सवर्णों के वोट के लिए ताल ठोंक रहे राजा भैया ने तब क्या किया था जब सब इंस्पेक्टर “शैलेन्द्र सिंह” की क्षत्राणी पत्नी ने अपने सुहाग के लिए मांगी थी उनसे मदद ?

वर्तमान समय में चल रहा चुनाव भविष्य के भारत की दिशा और दशा तय करेगा .. इसमें लगभग हर पार्टी ने अपने अपने इरादे और आने वाली नीतियों को पहले से ही जाहिर कर दिया है . किसी पार्टी ने अपना एजेंडा हिन्दू और हिंदुत्व को बनाया है तो किसी पार्टी के ऊपर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं . किसी पार्टी ने पिछड़े और दलितों आदि के विषय को मैदान में रखा है तो किसी पार्टी ने गरीबी , भ्रष्टाचार आदि मामले को मुख्य रूप से आगे रखा है ..

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लेकिन इसी चुनावी घमासान में एक पार्टी ऐसी भी है जो राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण कर रही है एकदम नए मुद्दे के साथ . ये पार्टी है उत्तर प्रदेश के सबसे कद्दावर नामो में से एक प्रतापगढ़ के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया के नेतृत्व में बनी जनसत्ता दल ( लोकतान्त्रिक ).. इस पार्टी ने एक बड़ी रैली कर के विरोधियो के खेमे में अपनी हलचल वैसे भी मचा दी थी और ऐसा लग भी रहा था कि इस पार्टी में कम से कम इतना दम तो जरूर है कि वो बड़े नेताओं के समीकरण जरूर बिगाड़ सकती है .

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इस पार्टी ने रघुराज प्रताप सिंह के नेतृत्व में मुख्य रूप से सवर्ण हिन्दुओ को लुभाने की कोशिश की . आरक्षण आदि के मामले में मुखर आवाज रखने के साथ ही इस पार्टी ने नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बहुचर्चित SC ST एक्ट के संसोधित प्रावधानों का भी व्यापक विरोध किया था और कहना गलत नहीं होगा कि बाद में उसी तमाम कारणों से भारतीय जनता पार्टी को छत्तीसगढ़ , मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे सवर्ण हिन्दुओ के वोटो के बहुलता वाले प्रदेशो में हार का सामना करना पड़ा था .

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उत्तर भारत के तमाम NOTA के अभियान से जुड़े सवर्ण हिन्दुओं ने इस पार्टी में अपना भविष्य तलाशना शुरू कर दिया था . यद्दपि राजा भैया की छवि क्षत्रिय समाज में बहुत ज्यादा शसक्त है लेकिन ब्राह्मण आदि भी इनके साथ काफी हद तक जुड़ने शुरू हो गये थे .. लेकिन एक ऐसी घटना हुई थी भूतकाल में जो आज भी यथावत है, उसके बाद कुछ अनुमान लगाना आसान हो जाएगा कि सवर्ण हिन्दू वोटों के लिए ताल ठोंक रही इस पार्टी और उसके मुखिया को सच में सवर्ण हिन्दुओ से कितना स्नेह है .

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ये बात है लगभग 4 वर्ष पहले की जब राजा भैया अखिलेश यादव की सरकार में कद्दावर मंत्री हुआ करते थे . उनका एक अलग स्थान और अलग रुतबा हुआ करता था जिसके आगे सभी फीके रहते थे .. उसी समय प्रयागराज जिले की कचेहरी में नबी अहमद नाम के एक व्यक्ति ने जांबाज़ पुलिसकर्मियों में गिने जाने वाले सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के साथ अपने कई साथियों संग मोब लिंचिंग करने की कोशिश की थी. सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के ऊपर आरोप है कि उसने आत्मरक्षा के लिए नबी अहमद पर गोली चलाई और नबी अहमद मारा गया ..

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इस पूरी घटना के वीडियो भी हैं जिसमे नबी अहमद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र को पीटता दिखाई दे रहा और शैलेन्द्र सिंह बार बार नबी को रोकता हुआ भी .. फिलहाल इस घटना के बाद नबी अहमद के साथ पूरी समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार उतर आई , शैलेन्द्र सिंह अकेला रहा गया जिसका साथ देने वाला कोई भी नहीं रहा . उसकी जिन्दगी ऐसे बर्बाद हो रही थी जैसे ताश के पत्ते का बना हुआ घर क्योकि उसकी 2 बेटियों और 1 बेटे का भविष्य खतरे में था..

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सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के माता पिता की मौत हो गयी , उसका एक भाई भी पागल हो गया . उसकी पैरवी करने वाला उसका साला भी एक्सीडेंट से चल बसा, आख़िरकार उनकी सास भी दामाद और पुत्र वियोग में प्राण त्याग दी .. ये सब कुछ सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जेल से देख रहा था . ये घटना रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया के प्रतापगढ़ कुंडा से मात्र लगभग 60 किलोमीटर दूर घट रही थी जिस पर वो पूरी तरह से खामोश रहे थे , और आज भी खामोश हैं .

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इतना ही नहीं , सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पत्नी मूल रूप से प्रतापगढ़ की ही रहने वाली थीं .. रघुराज प्रताप सिंह की वोटर भी हैं वो जिन्होंने बचपन से ही अपने माता पिता और परिवार को राजा भैया को वोट देते देखा था , उन्हें पूरा विश्वास था कि राजा भैया उनके सुहाग को बचाने में उनकी मदद जरूर करेंगे क्योकि वो भी उसी क्षेत्र की क्षत्राणी थी .. उन्होंने अपनी गुहार बार बार भदरी महल तक पहुचाने की कोशिश की पर महल की दीवारें इतनी ऊंची थी कि आवाज तो दूर उस क्षत्राणी का रोना भी राजा भैया को सुनाई नहीं दिया ..

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आज भी सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह और नबी अहमद का विवाद राजा भैया के गढ़ कहे जाने वाले प्रतापगढ़ और प्रयागराज के बच्चे बच्चे की जुबान पर है . 4 वर्ष से ज्यादा समय से सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह तमाम सबूत गवाह अपने पक्ष में होते हुए भी जेल काट रहा है , इतना ही नहीं , उसकी बेटियों के नाम तक स्कूल से काट दिए गये थे और उनकी जमानत आदि के लिए वकील तक नहीं मिल रहे थे .. पर सवर्ण वोटों की ताल ठोंकने वाले तब से आज तक एक क्षत्राणी द्वारा अकेले लड़े जा रहे संघर्ष पर खामोश हैं .. खास कर तब जब उस क्षत्राणी का परिवार उनका खानदानी वोटर है ..

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आज तक एक भी बार रघुराज प्रताप सिंह ने अपने ही जिले की उस जीते जी विधवा बन चुकी क्षत्राणी से नहीं मिले , न ही मिलने का समय दिया .. 4 वर्ष गुजर जाने के बाद उन तक मदद की गुहार पहुचाया वो परिवार अब कर्ज ले कर जैसे तैसे अपना गुजारा कर रहा है और सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जेल की सलाखों के पीछे है.. क्षत्राणी सपना सिंह ने अपने ही जिले के कथित स्वर्ण हित चिंतकों और बड़े बड़े क्षत्रपों के होते हुए भी खुद को जीते जी विधवा मान लिया है और अपने ३ बच्चो को राणा प्रताप के परिवार की तरह घास की रोटी खिला कर जीवित रख रही है .. शैलेन्द्र सिंह प्रतापगढ़ से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर रायबरेली जेल में बंद हो कर अपने जीवन की अंतहीन यात्रा पर निकल जैसा चुका है..

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यद्दपि अंतिम फैसला सरकार और अदालत को लेना होता है लेकिन उस परिवार का दर्द केवल इतना है कि उनकी आवाज ऊपर तक पहुचाने के लिए उनके ही छत्रप कभी सामने नहीं आये ..  सवर्ण हिन्दू वोटों के नाम पर निकली जनसत्ता दल ( लोकतान्त्रिक ) पार्टी के लिए अपने ही जिले की क्षत्राणी सपना सिंह की कहानी और सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का जीवन एक ऐसा सवाल है जो शायद उनके लिए उत्तर न दे पाने जैसा ही होगा .. सवाल ये भी बनता है कि कहीं सामने “नबी अहमद” नाम होने के चलते राजा भैया ने खुद को बंधा हुआ महसूस किया हो और शैलेन्द्र सिंह की पत्नी और बच्चो बच्चियों की गुहार को जान बूझ कर अनसुना कर दिया हो ..

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