अयोध्या के बगल अम्बेडकरनगर लोकसभा की 2014 में जीती सीट भाजपा इस बार हारी.. हार की सबसे बड़ी वजह है चरमपंथ से लड़ कर बलिदान हुए दिवंगत रामबाबू के बलिदान को भुलाना

जिस समय भारतीय जनता पार्टी वर्ष २०१९ के चुनावों में प्रचंड जीत के साथ कांग्रेस के कई अजेय किले ध्वस्त कर रही थी वहीँ ठीक उसी समय भारतीय जनता पार्टी का भी एक ऐसा किला ध्वस्त हुआ जो पिछले चुनावों में उनका हुआ करता था . ये किला था अम्बेडकरनगर जनपद का जिसको पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के डाक्टर हरिओम पाण्डेय ने भाजपा की झोली में डाला था लेकिन इस बार वहाँ से भाजपा को करारी शिकस्त अखिलेश और मायावती गठबंधन प्रत्याशी ने दी है .

नरेंद्र मोदी जी के द्वारा दिया गया सबका विश्वास जीतने का नारा भले ही राजनैतिक गलियारों में गूँज रहा हो लेकिन अम्बेडकरनगर में ये निष्प्रभावी रहा क्योकि यहाँ पर कईयों का विश्वास एक हृदयविराद्क घटना से टूटा था.. पिछले वर्ष २०१४ के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की अम्बेडकरनगर लोकसभा सीट पर जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण था हिन्दुओ की एकता जिसमे जाति आदि का हर फैक्टर विपक्ष द्वारा हर कोशिश के बाद भी पूरी तरह से निष्प्रभावी रहा था .. उसके पीछे थी एक बड़ी वजह और वो वजह थी रामबाबू गुप्ता का बलिदान .

रामबाबू गुप्ता,  जो २०१३ में केवल धर्म और हिन्दू आदि के नाम लेने के चलते मार दिए गये थे और इसको सुनियोजित तरीके से दबाया गया . रामबाबू गुप्ता तत्कालीन योगी आदित्यनाथ के समूह हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी थे .. उनकी बातचीत योगी आदित्यनाथ से अच्छे से थी . रामबाबू गुप्ता के परिजों के अनुसार उनको तत्कालीन समाजवादी पार्टी का विधायक अजीमुल हक किसी भी हाल में और किसी भी रूप में पसंद नहीं करता था . उस समय समाजवादी पार्टी के विधायक की हैसियत क्या थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रामबाबू के परिजनों के चीखते रहने और दिल्ली तक की चौखट पर मत्था टेकने के बाद भी किसी भी पुलिस वाले में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो एक दिन के लिए अजीमुल हक को बुला कर पूछताछ ही कर लेता .

यद्दपि समाजवादी पार्टी की सरकार में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी , प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े बड़े वादे किये थे पर अब उनकी सरकार में आने एक बाद उस परिवार की उसी अंदाज़ में प्रताड़ना हो रही है लेकिन इस बार पुलिस के द्वारा जो अजीमुल हक को एक बार सवाल जवाब के लिए बुला नहीं पाई थी .  उस समय रामबाबू गुप्ता केस एक एकलौते गवाह राममोहन गुप्ता को भी उनकी दुकान में घुस कर मार डाला गया था.. इस हत्याकांड में अपने मृत परिजन की लाश पर रो रही और चीख चीत्कार करती महिअलो पर पत्थर बरसे थे .. उनके घर वालों पर लाश को घर के गेट पर रखने के मुकदमे दर्ज कर लिए गये थे .. मृत गवाह राममोहन की लाश को पुलिस वालों ने टांग पकड कर घसीटा भी था और सब चुपचाप देखा जाता रहा क्योकि मामला उनके हिसाब से तथाकथित धर्मनिरपेक्षता को ज़िंदा रखने का था भले ही रामबाबू और राममोहन मृत हो चुके थे ..

रामबाबू गुप्ता हत्याकांड और राममोहन हत्याकांड में असल दोषी अब तक उस कानून की पहुच से दूर हैं जो आज उसी रामबाबू के परिवार वालों के आगे शेर बने घूम रहे हैं . योगी के प्रदेश में और मोदी के केंद्र में होने के बाद भी अगर किसी को जमीनी हकीकत देखनी है तो वो टांडा अम्बेडकरनगर में जा कर देख सकता है जहाँ अभी भी रह रह कर चीखें और कराह सुनाई देती है.. टांडा में हिन्दू युवा वाहिनी के दिवंगत कार्यकर्ता रामबाबू गुप्ता की धर्मपत्नी संजू देवी अपने पति के ही हत्यारोपी सपा विधायक अजीमुल हक के खिलाफ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं।

2013 में पति की हत्या के बाद घोर प्रताड़ना झेलते हुए अपने धैर्य को संजू देवी ने बिलकुल नहीं डगमगाने दिया। उस धैर्य व् आत्मबल का सुखद अंत आज तब हुआ जब अपने ही पति के हत्यारोपी व् पूर्व सपा विधायक अजीमुल हक को हारते हुए संजू देवी टांडा, आंबेडकर नगर क्षेत्र की विधायक चुनी गयीं थी.. विधायक चुने जाने के बाद उन्हें लगा कि वो अपने पति की हत्या में असल हत्यारों को सजा दिलाने में कामयाब होंगी लेकिन नए नारे सबका विश्वास में शायद उनके उस पति के हत्यारों का भी विश्वास आता है जिसको केवल जय श्रीराम कहने के अपराध में दरिंदगी दिखा कर मार डाला गया था .
आज विधायक बन जाने के बाद भी संजू देवी अपने पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए दर दर भटक रही हैं और उनके अनुसार उनके पति का हत्यारा अजीमुल हक उसी क्षेत्र में अट्टहास कर रहा है. टांडा क्षेत्र की जनता ने अपनी हैसियत से बढ़ चढ़ कर मदद की थी संजू देवी की , वहां मुस्लिम आबादी ज्यादा होने और हिन्दू बंटा होने के चलते कभी कमल नहीं खिला था . यहाँ तक कि श्रीराम मन्दिर के लहर में भी . पर रामबाबू के बलिदान ने वहां पर कमल खिलाया .. आम जनता ने संजू देवी को विजयश्री केवल इसलिए दी जिस से वो उस हत्यारे को कानून का सबक सिखा सकें जिसने क्षेत्र में एकमात्र हिन्दुओं की आवाज को खामोश कर दिया था..
यही अम्बेडकरनगर था और यही वो पुलिस थी जब मुस्लिम बहुल इलाके टांडा में हिन्दुओ की एकमात्र आवाज उठाने वाले रामबाबू गुप्ता को गोलियों से छलनी कर दिया गया था . वो समय था समाजवादी पार्टी के शासन का और शासक थे अखिलेश यादव . जय श्री राम , हिन्दू , हिंदुत्व की आवाज में उस समय उत्तर प्रदेश की आवाज थे योगी आदित्यनाथ जो आज मुख्यमंत्री है और रामबाबू गुप्ता उनके ही संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के टांडा क्षेत्र के प्रमुख थे . उनको लगातार धमकियां आदि मिल रही थी मौत की लेकिन ऊपर भगवान और नीचे योगी आदित्यनाथ जी को देख कर उनको जो मनोबल मिल रहा था उसके सहारे ही वो आगे बढ़ रहे थे .
इस बार के चुनावो में भाजपा की जीती हुई अम्बेडकरनगर सीट की हार के पीछे वो आक्रोश है जो रामबाबू की हत्या के बाद उठा था . इस हार के पीछे वजह है उस विश्वास के टूटने की जो अम्बेडकरनगर की जनता ने एक हत्यारे के खिलाफ कार्यवाही की आश के रूप में बाँध रखी थी .. छोटे छोटे मामलों में जहाँ CBI जांच हो जाया करती है पर आज तक विधायक होने के बाद भी इस परिवार के प्रार्थना पत्र डस्टबिन में डाल दिए गये इनकी ही पार्टी के उच्चाधिकारियों के द्वारा.. सवाल ये है कि क्या इस हार के बाद भारतीय जनता पार्टी क्या उस न्याय की तरफ कदम बढ़ाएगी जिसका रिश्ता केवल गुप्ता परिवार से नहीं बल्कि आंबेडकरनगर की जनता से भी है ?
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