नफरत के पोस्टर पर एक और पोस्टर.. इस पोस्टर में सवाल राहुल गांधी से

२० जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लोकसभा में जब तीखी बहस हो रही थी, उस समय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वो किया जिसकी आशंका भी नहीं थी. भारतीय जनता पार्टी तथा प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी पर तीखे हमलों के बाद अचानक से राहुल गांधी मोदी जी के पास गये तथा उनके गले लग गये. हालाँकि भाजपा की तरफ से इसे गले पड़ना बताया जा रहा है. राहुल गांधी के इस करती से संसद तथा पूरा देश हक्का बक्का रह गया. ऐसा करके राहुल गांधी ने ये सन्देश देने की कोशिश की कि वह नफरत नहीं करते हैं. हनाल्की इसके बाद राहुल गांधी ने आँख भी मारी जिसके कारण  एक बार फिर से निशाने पर राहुल गांधी ही आ गये.

संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी के पीएम नरेंद्र मोदी से गले मिलने के बाद अब पोस्टर वार शुरू हो गया है. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में एक पोस्टर जारी किया था, जिसमें राहुल गांधी का पीएम मोदी से गले मिलने वाला फोटो लगाया गया था, साथ ही इस पोस्टर में लिखा था- ‘नफरत से नहीं प्यार से जीतेंगे’. इस पोस्टर की खास बात ये थी कि इसमें नफरत को भगवा रंग से लिखा गया था तथा हरे को प्यार से. इस पर सवाल खड़े हुए कि कांग्रेस रंगों की राजनीति कर रही है तथा नफरत शब्द भगवा में लिखकर ध्रुवीकरण का कार्ड खेल रही है. अब कांग्रेस के पोस्टर को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी को भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल से नसीहत मिलनी शुरू हो गई है. इस बाबत दिल्ली के विभिन्न इलाकों में पोस्टर लगाए गए हैं. इनमें राहुल गांधी को 84 दंगों की पीड़ितों से मिलने की सलाह दी गई है. भाजपा-अकाली दल के विधायक और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली में पोस्टर लगवाकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है. इन पोस्टरों में लिखा है- ‘राहुल गांधी को जगदीश कौर और उनके जैसे हज़ारों परिवारों से मिलना चाहिए, जिनके परिवार को 1984 जनसंहार में जिंदा जला दिया गया था.

इसके अलावा, इन पोस्टरों में लिखा है- ‘प्रचार पाने के लिए गले मत मिलो राहुल गांधी! कांग्रेस के दिए जख्म मिटाने के लिए गले मिलो’. पोस्टर में यह भी लिखा है- ‘है दम अपने परिवार की फैलाई नफरत मिटाने का?’ इसके साथ ही इस पोस्टर में राहुल गांधी का पीएम मोदी से गले मिलते हुए फोटो भी लगाया गया है. इस पोस्टर में राहुल से पूंचा जा रहा है कि अगर आप नफरत नहीं बल्कि प्यार की राजनीति करते हैं तब १९८४ के दंगा पीड़ितों से आप कब मिलेंगे.

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