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हिंदी के उच्चारण में असहजता मससूस करने वाली ममता बनर्जी के अनुसार मोदी बुरे इसलिए हैं क्योंकि वो नहीं बोल पाते फर्राटेदार अंग्रेजी

अब ये भारत की नई राजनीति का नया नमूना है जिसमें शुद्ध हिंदी के उच्चारण को अनदेखा कर के अच्छे और बुरे का फैसला सिर्फ इस आधार पर किया जाएगा कि वो बेहतर व फर्राटेदार अंग्रेजी बोल पाता है या नही..इस राजनीति की शुरुआत करने वाली हैं अपनी कथित सेकुलर छवि के लिए संसार भर में धर्मनिरपेक्षता की एक नई परिभाषा बना रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी..भाषावाद की शुरुआत बंगाल की सत्ता करेगी इस पर आश्चर्य जरूर हो रहा आम जनता को लेकिन आखिरकार उनके बयान से बहुत कुछ बिना बताए ही साबित हो रहा है..

ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी द्वारा अंग्रेजी के बजाय हिंदी भाषा को प्राथमिकता देने का मज़ाक उड़ाया गया है..मोदी के हिंदी प्रेम का मज़ाक उड़ाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि नरेंद्र मोदी बिना सामने स्क्रीन देखे एक भी शब्द अंग्रेजी के नहीं पढ़ पाते हैं.. इतना ही नही, उन्होंने मोदी के गरीबो हेतु किये गए एक बहुत बड़े प्रयास आयुष्मान भारत को झटका देते हुए साफ साफ कहा है कि एक भी रुपया इस योजना में पश्चिम बंगाल सरकार नही लगाएगी और इसका सारा पैसा मोदी सरकार खुद से भरे..ये वही ममता बनर्जी हैं जिनको शुद्ध हिंदी के उच्चारण में असहजता महसूस होती है जो उनके कई भाषणों में साफ देखा जा सकता है..

यहां पर ये ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोदी सरकार की मुखर विरोधी रही हैं. गुरुवार को ही उन्होंने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा नहीं होगा. ममता का आरोप है कि इस योजना के तहत केंद्र सरकार राजनीति कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल के हर घर में चिट्ठी भेज रहे हैं जिसमें उनकी तस्वीर है और कमल का निशान है. गत समय से ममता शासित बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेताओ की एक के बाद एक हत्याएं हुई हैं जिनमें से कई का आरोप तृणमूल कार्यकर्ताओ पर लगा है..

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