बर्खास्त होने वाले और बर्खास्त करने वाले… दोनों है विपक्ष में

एक बर्खास्त जवान का मुद्दा आज कल सबसे ज्यादा गर्म है भारत की राजनीति में.. तेज बहादुर यादव के नाम का शोर हर कहीं है , शायद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बाद ये दूसरा नाम है जिसको इतना ज्यादा चर्चा में लाया गया , ख़ास कर विपक्ष के द्वारा .. समाजवादी पार्टी ने तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी बनाया था लेकिन अब उनका तकनीकी कारणों से नामांकन चुनाव आयोग द्वारा खारिज कर दिया गया तो एक बार फिर से सेना और जवान अदि का मुद्दा गर्म होता दिखाई दे रहा है .

भाजपा को वोट देकर लौट रहे दलित परिवार पर उन्मादियों का हमला… नफरत की राजनीति ले रही खूनी रंग

लेकिन यहाँ पर ध्यान देना चाहिए कि इस बार विपक्ष बड़े बेमेल टीम के साथ मैदान में उतरा है . इस बार विपक्ष में सेना से बर्खास्त होने वाले और सेना से बर्खास्त करने वाले दोनों ही मौजूद हैं . पहले चर्चा वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे तेज बहादुर यादव की करते हैं . BSF में रहते हुए नियमावली का उल्लंघन करने वाले और उस से भी पहले कई बार अनुशासन के नियमो को न पालन करने वाले तेज बहादुर यादव को BSF ने जांच के बाद बर्खास्त कर दिया था .

अहमद को अपना कार्यकर्ता बहुत विश्वास से बनाया था भाजपा ने.. अब वही बना पूरे एक प्रदेश में उनके लिए आफत

उनका बनाया वीडियो पूरी दुनिया भर चर्चा का विषय बना था जिसमे उन्होंने सेना को गोला बारूद ही नहीं बल्कि खाने तक का मोहताज़ घोषित जैसा करना का प्रयास किया था . उस समय उनके पाकिस्तान से 500 फ्रेंड फेसबुक में पाए गये थे जिस उनके ऊपर संदेह का बड़ा कारण बना था . उनका वीडियो भारत से ज्यादा पाकिस्तान में देखा गया था . आज भी उनके द्वारा बनाया वीडियो पाकिस्तान में लगभग हर भारत विरोधी के मोबाईल में है जिसको वो समूह में भारत का मजाक बनाते हुए देखता है .

चंदौली पुलिस को मिली बडी़ सफलता, 15000 रुपए का इनामियां लुटेरा अभियुक्त गिरफ्तार, कब्जे से एक अदद तमंचा व कारतूस बरामद

ये बात तो थी विपक्ष में आये उस व्यक्ति की जो बर्खास्त हुआ था . लेकिन विपक्ष में ऐसे भी है जिन्होंने सैनिको को बर्खास्त किया था . राहुल गाँधी के साथ बार बार एक फौजी अफसर दिखाई देर हे हैं जिनका नाम लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा  है .   ये फिलहाल मोदी के विरोध में और राहुल गांधी के समर्थन में लगातार दिए जाने वाले बयानों के लिए चर्चा में है .  इतना ही नहीं ये पूर्व फौजी अधिकारी कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस तक में दिखे थे .. पर इसी के साथ इनके जीवन से जुडी है एक ऐसी घटना जो एक समय सोशल मीडिया की सबसे वायरल खबर बन गयी थी और कई लोगों में आक्रोश का कारण भी .

अपने कुछ समर्थको को राजनीति में आता देख कर दुस्साहसिक हुए नक्सली.. हमले में देश के 15 योद्धा फिर वीरगति को प्राप्त

ये 29 अप्रैल और 30 अप्रैल के बीच रात की घटना है जब भारत की सेना ने दावा किया था कि उसने ३ घुसपैठियों को मार गिराया है . इन तीनो के नाम मोहम्मद शफी , शहजाद अहमद और रियाज़ अहमद था . उस समय सूत्रों के अनुसार इन तीनो की हरकतें संदिग्ध थीं इसलिए इन पर सेना की विशेष नजर थी .. इनकी मौत के बाद एक बार फिर से तत्कालीन सरकार ने अपने सेकुलरिज्म के सिद्धांतो को लागू करवाया और इस पूरे मामले की जांच करवाई .

श्रीलंका के बाद निशाने पर था भारत.. NIA ने अब वो बताया जिसे पहले दिन से बता रहा है  सुदर्शन न्यूज़

इस जांच के बाद जो सामने आया वो किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी था . इस भारत की सेना के २ जांबाज़ आफरों कर्नल डी के पठानिया और कैप्टन उपेन्द्र ही नहीं बल्कि सूबेदार सतबीर सिंह, हवलदार बीर सिंह, सिपाही चंद्रभान, सिपाही नागेंद्र सिंह और सिपाही नरेंद्र सिंह को दोषी पाया गया .. इस मामले में फौजी अफसरों की  वर्दी  उतरवा ली गई थी और उन सभी सैनिको को अंतिम सांस तक जेल काटने की सजा मिली ..इस फैसले  से सेना स्तब्ध   हो गयी थी .. यहाँ ये ध्यान रखना जरूरी है कि भारत के इन सभी जवानो को मिली सजा में जनरल हुड्डा की सबसे बड़ी भूमिका थी और वो कश्मीरियों को ये संदेश देने में सफल रहे थे कि भारत के अन्दर एक सेकुलर सरकार शासन कर रही है .

श्रीराम की जन्मभूमि पर आत्महत्या कर लेगा एक मुसलमान… अगर फिर से मोदी न आये तो

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने व हमें मज़बूत करने के लिए आर्थिक सहयोग करें।

Paytm – 9540115511

Share This Post