जानिये प्रधानमन्त्री मोदी द्वारा गाय और ॐ शब्द बोलने पर अब तक किस- 2 को हुआ दर्द ? जबकि वही लोग दिन में कई बार कहते हैं – “इंशाअल्लाह”


ये वो तथाकथित नाम हैं जो दिन में कई बार इंशाअल्लाह कहते हुए अपने भाषण आदि को खत्म करते हैं . इनके हिसाब से हिन्दू और हिंदुत्व से जुडी किसी चीज का नाम लेना है साम्प्रदायिकता है . सेकुलरिज्म के विकृत रूप को करने के चलते ही ये चुनावों में हिन्दू समाज के आक्रोश का कारण बनते हैं लेकिन फिर भी अपने खुद से गढ़े गये धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत से अभी भी ये जरा सा भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं .. एक बार फिर से चर्चा में है प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का बयान .

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी ने योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि मथुरा से कहा था कि कुछ लोग ऐसे हैं जो ॐ और गाय का नाम लेते ही असहज हो जाते हैं . यहाँ ये ध्यान देने योग्य है कि ॐ जैसे पवित्र शब्द पर अन्तराष्ट्रीय योग दिवस पर किया गया विरोध अभी भी सबको याद है जबकि विदेशो में इसी के उच्चारण के साथ सिर्फ योग दिवस पर ही नहीं, लगभग हर दिन योग शिविर आदि का आयोजन होता है जिसमे बड़ी से बड़ी विदेशी हस्तियाँ भी शामिल होतीं हैं .

इस बार मोदी के बयान पर सबसे ज्यादा पीड़ा कभी संसद में सांसदों को इस्लाम कबूलने की सलाह देने वाले और 15 मिनट में हिदुओ को खत्म करने की धमकी देने वाले दंगाई के भाई ओवैसी को हुई है.. ओवैसी ने तो चोरी के आरोपी तबरेज का पक्ष लिया जबकि उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने ओवैसी जैसे लोगों को बेनकाब कर दिया है . ओवैसी ने कहा कि ‘लोग जब गाय के नाम पर मारे जा रहे हैं तो आपको चिंतित होना चाहिए. प्रधानमंत्री को चिंतित होना चाहिए कि संविधान का घोर उल्लंघन हो रहा है .

इसी क्रम में जिस पार्टी को छोड़ कर कई लोग भाजपा और शिवसेना में चले गये हैं उस NCP ने भी गाय और ॐ शब्द आते ही अपनी पीड़ा व्यक्त की है . शरद पवार के बेहद खास राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसद माजिद मेमन ने कहा कि मोदी एक धर्मनिरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री हैं और उन्हें अक्सर धार्मिक मामलों का जिक्र नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘वह धर्मगुरु नहीं हैं… जबकि इसी पार्टी ने कभी मनमोहन सिंह के उस बयान का खुल कर समर्थन किया था कि देश के संसाधनो पर पहला अधिकार मुसलमानों का है ..

हिन्दू विरोध को ही वर्तमान में अपनी राजनीती का आधार बना चुकी कम्युनिस्ट पार्टी भी कहाँ पीछे हटने वाली है . कन्हैया जैसे लोगों को नेता मानने वाली भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा कि प्रधानमंत्री ‘ओम’ और ‘गाय’ के मुद्दे क्यों उठा रहे हैं, जबकि उन्हें देश की अर्थव्यवस्था की बात करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘वह ऐसे समय में यह बात कह रहे हैं जब गाय और भगवान के नाम पर देश भर में पीट-पीट कर हत्या करने की घटनाएं हो रही हैं.


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