.जानकारी के मुताबिक, लखनऊ स्थित मायावती के माल एवेन्यू स्थित आवास को लोकसभा चुनाव के लिए बसपा केंद्रीय कैंप कार्यालय के रूप में तैयार किया जा रहा है.

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