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भाजपा के बागी नेता और पूर्व सांसद चंदन मित्रा के TMC में जाने का जश्न मना रही थी कांग्रेस .. लेकिन अचानक ही जश्न बंद और मातम शुरू

कुछ दिन से भारतीय जनता पार्टी के बागियों को प्रोत्साहित कर के कांग्रेस ने अपने आने वाले एक बेहतर समय की कल्पना की थी . भाजपा एक शत्रुघ्न सिन्हा ने जहाँ विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में खड़े हो कर कांग्रेस को चौंका दिया तो वहीँ ममता बनर्जी के साथ भाजपा के पूर्व सांसद चंदन मित्रा के जाने के बाद उसको भाजपा का पतन बता कर जश्न मना रही कांग्रेस पार्टी अचानक ही हुआ कुछ ऐसा कि बैकफुट पर आ गयी . 

विदित हो कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्यसभा सदस्य और बागी नेता चंदन मित्रा ने शनिवार (21 जुलाई) को आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी की वफादारी स्वीकार करते हुए तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है. शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी शनिवार को धर्मतल्ला में आयोजित कार्यक्रम से पहले चंदन मित्रा ने आधिकारिक तौर पर पार्टी में शामिल हो गए. इसके बाद तत्काल ही कांग्रेस ने इसको भाजपा का पतन बताते हुए एक प्रकार से जश्न सा मनाना शुरू कर दिया था था लेकिन कांग्रेस की ये ख़ुशी ज्यादा समय नहीं टिक पाई और आई एक बुरी खबर .

विदित हो कि भाजपा के बागी चंदन मित्रा के थोड़े समय के बाद 4 कांग्रेसी विधायक कांग्रेस कांग्रेस से अलग हो गए और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया . इन चारों कांग्रेसी विद्याको के नाम है विधायक समर मुखर्जी, अबु ताहिर, सबीना यास्मीन और अखरूजमां  जो अब कांग्रेस के विधायक नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के नेता बन चुके हैं . इस तोड़ जोड़ के बाद कांग्रेस ने जश्न मनाना बंद करते हुए फ़ौरन ही अपने टूट रहे विधायकों को वापस लेने की बहुत कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाए और उन्होंने राहुल गाँधी के बजाय ममता बनर्जी में अपना बेहतर नेता स्वीकार कर लिया .  आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस का हाथ थामते ही सभी नेता शहीद दिवस के कार्यक्रम में एक साथ नजर आए. कार्यक्रम के दौरान ये सभी नेता ममता बनर्जी के हर तथ्य से सहमत नजर आये .  

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