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राज्यसभा को मिला नया उपसभापति… हर कोशिश की कांग्रेस ने लेकिन फैसला आया कुछ और

भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा को नया उपसभापति मिल गया है. राज्यसभा में उपसभापति के लिए मुकाबला भाजपा नीत NDA प्रत्याशी हरिवंश सिंह तथा कांग्रेस नीत UPA के प्रत्याशी हरुप्रसाद के बीच था. चूँकि राज्यसभा में NDA के पास बहुमत नहीं है इसलिए कांग्रेस ने NDA प्रत्याशी को हारने के लिए तमाम प्रयास किये लेकिन अंतिम परिणाम कुछ और ही आया तथा JDU नेता तथा NDA प्रत्याशी हरिवंश सिंह ने राज्यसभा उपसभापति का चुनाव जीत लिया है.

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए सुबह 11 बजेे के बाद हुई तथा वोटिंग में एनडीए के हरिवंश नारायण सिंह उपसभापति पद के लिए चुने गए. पहले वोटिंग के दौरान कुल 206 वोट पड़े. जिसमें एनडीए के हरिवंश के पक्ष में 115 वोट डाले गए. हालांकि इस दौरान 2 सदस्‍य अनुपस्थित रहे, यानि उन्‍होंने वोट नहीं डाला. लेकिन विपक्ष के कुछ सदस्‍यों की तरफ से आपत्ति आने के बाद उन्‍हें स्लिप के जरिये वोट डालने दिया गया. इसके बाद दोबारा हुई वोटिंग में कुल 222 वोट पड़े. इनमें एनडीए के हरिवंश को 125, जबकि यूपीए के बीके हरिप्रसाद को 105 वोट मिले. इसके बाद एनडीए के हरिवंश को उपसभापति पद के लिए चुने जाने की घोषणा सभापति द्वारा की गई. हरिवंश नारायण सिंह के उपसभापति चुने जाने के बाद कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने उन्‍हें बधाई देते हुए कहा, चुने जाने के बाद हरिवंश कुछ दलों के ही नहीं, पूरे सदन के डिप्‍टी चेयरमैन हैं. मेरा हमेशा मानना है कि डिप्‍टी चेयरमैन का झुकाव विपक्ष की तरफ ज्‍यादा होना चाहिए.

गुलाम नबी आजाद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में अपने संबोधन में कहा कि हमारे लिए खुशी की बात है कि स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बाद अरुण जेटली जी भी हमारे बीच सदन में मौजूद हैं. अगस्‍त क्रांति में बलिया की बड़ी भूमिका थी. हरिवंश जी आज भी अपने गांव से जुड़े हुए हैं. हरिवंश जी को आरबीआई ने भी पसंद किया. हरिवंश उस कलम के धनी हैं, जिसने अपनी अलग पहचान बनाई. हरिवंश जी एक ऐसा व्‍यक्तित्‍व हैं, जिन्‍होंने किताबें पढ़ीं भी बहुत और लिखी भी बहुत. एक सांसद के रूप में आपने सफल कार्यकाल का अनुभव सदन को कराया है. मुझे विश्‍वास है कि अब सदन का मंत्र बन जाएगा ‘हरिकृपा’. अब सबकुछ हरि भरोसे है. उम्‍मीद है सांसदों पर हरिकृपा बनी रहेगी. राज्यसभा उपसभापति चुनाव एक तरह से विपक्षी एकता के लिए एक परिक्षा की तरह तथा जिसमें विपक्ष असफल होता नजर आया है तथा बहुमत से काफी कम आंकड़े के बाद भी NDA प्रत्यशी को विजयश्री हासिल हुई है. पहले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में विपक्ष की करारी हार तथा अब राज्यसभा में उपसभापति चुनाव में विपक्ष की हार के बाद ये साफ़ है विपक्ष एक नहीं है तथा कांग्रेस के पास भाजपा की रणनीति का तोड़ फिलहाल तो नजर नहीं आ रहा है.

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